ईरान में इसराइली हमले का दावा, वो बातें जो अब तक पता हैं

19 अप्रैल को ईरान के तेहरान में मीडिया चैनलों पर इसराइली हमले के दावे से जुड़ी ख़बरें रिपोर्ट की जा रही हैं.

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इमेज कैप्शन, 19 अप्रैल को ईरान के तेहरान में मीडिया चैनलों पर इसराइली हमले के दावे से जुड़ी ख़बरें रिपोर्ट की जा रही हैं.

अमेरिका के दो अधिकारियों ने इसराइल की ओर से शुक्रवार को ईरान पर हमले का दावा किया है. मगर अब ईरान के शीर्ष अधिकारियों की ओर से कहा जा रहा है कि कोई मिसाइल हमला नहीं हुआ है.

ईरानी स्पेस एजेंसी के प्रवक्ता हुसैन दालिरियन ने लिखा, ''इस्फ़हान या देश के किसी भी हिस्से में बाहर से कोई हवाई हमला नहीं हुआ है.''

हुसैन दालिरियन ने कहा, ''इसराइल ने ड्रोन्स उड़ाने की सिर्फ़ नाकाम और अपमानजनक कोशिश की है. ये ड्रोन्स मार गिराए गए हैं.''

ईरान के सरकारी मीडिया ने इस्फ़हान में स्थित परमाणु ठिकानों का वीडियो जारी करते हुए कहा कि ये पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

ईरान ने ये भी कहा है कि जिन हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध लगाया हुआ था, उन्हें अब हटा दिया गया है.

अमेरिकी मीडिया का कहना है कि इसराइल ने हमले की जानकारी पहले से ही बाइडन प्रशासन को दी हुई थी.

इस पूरे घटनाक्रम पर इसराइल की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.

ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों का वीडियो जारी किया है

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ईरान पर हमले का दावा- क्या कुछ पता है

शुक्रवार सुबह.

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सबसे पहले अमेरिका के दो अधिकारियों ने कहा कि इसराइल ने ईरान पर मिसाइल से हमला किया. अमेरिकी अधिकारियों ने ये जानकारी बीबीसी के अमेरिका में सहयोगी सीबीएस न्यूज़ को दी.

इसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया की ओर से कहा गया कि देश के एयर डिफेंस सिस्टम को कई प्रांतों में सक्रिय कर दिया गया है.

ईरान की एक समाचार एजेंसी के मुताबिक़ ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर इस्फ़हान में शुक्रवार सुबह धमाके की आवाज़ सुनी गई.

ईरान के सरकारी मीडिया आईआरआईबी ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कहा कि देश के कई हिस्सों में जो धमाके की आवाज़ें सुनाई दीं, वो एयर डिफेंस सिस्टम के अज्ञात मिनी ड्रोन्स को निशाना बनाने के कारण हुई आवाज़ें हैं.

इस्फ़हान में ईरान की सेना का बड़ा एयर बेस है और इस क्षेत्र में परमाणु हथियारों से जुड़े कई अहम ठिकाने भी हैं.

ईरान के सरकारी मीडिया का विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कहना है कि परमाणु हथियारों से जुड़े ठिकाने सुरक्षित हैं.

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़, ईरानी मीडिया में ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि कई शहरों में उड़ानें रद्द की गईं. जिन शहरों में उड़ानें रद्द की गई हैं, उनमें तेहरान, शिराज़ और इस्फ़हान शामिल हैं. हालांकि ईरान का अब कहना है कि ये उड़ान सेवाएं फिर से चालू हो गई हैं.

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाह्यान ने कहा था कि इसराइल की किसी जवाबी कार्रवाई का तुरंत और बड़े स्तर पर जवाब दिया जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम बढ़े, सोना भी महंगा

ईरान

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अमेरिकी अधिकारियों की ओर से ईरान पर इसराइली मिसाइलों की ख़बरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल और गोल्ड के दाम बढ़ गए हैं.

शुक्रवार को एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम ढाई फीसदी बढ़ कर 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए. जबकि गोल्ड के दाम 2400 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए.

इस बीच, जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों के सूचकांक धराशायी हो गए.

निवेशक इसराइल की जवाबी कार्रवाई पर पैनी नज़र रखे हुए हैं. उनका मानना है कि मध्य पूर्व में इस तरह के संघर्ष से तेल की ग्लोबल सप्लाई पर असर पड़ सकता है.

इससे कई देशों में आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं. ओमान और ईरान के बीच होरमुज जल डमरुमध्य वाले मार्ग में पहले से तनाव ही चल रहा है. ये काफी अहम समुद्री मार्ग है.

दुनिया की पूरी ऑयल सप्लाई का 20 फीसदी इसी मार्ग से गुजरता है. ईरान दुनिया का सातवां सबसे बड़ा तेल सप्लायर देश है.

तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन ओेपेक के सदस्य सऊदी अरब, ईरान, यूएई, कुवैत और इराक इसी मार्ग से अपनी ज्यादातर सप्लाई विदेश भेजते हैं.

इसराइल

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ईरान ने इसराइल पर किया था हमला

बीते रविवार ईरान ने इसराइल पर करीब 300 मिसाइल और ड्रोन दागे थे.

इसराइल ने ईरान की ओर से दागे गए सभी ड्रोन और मिसाइल दागने का दावा किया था.

हालांकि इसके बाद ही इसराइल की ओर से दावा किया जा रहा था कि वो सही समय आने पर ईरान की कार्रवाई का जवाब जरूर देगा.

एक अप्रैल को सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी दूतावास पर हमला हुआ था. इस हमले में एक वरिष्ठ जनरल समेत कुल 13 लोगों की मौत हुई.

ईरान ने इस हमले के लिए इसराइल को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि इसराइल ने सीधे तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली.

इसराइल और ईरान क्यों हैं दुश्मन

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दोनों देश 1979 तक एक दूसरे के सहयोगी हुआ करते थे. इसी साल ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और देश में एक ऐसी सरकार आई जो विचारधारा के स्तर पर इसराइल की घोर विरोधी थी.

अब ईरान इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता और उसके पूरी तरह से ख़ात्मे की वक़ालत करता है.

ईरान के सुप्रीम लीडर रहे आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई कहते रहे हैं कि इसराइल ‘कैंसर का ट्यूमर’ है और उसे बेशक़ ‘जड़ों से उखाड़ फ़ेका जाएगा और बर्बाद कर दिया जाएगा.’

इसराइल भी कहता है कि ईरान उसके अस्तित्व के लिए ख़तरा है. इसराइल कहता है कि ईरान फ़लस्तीनी हथियारबंद समूहों और लेबनान में शिया गुट हिज़बुल्लाह को फंड करता है.

इसराइल का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बना रहा है. हालांकि ईरान न्यूक्लियर बम बनाने से बिल्कुल इंकार करता है.

हमला और जवाबी हमला

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ईरान ने साफ़ कहा था कि इसराइल पर उसका हमला एक अप्रैल को दमिश्क में उसके वाणिज्य दूतावास पर हुए हवाई हमले का जवाब है. उस हमले में कई वरिष्ठ ईरानी कमांडर मारे गए थे.

ईरान इन हमलों के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार मानता है और वो वाणिज्य दूतावास पर हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताता है.

इसराइल ने सार्वजनिक रूप से ये नहीं कहा है कि ये हमले उसने किए हैं लेकिन ऐसी मान्यता है कि दमिश्क हमले के पीछे इसराइल ही था.

दमिश्क में हुए हवाई हमले में 13 लोग मारे गए थे. मरने वालों में ईरान की क़ुद्स फोर्स के ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रेज़ा ज़ाहेदी भी शामिल थे. क़ुद्स फ़ोर्स ईरान के इलीट सैन्य दस्ते रिपब्लिकन गार्ड्स की ईरान के बाहर काम करने वाली फ़ोर्स है.

ज़ाहेदी लेबनान के शिया गुट हिज़बुल्लाह का मार्गदर्शन करते थे.

दमिश्क में ईरान के ठिकाने पर हमला उस पैटर्न का हिस्सा लगता है जिसके तहत कई ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया था. माना जाता है कि इन सबके पीछे इसराइल का हाथ था.

हाल के महीनों में ईरान के रिपब्लिकन गार्डस के कई बड़े कमांडर सीरिया में मारे गए हैं.

रिपब्लिकन गार्ड्स सीरिया के रास्ते ही हिज़बुल्लाह के लिए हथियार और सैन्य साज़ो सामान भेजते हैं. इनमें मिसाइलें और रॉकेट तक शामिल हैं. इसराइल इन हथियारों की आपूर्ति को रोकने की कोशिश में है.

साथ ही वो सीरिया में ईरान की सैन्य ताक़त को मज़बूत होता भी नहीं देखना चाहता.

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