हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा ग़ज़ा में अब तक 40,000 से अधिक की मौत

ग़ज़ा के शेख रदवान मोहल्ले में इसराइली हमले में तबाही

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    • Author, योलांद नेल, बीबीसी मध्य पूर्व संवाददाता, यरूशलम से
    • पदनाम, मेर्लिन थॉमस और पॉल ब्राउन, बीबीसी वेरिफ़ाई, लंदन से

हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि बीते साल से शुरु हुए इसराइली हमलों में अब तक ग़ज़ा में 40 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई है और 92 हज़ार लोग घायल हुए हैं.

बीते साल सात अक्टूबर में हमास ने इसराइल पर हमला किया था जिसके कुछ दिन बाद इसराइल ने जवाबी कार्रवाई शुरू की. हमास के हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी.

हमास के जारी किए ताज़ा आंकड़ों के अनुसार गुरुवार तक इसराइल के हमलों में ग़ज़ा में 40,005 जानें गई हैं. ये ग़ज़ा की कुल आबादी (23 लाख) का 1.7 फ़ीसदी है. ये आंकड़ा इस तरफ इशारा करता है कि युद्ध की मानवीय क़ीमत क्या हो सकती है.

हताहतों की संख्या के अलावा ग़ज़ा की सैटेलाइट तस्वीरों को देखें तो पता चलता है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक यहां की 60 फ़ीसदी इमारतें तबाह हो चुकी हैं. तस्वीरों से ये भी पता चलता है कि बीते कुछ महीनों में ग़ज़ा के दक्षिणी शहर रफ़ाह में भारी तबाही हुई है.

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हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं उनमें आम लोगों और हमास के लड़ाकों की संख्या अलग-अलग कर नहीं बताई गई है.

हालांकि आंकड़ों में ये कहा गया है कि मारे जाने वालों में महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों की संख्या अधिक है.

इसी महीने इसराइली सेना ने बीबीसी को बताया था कि हमास के ख़िलाफ़ युद्ध में अब तक 15 हज़ार से अधिक आतंकवादी मारे जा चुके हैं.

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के स्वतंत्र रूप से ग़ज़ा में प्रवेश करने पर इसराइल ने फिलहाल रोक लगा रखी है. ऐसे में दोनों पक्षों की तरफ से दिए गए आंकड़ों की पुष्टि नहीं की जा सकती.

इससे पहले संघर्ष के दौरान ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए आंकड़ों का व्यापक इस्तेमाल किया जाता रहा है. संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानते रहे हैं.

हमास कैसे जुटाता हैं आंकड़े?

नुसेरत शरणार्थी शिविर पर हुए एक हमले में मारे गए लोगों के परिजन एक दूसरे को सहारा देते हुए

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हमास का स्वास्थ्य मंत्रालय केवल अस्पतालों में हुई मौतों की गिनती करता था और आंकड़ों को एक केंद्रीय डेटाबेस में दर्ज करता है. इसमें मृतक व्यक्ति के नाम के अलावा पहचान संख्या और अन्य विवरण जोड़े जाते थे.

लेकिन ठसाठस भरे शवगृहों, अस्पतालों के आसपास चल रही जंग और इंटरनेट और फ़ोन कनेक्टिविटी प्रभावित होने के कारण बीते साल के आख़िरी महीनों से ये मंत्रालय कारगर तरीके से काम नहीं कर पा रहा.

ऐसे में हमास गवर्नमेंट मीडिया ऑफ़िस (जीएमओ) मौतों के आंकड़े जारी करने लगी है. इनमें "विश्वसनीय मीडिया" रिपोर्टों में दिए जा रहे आंकड़े भी थे.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां इन आंकड़ों को अपने डाटा में शामिल करने लगीं. साथ ही उपलब्ध होने पर ग़ज़ा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े भी लिए जाने लगे.

हाल के वक्त में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने ऑनलाइन डेटाबेस में युद्ध में मारे गए लोगों के साथ-साथ उनके परिजनों के नाम भी शामिल करने शुरू कर दिए हैं.

हालांकि, मंत्रालय मौतों के कुल आंकड़ों में उन शवों की संख्या को अलग कर गिनता है जिनकी पहचान नहीं की जा सकी है.

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हमास के आंकड़ों पर इसराइल का सवालिया निशान

संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का हवाला देते हुए इन आंकड़ों का इस्तेमाल करता है और इस बात पर ज़ोर देता है ज़मीनी स्थिति माकूल न होने और हताहतों की संख्या काफी अधिक होने के कारण ग़ज़ा में मौजूद उसकी टीमें इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सकती.

हालांकि हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए आंकड़ों की विश्वसनीयता पर इसराइल बार-बार सवाल उठाता रहा है.

इसराइली विदेश मंत्री इसराइल कात्ज़ कहते हैं कि "ये एक आंतकी संगठन का जारी किया फर्जी डाटा है."

लेकिन कई जानकारों ने भी कहा है कि ग़ज़ा में युद्ध के कारण मारे जाने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. स्थानीय अधिकारियों का आकलन है कि इसराइल के हवाई हमलों में तबाह हुई इमारतों के मलबे में अभी भी कम से कम 10 हज़ार लोग दबे हो सकते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर युद्ध रोक भी दिया गया तो युद्ध में मौत के अलावा कई मौतों की वजह अलग हो सकती है जैसे बीमारी और भूख.

युद्ध के ख़त्म होने के बाद जब मलबे में दबे लोगों के शवों को बाहर निकालने और लापता लोगों की तलाश का काम शुरू किया जाएगा, उसके बाद ही हमास के लड़ाकों समेत मारे गए और लोगों की सही तस्वीर सामने आ सकेगी.

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूहों के साथ-साथ इसराइली सेना से भी ये उम्मीद की जा सकती है कि वो मरने वालों की सही संख्या का पता करने के लिए अपने-अपने स्तर पर जांच कराएं.

ग़ज़ा की तस्वीर

रफ़ाह और कुछ और इलाक़ों के लिए इसराइली सेना के इलाक़ा खाली करने के आदेश के बाद जगह छोड़कर जाने फलस्तीनी

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सैटेलाइट से मिली ग़ज़ा की तस्वीरें इशारा करती हैं कि युद्ध के शुरू होने के बाद से यहां 59.3 फ़ीसदी इमारतें तबाह हो चुकी हैं या उन्हें नुक़सान पहुंचा है.

न्यूयॉर्क की सिटी यूनिवर्सिटी के कोरे स्केर और ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के जैमॉन वॉन डेन होक ने ग़ज़ा में इमारतों को हुए नुक़सान का विश्लेषण किया है. उन्होंने तस्वीरों की तुलना की है और पाया है कि इमारतों की बनावट और उनकी ऊंचाई में अचानक तब्दीली आई है.

इन जानकारों के विश्लेषण के अनुसार इस साल मार्च के बाद से ग़ज़ा के दक्षिणी शहर रफ़ाह की इमारतों को युद्ध के कारण भारी नुक़सान झेलना पड़ा है.

छह मई को इसराइल ने इस शहर पर हमले शुरू किए थे, जिसके बाद से यहां इमारतों के तबाह होने में तेज़ी आई. इसराइली सेना का कहना है कि इस इलाक़े को अपने नियंत्रण में लेना और हमास को जड़ के ख़त्म करना उसका उद्देश्य है.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने ग़ज़ा की सैटेलाइट तस्वीरों को देखा और पाया कि शहर के बड़े-बड़े हिस्सों को तबाह कर छोड़ दिया गया है, ख़ासकर मिस्र से सटी सीमा के पास और उसके उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को.

बीबीसी ने सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियोज़ और इसराइली सेना के शेयर किए फुटेज की जांच की है और पाया है कि पूरे रफ़ाह में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है जो इसराइल के हवाई हमलों के साथ-साथ ज़मीन पर उसकी सेना की कार्रवाई के कारण हुई है.

सैटेलाइट तस्वीरों में देखा गया है कि तथाकथित फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर के आसपास की जगह को भी साफ़ कर दिया गया है. ये 10 किलोमीटर (9 मील) लंबी पट्टी है जो दक्षिण में मिस्र की सीमा से सटी है.

तस्वीरों के विश्लेषण से बीबीसी वेरिफ़ाई ने पाया कि कॉरिडोर के आसपास के जिन हिस्सों को साफ किया गया है वहां पास में इसराइली सेना की गाड़ियां खड़ी हैं.

इसमें वो छोटा मोहल्ला भी शामिल है जो समुद्रतट के पास उस जगह पर है जहां ग़ज़ा की सीमा मिस्र से सटती है. रफ़ाह पर हमले के एक महीने के भीतर इस मोहल्ले को नेस्तानाबूत कर दिया गया था.

एक इसराइली सैनिक ने यहां की ज़मीनी स्थिति का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था. इसमें यहां एक ऑब्ज़र्वेशन टावर (निगरानी के लिए टावर) देखा गया जो बाद में बनाया गया था.

इसराइली सेना के अभियान ने रफ़ाह में महत्वपूर्ण स्थलों को भी नष्ट कर दिया है जिनमें बॉर्डर क्रॉसिंग के अलावा कई मस्जिदें और शहर के मुख्य बाज़ार शामिल है.

इसराइली हमलों में ग़ज़ा शहर और रफ़ाह में इमारतों को भारी नुक़सान पहुंचा है

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बीबीसी ने सात मई के कुछ वीडियोज़ की जांच की है जिनमें इसराइली टैंक रफ़ाह बॉर्डर क्रॉसिंग के पास "वेलकम टू ग़ज़ा" (ग़ज़ा में स्वागत है) लिखे एक साइनबोर्ड को तोड़ते हुए दिखते हैं.

इसी तारीख को पोस्ट किए गए कुछ और वीडियोज़ में देखा गया कि अबरार मस्जिद के नीले गुम्बद को भी नुक़सान पहुंचाया गया था. इसके बाद की सैटेलाइट तस्वीरों को देखने पर पाया गया कि इस इमारत को बाद में नष्ट कर दिया गया.

इसके अलावा 27 जून को सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में देखा गया कि रफ़ाह के जानेमाने अल-नजमा चौराहे के आसपास की सड़कें और हरेभरे लॉन अब जल गए हैं और आसपास की इमारतें भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

बीते साल सात अक्तूबर को हमास के लड़ाकों ने इसराइल पर हमला किया था. इसराइल के अनुसार उन्होंने क़रीब 1,200 लोगों को मारा और 251 लोगों को अपने साथ बंधक बनाकर ले गए.

अतिरिक्त रिपोर्टिंग: यरुशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट अशर

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