वेनिस के इस जलसे का रिश्ता प्लेग से है

- Author, एलिसाबेट अब्रामी
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
फेस्टा डेल रेडेन्टोरे वेनिस का सबसे प्रमुख पारंपरिक आयोजन है. वेनिस के ऐतिहासिक केंद्र के दक्षिण में स्थित जूडेक्का द्वीप इस जलसे का केंद्र होता है.
1575 ईस्वी में वेनिस गणराज्य में बुबोनिक प्लेग फैला था. दो साल के अंदर इस बीमारी से 50 हजार लोगों की मौत हो गई थी.
1576 के मध्य में लोगों ने ईश्वरीय मदद मांगी और संकल्प लिया कि प्लेग ख़त्म हो जाए तो वे नया चर्च बनाएंगे.
चर्च बनाने का जिम्मा वेनिस गणराज्य के मुख्य वास्तुकार आंद्रे पलेडियो को दिया गया.
पलेडियो ने मई 1577 में जूदेक्का द्वीप के होली क्रॉस की ननों की जमीन पर चर्च ऑफ़ दि रिडीमर (उद्धारक का चर्च) की नींव रखी.
जुलाई 1977 में वेनिस को प्लेग मुक्त घोषित किया तो शहर में एक जुलूस निकाला गया.
सैन मार्को से निकला जुलूस नावों के ऊपर बने पुल से होते हुए नये चर्च तक पहुंचा. इस तरह एक परंपरा की शुरुआत हुई जो आज भी जारी है.
- यह भी पढ़ें | GPS से लैस क्यों हो रहे हैं स्पेन के चरवाहे?

जुलाई का जलसा
प्लेग के ख़ात्मे की याद में वेनिस हर साल जुलाई के तीसरे रविवार को फेस्टा डेल रेडेन्टोरे उत्सव मनाता है.
बोट से लेकर बालकनी तक जूडेक्का द्वीप का कोना-कोना इस जलसे में शरीक होता है.
पूरे द्वीप को फूलों, गुब्बारों और रंगीन कागज की झालरों से सजाया जाता है और रात में जबरदस्त आतिशबाज़ी होती है.
इस जलसे का एक मुख्य आकर्षण एक दिन पहले होने वाला भोज है. वेनिस में रहने वाले परिवार, ख़ास तौर पर वे जो सैन मार्को के सामने तट पर रहते हैं, नावों पर या तट के किनारे लकड़ी की मेज लगाकर खाना खाते हैं.
यह बड़े पैमाने पर सामुदायिक भोज का मौका होता है, जिसमें कोई बाधा नहीं होती. स्थानीय कलाकार क्लाउडिया कोरो कहती हैं, "पूरा कार्निवल एक दिन पर केंद्रित होता है."

द्वीप की पहचान
जूडेक्का द्वीप पर करीब 5,000 लोग रहते हैं, जिनमें से कई बुजुर्ग हैं. उनकी जड़ें इस द्वीप की पहचान से जुड़ी हुई हैं.
यह द्वीप आज भी वेनिस के मुख्य शहर से किसी स्थायी पुल से नहीं जुड़ा है, जिससे इसकी प्रामाणिकता बची हुई है.
यह द्वीप वेनिस में सैलानियों की बढ़ती तादाद से काफी हद तक बचा हुआ है.
20वीं सदी की शुरुआत में वेनिस में पोर्तो मार्गेरा औद्योगिक केंद्र की स्थापना से पहले जूडेक्का द्वीप ही मुख्य औद्योगिक केंद्र था. यहां हस्तशिल्प, कारखाने, शिपयार्ड और ड्राई क्लीनिंग की दुकानें थीं.
अब कारखाने बंद हो गए हैं. द्वीप पर छोटे घर और बगीचे हैं. कई घर विदेशियों के हैं.
लोग यहां गपशप के लिए रुकते हैं, पत्ते खेते हैं. यहां पुरानी कार्यशालाओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के नये स्टूडियो भी हैं.
द्वीप पर रहने वाले ज़्यादातर मूल निवासी बहुत पहले ही मुख्य शहर में रहने चले गए हैं, लेकिन अब भी कुछ मूल निवासी यहां रहते हैं. क्लाउडिया कोरो और उनका परिवार उन्हीं में से एक हैं.
- यह भी पढ़ें | इस शहर के लोग बेफ़िक्र जीते हैं

सामुदायिक भोज
जलसे से पहले शनिवार की सुबह नहर के किनारे, अहाते में और चौराहों पर लकड़ी की मेजें लगा दी जाती हैं.
लोग सबसे अच्छी जगह पाने के लिए होड़ करते हैं. जगह आरक्षित करने के लिए वे अपने लिए निशान बना देते हैं.
जिनके घर या दुकानें तट की तरफ हैं वे आराम से इसका लुत्फ उठाते हैं.
क्लाउडिया ने तय किया कि शनिवार की रात वह अपने दोस्तों के साथ अपने स्टूडियो में रहेगी. 1960 के दशक तक इस जगह पर उनकी दादी की बहन बेकरी चलाती थीं.
उनकी 80 साल की दादी परिवार के अन्य लोगों के साथ पारंपरिक रूप से यह जश्न मनाती हैं.
वह वेनिस के लोकगीत गाती हैं, पारंपरिक खाना बनाती हैं जैसे नर्वेटी (बछड़े का मांस), बोवेटी (घोंघा), सार्डिन (मछली) का अचार, और भरवां बत्तख.
- यह भी पढ़ें | धरती की वो जगह जहां जाते हैं अंतरिक्षयात्री

समुदायों को जोड़ना
फेस्टा डेल रेडेन्टोर साल का एकमात्र मौका होता है, जब जुडेक्का द्वीप को वेनिस से जोड़ दिया जाता है.
इसके लिए करीब 300 मीटर लंबा एक पुल तैयार किया जाता है जो शहर को चर्च ऑफ़ दि रिडीमर से जोड़ता है.
यह पुल तैरते हुए राफ्ट पर लकड़ी और स्टील से बनाया जाता है, जो 16वीं शताब्दी में नावों से बने उस पहले पुल की याद दिलाता है, जिस पर से होते हुए शहर के लोग नये चर्च तक पहुंचे थे.
जलसे की शुरुआत शाम के 7 बजे पुल के उद्घाटन से होती है. लोग अस्थायी पुल से द्वीप के चर्च तक पहुंचते हैं और वहां सामूहिक प्रार्थना या चैरिटी रैफल में हिस्सा लेते हैं.
क्लाउडिया की दादी मारिया कोरा कहती हैं, "वेनिस से हमें जोड़ने वाला पुल अच्छा है, लेकिन यह दो दिनों के लिए ही काफी है, क्योंकि पानी हमारी रक्षा करता है."
- यह भी पढ़ें | कहां है दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान

सुबह तक जलसा
पुल का उद्घाटन होते ही पार्टी शुरू हो जाती है. सेंट मार्क बेसिन सुंदर सजाए हुए नावों से भर जाता है.
टिमटिमाती रोशनी जगमगा उठती है. पीले गुब्बारों में भरी रोशनी की अनगिनत लड़ियां जल उठती हैं और संगीत बजने लगता है.
लोग अपनी-अपनी मेज पर खाना लाते हैं और सब लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खाना शुरू कर देते हैं.
रात साढ़े ग्यारह बजे शानदार आतिशबाज़ी शुरू होती है, जिसे देखने के लिए सभी लोग अपनी-अपनी जगह पर जम जाते हैं.
45 मिनट की यह आतिशबाज़ी शानदार होती है. उस समय रोशनी कम कर दी जाती है और संगीत बंद कर दिया जाता है.
आतिशबाज़ी और पानी में बनने वाले उसके प्रतिबिंबों को देखकर लोग चकित रह जाते हैं.
आतिशबाज़ी के बाद संगीत और नृत्य शुरू होता है, जो पूरे वेनिस में सुबह तक चलता रहता है.
- यह भी पढ़ें | वियतनाम : ज़मीन के नीचे गुफाओं का दिलचस्प सफ़र

सिर्फ़ वेनिस में
अगले दिन एक और प्यारी परंपरा होती है- नावों की रेस. अलग-अलग रंगों में सजी कई टीमें एक दूसरे से होड़ करती हैं.
क्लाउडिया के भाई रोबर्टो 10 साल तक नाविकों के सलाहकार रहे हैं. वह कहते हैं, "मेरे लिए पार्टी रविवार को होती है जब लोग तट के किनारे खड़े होकर रेगाटा (नावों की रेस) को देखते हैं."
"कई साल पहले मैं भी नाव चलाता था. इस खेल के दीवाने इसका खूब मजा लेते हैं. असली पार्टी तो रविवार को ही होती है."
संघर्ष का उत्सव
क्लाउडिया की मां लिवियाना के मुताबिक फेस्टा डेल रेडेन्टोर वेनिस का आख़िरी प्रामाणिक परंपरागत उत्सव है.
सैलानियों की बाढ़ से जूझते रहने वाले शहर के लोगों के लिए यह संघर्ष का प्रतीक है.
वे अपनी पहचान पर गौरवान्वित होते हैं और अपने अतीत को बचाने के प्रति जुनूनी भी हैं.
क्लाउडिया कहती हैं, "मेरे लिए रिडीमर पूरी गर्मी का सबसे ख़ूबसूरत समय होता है."
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















