ईरान पर इसराइल के जवाबी हमले को क्या टाल सकते हैं अमेरिका और सहयोगी देश?

नेतन्याहू और बाइडन

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    • Author, जेरेमी बोवेन
    • पदनाम, बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के संपादक

इसराइल ने कहा है कि वो अपने तरीक़े और अपने हिसाब से चुने वक़्त पर ईरान को जवाब देगा.

बेनी गैंट्ज़ इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि उनके पश्चिमी सहयोगी देश उनके साथ खड़े हैं. गैंट्ज़ वैसे तो विपक्षी नेता हैं लेकिन सात अक्टूबर को हमास के हमले के बाद उन्हें इसराइल की वॉर कैबिनेट में शामिल किया गया था.

उन्होंने कहा, “इसराइल ही नहीं, पूरी दुनिया ईरान के ख़िलाफ़ है. यह एक रणनीतिक उपलब्धि है और इसे हमें इस्तेमाल करना होगा.”

गैंट्स के शब्द बताते हैं कि इसराइल की ओर से ईरान पर जवाबी हमला किए जाने की संभावनाएं ख़त्म नहीं हुई हैं.

इसराइल पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाने पर लेता रहा है. कभी साइबर अटैक करके तो कभी उसके अधिकारियों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन चाहते हैं कि सबसे अमीर पश्चिमी देशों का समूह जी-7 ईरान पर कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई करे. लेकिन इसमें अभी देर हो सकती है.

ईरान

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इमेज कैप्शन, ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन विकसित किए हैं

जब इसराइल ने दमिश्क में ईरान के दूतावास पर हमला किया था, तभी से जंग का दायरा बढ़ने का ख़तरा पैदा हो गया था.

एक अप्रैल को हुए इस हवाई हमले में एक वरिष्ठ ईरानी जनरल और उनके दो सहयोगी मारे गए थे.

इसराइल ने ये हमला करने से पहले अमेरिका से बात नहीं की थी. उसने सोचा होगा कि यही सही मौक़ा है जब ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के सीनियर कमांडर को मारा जा सकता है.

इस हमले के पीछे इसराइल का तर्क है कि राजनयिक परिसर में सेना के अफसर मौजूद थे, ऐसे में वहां हमला करना ग़लत नहीं था.

इस हमले के तुरंत बाद ही यह साफ़ हो गया था कि ईरान इसका जवाब देगा. इस मामले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने सीधे बयान जारी किया था.

धीमे हथियारों से किए हमले

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इसराइल, अमेरिका और उनके सहयोगियों के पास ईरानी हमले से निपटने की तैयारी के लिए काफ़ी समय था. इस दौरान बाइडन अपने गृह राज्य डेलावेयर की यात्रा से व्हाइट हाउस लौट आए.

ईरान ने ये हमला सुपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल के बजाय धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन्स से किया, जिन्हें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने से पहले दो घंटों तक रडार की स्क्रीन पर देखा जा सकता था.

विश्लेषकों को उम्मीद नहीं थी कि ईरान इतने बड़े स्तर पर हमला कर देगा. ऐसे में कई इसराइलियों को लग रहा है कि उनका देश इस हमले का जवाब ज़रूर देगा.

यह पहला मौक़ा था जब ईरान ने अपने यहां से इसराइल पर हथियार दागे. इनमें 300 ड्रोन, क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं.

इनमें से लगभग सभी को एयर डिफ़ेंस से नाकाम कर दिया गया. इसराइल के पास ऐसे हमलों को रोकने की क्षमता है और उसे अमेरिका, ब्रिटेन और जॉर्डन की भी मदद मिली, ख़ासकर अमेरिका की.

इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपना वादा दोहराया कि वो इसराइल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

इस समर्थन के बदले अमेरिका चाहता है कि इसराइल संयम बरते. राष्ट्रपति बाइडन ने प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश भेजा है- ईरान का हमला टाल दिया गया है, इसराइल को जीत मिली है, तो इस मामले को अब ईरानी धरती पर हमले करके और न बढ़ाया जाए.

विमान

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इमेज कैप्शन, इसराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के 99 फीसदी ड्रोन हमले नाकाम कर दिए

एक वरिष्ठ पश्चिमी राजनयिक ने मुझे बताया कि मामला और न बढ़े, इसके लिए अब एक हद तय करना बहुत अहम हो गया है.

ईरान को भी उम्मीद है कि एक हद तय की जाएगी. उसने संकेत दिए हैं कि दमिश्क में इसराइली हमले का जवाब दे दिया गया है और वो तभी आगे कुछ करेगा, जब उसपर दोबारा हमला किया जाएगा.

ऐसा लगता है कि दमिश्क में हुए हमले के बाद से, दो हफ़्तों से चले आ रहे संकट को ईरानी भी अब शांत करना चाहते हैं

ईरान को शायद उम्मीद थी कि इन हमलों से इसराइल को ज़्यादा नुक़सान पहुंचेगा. या शायद वह इतना गंभीर हमला नहीं करना चाहता था कि इसराइल जवाबी हमला करने को मजबूर हो जाए.

शायद ईरान चाहता है कि यह डर फिर से बन जाए कि वह किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है. दमिश्क में उसके दूतावास पर हमले के बाद ये डर ख़त्म सा हो गया था.

हालांकि, उसे इस बात से दिक्कत हो सकती है कि इसराइल और उसके सहयोगियों ने हवा में ही उसके हथियारों गिराकर हमले को नाकाम कर दिया.

वैसे, ईरान ने पूरी ताक़त से इसराइल पर हमला नहीं किया था. वो कई सालों से रॉकेट और मिसाइलें तैयार कर रहा है. वो और भी कई हथियार दाग़ सकता था.

उसके अलावा, लेबनान में उसका सहयोगी हिज़बुल्लाह भी इन हमलों में शामिल हो सकता था मगर उसने दूरी बनाए रखी. हिज़बुल्लाह के पास रॉकेट और मिसाइलों का बड़ा ज़खीरा है.

नेतन्याहू को मिली राहत

नेतन्याहू

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ईरानी हमले के कारण इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को कुछ राहत मिली होगी क्योंकि ग़ज़ा की ख़बरें सुर्ख़ियों से हट गई हैं.

इससे ग़ज़ा में पैदा हुई मानवीय आपदा और हमास को ख़त्म करके बंधकों की रिहाई के लिए छेड़ी जंग का मक़सद हासिल होने में इसराइल के नाकाम रहने से ध्यान बंटा है.

कुछ दिन पहले तक इसराइल की ओर से की गई ग़ज़ा की नाकेबंदी के कारण वहां पैदा हुए अकाल को लेकर बाइडन और नेतन्याहू में खिंचाव की ख़बरों पर पूरी दुनिया का ध्यान था. अब ये दोनों नेता एकजुटता की बात कर रहे हैं.

अब नेतन्याहू ख़ुद को एक संयमित नेता के तौर पर पेश कर सकते हैं. भले ही इसराइल में बहुत से लोग उन्हें प्रधानमंत्री पद पर नहीं देखना चाहते लेकिन वह खुद को अपने लोगों के रक्षक के तौर पर पेश कर सकते हैं.

उनके विरोधी कहते हैं सात अक्टूबर को हुए हमले के लिए वही ज़िम्मेदार हैं क्योंकि उनकी असुरक्षित नीतियों के कारण ही हमास को लगा कि इसराइल पर हमला किया जा सकता है.

बाइडन

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इमेज कैप्शन, इसराइल पर ईरान के हमले के दौरान चर्चा करते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

इस बीच अमेरिका लगातार मध्य पूर्व में बड़ी जंग टालने की कोशिश कर रहा है.

मगर ईरानी वाणिज्य दूतावास पर इसराइली हमले और फिर ईरान के जवाबी हमले ने सीमाओं को तोड़ा है.

ईरानी हमले के बाद इसराइल के दक्षिण पंथी मांग कर रहे हैं कि ईरान को जवाब दिया जाए. ऐसी मांगें आगे भी उठती रहेंगी.

जी-7 में जुटने वाले देश मंथन करेंगे कि कैसे मध्य पूर्व में जंग टाली जा सकती है.

लेकिन इसराइल पर हमास के हमले के बाद से हालात धीरे धीरे ही सही, मगर एक बड़ी ख़तरनाक दिशा में बढ़ रहे हैं.

अगर इसराइल बाइडन की सलाह मानता है और ईरान पर जवाबी हमला नहीं करता है तो मध्य पूर्व राहत की सांस ले पाएगा. लेकिन ख़तरा टला नहीं है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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