पानी पर बसे शहर की क्या ऊंचाई बढ़ा पाना संभव है? - दुनिया जहान

वेनिस

इमेज स्रोत, Getty Images

वेनिस इटली के उत्तर-पूर्व में बसा एक मध्यकालीन शहर है. यह शहर खाड़ी के पानी के बीच बसा है. इसके ख़ूबसूरत अनूठेपन से आकर्षित होकर हर साल लाखों पर्यटक आते हैं और यह इटली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है.

देखने से लगता है जैसे यह शहर पानी में तैर रहा हो. मगर एड्रियाटिक सागर के पास बसे, इटली के इस शहर को अब पानी से ही बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है.

नवंबर 2019 में समंदर में ज्वार आने से लाखों क्यूबिक मीटर पानी, बाढ़ को रोकने के लिए बने बांध को लांघ कर शहर में घुस गया.

शहर के निचले हिस्सों से, लोगों को निकाल कर सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा. अब इस तरह की बाढ़ अक्सर आने लगी है, जिससे आम जनजीवन में बाधाएं आने लगी हैं.

इससे लोगों को ही नहीं बल्कि शहर की ऐतिहासिक इमारतों, गिरजाघरों और अन्य धरोहरों को भी ख़तरा पैदा हो गया है.

2019 में आयी बाढ़ में दो लोग मारे गए और करोड़ो यूरो का नुकसान हुआ. इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने एड्रियाटिक सागर के किनारे ज्वार के पानी को रोकने के लिए बांध बनाए हैं जिन्हें ‘मोसे बैरियर’ कहा जाता है.

मगर जलवायु परिवर्तन से समंदर का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, और कई लोगों का मानना है कि यह उपाय काफ़ी नहीं होगा.

अब शहर को बाढ़ से बचाने के लिए समंदर के पानी का ही इस्तेमाल करने की एक नयी योजना पर विचार हो रहा है, जिसके तहत समंदर के पानी को वेनिस की ज़मीन के नीचे भर कर, शहर को ऊंचा उठाने की कोशिश की जाएगी.

इस हफ़्ते दुनिया जहान में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि, क्या समंदर का पानी, वेनिस को बाढ़ से बचा सकता है?

वेनिस

इमेज स्रोत, Getty Images

डूबता सबसे अनूठा शहर

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

खाड़ी के बीचों बीच, पानी में वेनिस शहर कैसे बसा यह समझने के लिए हमने बात की इतिहासकार, क्लेयर ज्यूड डीलावेयर से जो फ़्रांस की टोलूस यूनिवर्सिटी में मध्यकालीन इतिहास की प्रोफ़ेसर हैं.

वो कहती हैं कि मध्यकाल में एक विशाल खाड़ी में वेनिस का निर्माण किया गया. यहां एड्रियाटिक सागर और आस पास की नदियों का पानी बह कर आता है.

“उस समय अक्सर, इटली पर आक्रमणकारियों के हमले होते थे. इन हमलों से लोगों की सुरक्षा के लिए पानी के बीचोंबीच शहर बसाया गया. साथ ही यहां खाड़ी में मछलियां बहुत थीं और ज़मीन पर सब्ज़ी और दाल उगायी जा सकती थी.”

लेकिन खाड़ी के बीच में दलदली भूमि पर शहर बसाने के लिए पहले लोगों को इस ज़मीन को अधिक ठोस बनाना ज़रूरी था.

इसके लिए वेनिस के लोगों ने एक विलक्षण तकनीक का इस्तेमाल किया.

क्लेयर ज्यूड डिलावेयर के अनुसार, “जो तकनीक उन लोगों ने इस्तेमाल की उसका इस्तेमाल आज भी होता है. उन लोगों ने लकड़ी के खंबों को दलदली ज़मीन में गाड़ कर नींव बनायी और सतह दर सतह, उस पर पत्थर और ईंटों के ढांचे खड़े किये जिस पर महल, गिरजाघर और दूसरी इमारतें भी बनीं. वेनिस के नीचे पानी में लकड़ी के करोड़ों खंबे गड़े हैं. एक तरह से वो पानी के नीचे फैला हुआ जंगल ही है.”

शहर की नींव तो मज़बूत हो गई, मगर सुमद्र के पानी से ख़तरा बना रहा. अक्सर समुद्री ज्वार का पानी शहर में भर जाता है. इस बाढ़ को इटली में ‘एक्वा आल्टा’ कहा जाता है. और हर बार काफी नुकसान होता है.

डिलावेयर कहती हैं कि ज्वार और भाटे के दौरान जल स्तर के बढ़ने और घटने से शहर की नींव में डाले गए लकड़ी के खंबे उघड़ जाते हैं. ऑक्सीजन के संपर्क में आने से उनमें कई तरह के बैक्टीरिया लग जाते हैं और वे कमज़ोर हो जाते हैं. खारे पानी से इमारतों के पत्थरों को भी नुक़सान पहुंचता है.

मगर इस मध्यकालीन शहर के लिए बाढ़ कोई नयी बात तो नहीं है. तो पहले वेनिस के लोग बाढ़ से कैसे निबटते थे?

डिलावेयर ने कहा, “वेनिस के पूर्व शासक भी बाढ़ से बचने के उपायों के बारे में सोचते थे. इसके चलते आल्प्स पर्वतों से आने वाली नदियों का रुख़ मोड़ा गया. दूसरे, खाड़ी और नहरों की नियमित रूप से सफ़ाई होती थी. गंदगी, मिट्टी और काई हटाई जाती थी. 18वीं सदी और 19वीं सदी में खाड़ी के इर्द गिर्द पत्थरों की दीवार बनायी गई ताकि एड्रियाटिक सागर के पानी को खाड़ी में आने से रोका जा सके.”

अब वेनिस में आधुनिक बांध बनाए गए हैं जिन्हें ‘मोसे बैरियर’ कहा जाता है.

डिलावेयर कहती है कि फ़िलहाल तो ‘मोसे बैरियर’ प्रोजेक्ट से मदद मिल रही है, लेकिन जिस गति से धरती का तापमान और समंदर का जलस्तर बढ़ रहा है, उसे देखते हुए, भविष्य में यह काफ़ी नहीं होगा.

वेनिस

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या है मोसे बैरियर

मोसे बैरियर अवरोधकों की एक शृंखला है जो पानी की सतह के नीचे रहती है. ज्वार के समय एड्रियाटिक सागर के पानी को खाड़ी में घुसने से रोकने के लिए उन्हें ऊपर उठा दिया जाता है.

मोसे बैरियर को कंज़ोरशियो नोवा कंपनी ने बनाया है.

कंपनी के डायरेक्टर जनरल हेर्मिस रेडी ने कहा, “आम तौर पर, मोसे बैरियर में पानी भरा होता है. लेकिन उसमें मिट्टी भी भरी जा सकती है. ज्वार के जलस्तर के अनुसार उन्हें ऊपर या नीचे किया जा सकता है. हमें छह दिन पहले ही मौसम विभाग से किसी बड़े ज्वार के आने की सूचना मिल जाती है."

“ज्वार के आने से छह घंटे पहले हम मोसे बैरियर को समंदर के जलस्तर से ऊपर उठा देते हैं. इसके लिए हमें बंदरगाह प्रशासन से संपर्क बनाए रखना पड़ता है क्योंकि जब मोसे बैरियर ऊपर उठ जाते हैं तब नौकाएं खाड़ी में प्रवेश नहीं कर सकतीं.”

वो बताते हैं कि छह अरब यूरो की लागत से इसे बनाने में 20 साल लगे. वहीं हर बार मोसे बैरियर को उठाने के लिए दो लाख यूरो खर्च होते हैं.

ऐक्वा आल्टा अब पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा आने लगे हैं. तो क्या यह व्याव्हारिक उपाय है?

हेर्मिस रेडी ने कहा, “हमें साल में 15 बार मोसे बैरियर को उठाना पड़ता है और इसमें 30 लाख यूरो खर्च होते हैं. लेकिन बाढ़ से वेनिस में करोड़ों यूरो का नुकसान होता है. तो आर्थिक दृष्टि से, मोसे बैरियर का इस्तेमाल अच्छा उपाय है.”

इससे बाढ़ को रोकने में तो मदद मिली है लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि यह कोई स्थायी उपाय नहीं हो सकता. इस बात से हेर्मिस रेडी भी सहमत हैं.

वो कहते हैं कि समंदर का जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. आने वाले 70 या 80 सालों में नये उपाय खोजने पड़ेंगे.

वेनिस

इमेज स्रोत, Getty Images

समुद्री उपाय

वेनिस को बाढ़ से बचाने के एक नये उपाय पर गंभीरता से सोचा जा रहा है. ‘मोसे बैरियर’ के अलावा क्या शहर की ऊंचाई बढ़ाना भी एक उपाय हो सकता है?

हमारे अगले एक्सपर्ट इटली की पाडुआ यूनिवर्सिटी में हाइड्रोलॉजी के प्रोफ़ेसर पियाट्रो टीयेटीनी का मानना है कि ऐसा संभव है.

वो कहते हैं, “हम सभी जानते हैं कि धरती की ‘सब सरफ़ेस’ से अगर तरल पदार्थ को निकाल लिया जाए तो धरती की ऊपरी सतह धंसने लगती है. उसी तरह अगर सब सरफ़ेस में पानी भर दें तो उपरी सतह उठ सकती है. खाड़ी में पानी प्रचुर मात्रा में है और 500 मीटर नीचे सिर्फ़ खारा पानी है. हमने पाया कि सब सरफ़ेस में पानी इन्जेक्ट करने से ऊपरी सतह 25 से 30 सेंटीमीटर तक उठ सकती है.”

मगर सवाल यह उठता है कि इतनी गहराई में पानी कैसा भरा जाएगा?

पियाट्रो टीयेटीनी ने बताया, “हम सब सरफ़ेस में कई सारे कुएं खोदेंगे. इस योजना के तहत वेनिस के मध्य में दस किलोमीटर के गोल घेरे में दस कुएं खोदे जाएंगे. इन कुओं के ज़रिए खाड़ी के पानी को सब सरफ़ेस में भरा जाएगा. तकनीकी दृष्टि से यह कोई नया आइडिया नहीं है.”

मगर इस योजना को अंजाम देकर शहर को ऊंचा उठाने में दस साल तक लग सकते हैं. पियाट्रो टीयेटीनी कहते हैं कि सब सरफ़ेस में पानी भरते समय यह ख़्याल रखना पड़ेगा कि पानी का प्रेशर ज़रूरत से ज़्यादा ना बढ़ जाए. अगर प्रेशर ज़्यादा बढ़ा दिया गया तो ज़मीन की सतह टूट सकती है और उसमें दरारें पड़ सकती हैं.

लेकिन क्या शहर की ऊंचाई 30 सेंटीमीटर से बढ़ाना काफ़ी होगा? क्योंकि हाल में आए ‘एक्वा आल्टा’ के दौरान जल स्तर 150 सेंटीमीटर तक बढ़ गया था.

तो क्या ऊपरी सतह को एक या दो मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है?

शहर एक मीटर उठ सकता है?

पियाट्रो टीयेटीनी कहते हैं कि यह संभव नहीं है, “मुझे नहीं लगता कि 30 सेंटीमीटर से अधिक ऊपर उठा सकते हैं. ये सही है कि ज्वार के दौरान खाड़ी का जलस्तर इससे अधिक होता है. मगर इस सिस्टम को मोसे बैरियर के साथ इस्तेमाल करने से बाढ़ रोकने में मदद मिलेगी.”

पियाट्रो टीयेटीनी ने बीबीसी को बताया कि इस योजना का प्रस्ताव 15 साल पहले रखा गया था. लेकिन उस समय वेनिस प्रशासन ने मोसे बैरियर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था और किसी दूसरी योजना के लिए बजट नहीं था.

पियाट्रो टीयेटीनी कहते हैं कि तब अनुमान था कि इस योजना में लगभग 10 करोड़ यूरो की लागत होगी लेकिन अब कीमतें काफ़ी बढ़ गई हैं.

वो यह भी कहते हैं कि अब साफ़ हो गया है कि सिर्फ़ मोसे बैरियर से बाढ़ रोकना मुश्किल है. इसलिए वो शहर को ऊंचा उठाने की योजना के बारे में गंभीरता से सोच रहा है.

मगर क्या इस योजना में कुछ ख़ामियां भी हैं? क्या शहर के लोगों को इसे लेकर आशंकाएं भी हैं?

पियाट्रो टीयेटीनी का कहना है, “हमने इस योजना का गहरायी से अध्ययन किया है. लोगों ने यह आशंका व्यक्त की कि शहर को ऊंचा उठाने के दौरान हो सकता है कि शहर के कुछ हिस्से ऊपर उठ जाएँ और कुछ हिस्से नीचे रह जाएं.”

“इससे शहर की इमारतें अस्थिर होने का ख़तरा है. हमने कहा है कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि वेनिस के भूविज्ञान या संरचना को ध्यान में रख कर ही सबसरफ़ेस में पानी भरा जाएगा. पूरे शहर की ऊंचाई एक समान ही बढ़ेगी. यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी की जाएगी. इससे इमारतों को कोई ख़तरा नहीं होगा.”

पियाट्रो टीयेटीनी ने यह भी बताया कि पहले दो या तीन कुएं खोदे जाएंगे और परिणामों का आकलन किया जाएगा. इसमें दो से तीन साल लग सकते हैं.

वेनिस

इमेज स्रोत, Getty Images

वेनिस का भविष्य

फ़िलहाल अनुमान लगाए जा रहे हैं कि धरती का तापमान जिस गति से बढ़ता जा रहा है उसके चलते साल 2100 तक समंदर का जलस्तर एक मीटर तक बढ़ सकता है.

अगर ऐसा होता है तो वेनिस और उसके आसपास के इलाके पानी में डूब जाएंगे. वेनिसवासियों के लिए यह डरावना ख़्याल है.

अमेरिका की एमआईटी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर कार्लो राटी ख़ुद इंजिनियर भी हैं. उनका मानना है कि मोसे बैरियर और शहर की ऊंचाई बढ़ाने के अलावा, वेनिस के लोगों को अपनी जीवनशैली को भी बदलना होगा और शहर के सामाजिक ताने-बाने को मज़बूत करना होगा.

उनके मुताबिक, “प्राचीन काल में रोमन लोग शहर के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल करते थे. ‘अर्ब’ यानि शहर, और ‘चिवीटा’ यानि समुदाय. वेनिस में ‘चिवीटा’ यानि सामुदायिक जनजीवन धीरे धीरे समाप्त होता जा रहा है. वेनिस में 50,000 से कम लोग रहते हैं. शहर ख़ाली होता जा रहा है और अब वेनिस में हर जगह पर्यटकों की भीड़ दिखाई देती है.”

कार्लो राटी ने कहा, “ऐसे युवाओं को वेनिस में बसने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जो यहां काम करना चाहें. 70 के दशक में वेनिस को एक अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी शहर में ढालने की योजना थी ताकि दुनिया भर से प्रतिभाशाली युवाओं को यहां लाया जाए. मगर वो परिकल्पना अब खो गई है. अब शहर पर पर्यटक हावी हो गए हैं और यहां का जनजीवन अब पर्यटकों की ज़रूरतों के अनुसार ढल रहा है. इस वजह से यहां का मूल सामुदायिक जीवन ख़त्म होता जा रहा है.”

कार्लो राटी ने कहा कि मोसे बैरियर और शहर की ऊंचाई बढ़ाने जैसे उपाय तो ज़रूरी हैं लेकिन यह केवल तकनीकी समस्या नहीं है.

“वेनिस सैकड़ों साल पहले बना था. अब इसके ढांचे कमज़ोर हो रहे हैं और पानी में डूब रहे हैं. वेनिस को यूरोप और दुनिया के अन्य देशों के लिए खुला कर के एक वर्ल्ड सिटी में तब्दील कर देना चाहिए ताकि दुनिया भर से आए लोग यहां एक सामुदायिक जीवनशैली कायम करें और मिल कर जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान ढूंढें. यह पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा और आदर्श भी बन सकता है.”

विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ के ख़तरे से निपटने के लिए केवल तकनीक ही काफ़ी नहीं, बल्कि सामुदायिक जीवन को भी मज़बूत करना होगा और जलवायु परिवर्तन के परिणाम को कम करने के दूसरे तरीके भी ढूंढने होंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)