कई देशों में मोस्ट वॉन्टेड मानव तस्कर तक पहुंचने की कहानी

स्कॉर्पियन
इमेज कैप्शन, स्कॉर्पियन
    • Author, सु मिशेल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

मैं इराक़ के एक शॉपिंग मॉल में यूरोप के सबसे कुख्यात मानव-तस्कर के सामने बैठी हूं.

उनका नाम बरज़ान मजीद है और उन्हें ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों की पुलिस ढूंढ रही है.

यहां इस मॉल में और अगले दिन उनके ऑफ़िस में जो बातचीत हुई, उस दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें याद ही नहीं कि अब तक वो कितने लोगों को इंग्लिश चैनल पार करवा चुके हैं.

''शायद एक हज़ार या शायद दस हज़ार. मुझे नहीं पता, मैं गिनता नहीं था.''

इस मीटिंग का हो पाना कुछ महीनों पहले तक असंभव जैसा लग रहा था.

पूर्व सैनिक रॉब लॉरी, जो शरणार्थियों के लिए काम करते हैं, उनके साथ मैं 'स्कॉर्पियन' नाम से पहचाने जाने वाले शख़्स को ढूंढने और उससे सवाल करने निकली थी.

स्कॉर्पियन यानी बिच्छू.

उनके गैंग ने कई सालों तक नावों और लॉरी के ज़रिये इंग्लिश चैनल के पार मानव तस्करी के धंधे पर क़ब्ज़ा जमाया था.

साल 2018 से अब तक नाव के जरिए इंग्लिश चैनल पार करते वक़्त 70 से ज़्यादा प्रवासियों की मौत हो चुकी है. पिछले महीने फ्रांसीसी तट पर पांच लोग मारे गए, इनमें सात साल की एक बच्ची भी थी.

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इमेज कैप्शन, साल 2018 से अब तक नाव के ज़रिये इंग्लिश चैनल पार करते वक़्त 70 से ज़्यादा प्रवासियों की मौत हो चुकी है

'स्कॉर्पियन' की 'खोज' कैसे शुरू हुई?

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ये एक ख़तरनाक यात्रा है, लेकिन तस्करों के लिए ये लुभावनी हो सकती है. इंग्लिश चैनल नाव से पार कराने के लिए तस्कर हर प्रवासी से 6 हज़ार पाउंड (क़रीब 6 लाख 27 हज़ार रुपये) लेते हैं.

साल 2023 में क़रीब 30 हज़ार लोगों ने इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश की थी. इससे आप मुनाफ़े का अंदाजा लगा सकते हैं.

उत्तरी फ्रांस के एक प्रवासी कैंप में हमारी मुलाक़ात एक बच्ची से हुई थी, इसी मुलाक़ात के बाद हमारी दिलचस्पी स्कॉर्पियन में बढ़ी.

वो छोटी बच्ची एक डोंगी में सवार होकर इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश में लगभग मरने ही वाली थी.

वो डोंगी समंदर में यात्रा करने के योग्य नहीं थी. वो सस्ती थी, बेल्जियम से सेकेंड हैंड खरीदी गई थी और उस पर 19 लोग सवार थे, जिनके पास लाइफ़ जैकेट्स भी नहीं थे.

ब्रिटेन में पुलिस जब अवैध प्रवासियों को पकड़ती है तो उनके मोबाइल ले लेती है और जांच करती है. साल 2016 से ही प्रवासियों के मोबाइल में एक नंबर था जो बार-बार दिखता था.

इसे अक्सर 'स्कॉर्पियन' नाम से सेव किया गया था. कई मोबाइल में इसे बिच्छू की तस्वीर के साथ सेव किया गया था.

ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (एनसीए) में सीनियर इन्वेस्टिगेशन ऑफ़िसर मार्टिन क्लार्क ने बताया कि धीरे-धीरे पुलिस को पता चल गया कि 'स्कॉर्पियन' नाम से एक कुर्दिश इराक़ी शख़्स बरज़ान मजीद को संबोधित किया जा रहा है.

कौन है ये 'स्कॉर्पियन'?

साल 2006 में जब मजीद 20 साल के थे तब उन्हें एक लॉरी में छिपाकर इंग्लैंड लाया गया था. बाद में उन्हें ब्रिटेन से बाहर करने का फ़ैसला सुनाया गया लेकिन इसके बावजूद वो कई साल तक ब्रिटेन में रहे. कुछ साल उन्होंने बंदूक और ड्रग्स से जुड़े अपराधों के लिए जेल में बिताए.

आख़िरकार साल 2015 में उन्हें इराक़ भेज दिया गया. इसके कुछ समय बाद ही ऐसा पता चला कि मजीद को अपने बड़े भाई से मानव तस्करी का कारोबार मिल गया. उनका बड़ा भाई तब बेल्जियम की जेल में सज़ा काट रहा था.

मजीद को ही बाद में 'स्कॉर्पियन' के नाम से जाना जाने लगा.

साल 2016 से 2021 के बीच स्कॉर्पियन के गिरोह ने ही यूरोप और यूके के बीच मानव-तस्करी के ज़्यादातर कारोबार पर दबदबा जमाए रखा था.

इंटरनेशनल पुलिस के दो साल के ऑपरेशन का नतीजा ये हुआ कि गिरोह के 26 सदस्यों को ब्रिटेन, फ्रांस और बेल्जियम की अदालतों में सज़ा सुनाई गई.

लेकिन स्कॉर्पियन बचते गए और फ़रार रहे.

उनकी गैर-मौजूदगी में बेल्जियम की एक अदालत में उन पर मुक़दमा चलाया गया. स्कॉर्पियन पर 121 लोगों की तस्करी का आरोप था. अक्टूबर 2022 में उन्हें 10 साल की जेल की सज़ा मिली और 8 लाख 34 हज़ार पाउंड का जुर्माना लगाया गया.

इस सज़ा के बाद से ही किसी को ख़बर नहीं थी कि आख़िर स्कॉर्पियन कहां हैं.

हम इस रहस्य को सुलझाना चाहते थे.

स्कॉर्पियन

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इमेज कैप्शन, 2012 में मजीद इंग्लैंड में कार मैकेनिक के तौर पर काम करते थे

पहली बार ऐसे हुई बातचीत...

रॉब के जानकार ने हमें एक ईरानी शख़्स से मिलवाया, जिसका कहना था कि जब वो चैनल पार करने की कोशिश कर रहा था तब उसका पाला स्कॉर्पियन से पड़ा था. स्कॉर्पियन ने उस शख़्स को बताया था कि वो तुर्की में रहकर बिज़नेस चला रहे हैं.

बेल्जियम में हमने मजीद के बड़े भाई को ढूंढा, अब वो जेल से बाहर हैं. उनका भी कहना था कि स्कॉर्पियन तुर्की में हो सकता है.

यूके जाने वाले ज़्यादातर प्रवासियों के लिए तुर्की एक महत्वपूर्ण जगह है. यहां के इमिग्रेशन कानूनों की वजह से अफ्रीका, एशिया और मध्य पूर्व के देशों से तुर्की में प्रवेश के लिए वीज़ा हासिल करना आसान है.

एक गुप्त सूचना के जरिए हमें इस्तान्बुल के एक ऐसे कैफ़ै का पता चला जहां मानव-तस्करों का आना जाना लगा रहता है. बरज़ान मजीद को हाल ही में यहां देखा गया था.

हमारी शुरुआती पूछताछ अच्छी नहीं गई. हमने मैनेजर से पूछा कि क्या आप कारोबार के बारे में कुछ बता सकते हैं. पूरे कैफ़ै में सन्नाटा पसर गया.

कुछ देर बाद ही एक शख़्स हमारी टेबल पर आया और उसने अपने जैकेट के भीतर रखी बंदूक दिखाई. उसका मतलब साफ़ था कि हम ख़तरनाक लोगों के बीच थे.

हमारे अगले पड़ाव में हमें कुछ अच्छा नतीजा हासिल हुआ. हमें बताया गया कि मजीद हाल ही में कुछ सड़कों दूर एक मनी एक्सचेंज में एक लाख 72 हज़ार पाउंड जमा करने गए थे. हमने वहां अपना नंबर छोड़ दिया और अगली ही रात रॉब का फ़ोन बजा.

कॉलर आईडी पर ''नंबर विदहेल्ड'' लिखा था, यानी फ़ोन करने वाले का नंबर नहीं दिख रहा था.

फ़ोन करने वाले शख़्स ने दावा किया कि वो बरज़ान मजीद ही है.

बहुत देर हो चुकी थी और इसकी आशा नहीं थी, वक्त भी नहीं था कि कॉल को शुरुआत से रिकॉर्ड किया जाए. रॉब उस बातचीत को याद करते हुए बताते हैं, ''सामने से कहा गया- 'मैंने सुना है कि तुम मुझे ढूंढ रहे हो.' मैंने पूछा, 'कौन हैं आप? स्कॉर्पियन?' जवाब आया, 'हां, तुम मुझे इसी नाम से बुलाना चाहते हो, चलो ठीक है.'''

कोई भी ऐसा रास्ता नहीं था जिससे हम ये जान सकें कि ये असली बरज़ान मजीद हैं या नहीं, लेकिन जो जानकारी उस शख़्स ने दी, वो हमारी जानकारी से मेल खाती थी.

उस शख़्स ने कहा कि साल 2015 में निर्वासित किए जाने तक वो नॉटिंगम में रह रहा था. लेकिन उसने तस्करी के धंधे में शामिल होने की बात से इनकार कर दिया.

उसने कहा, ''ये सही नहीं है, ये बस मीडिया की फैलाई बातें हैं.''

लाइन बार-बार कट रही थी. उसने इस बात की जानकारी नहीं दी कि वो कहां से बात कर रहा है.

स्कॉर्पियन
इमेज कैप्शन, अपने भाईयों के साथ मजीद.

दूसरी बार फिर आई कॉल

वो शख़्स दोबारा कॉल कब करेगा या नहीं करेगा, इस बात की हमें कोई जानकारी नहीं थी. इस बीच, रॉब के एक स्थानीय जानकार ने बताया कि स्कॉर्पियन अब तुर्की से ग्रीस और इटली में प्रवासियों की तस्करी कर रहा था.

जो हमने सुना वो परेशान करने वाला था. क़रीब 12 लोगों को ले जाने के लिए लाइसेंस हासिल करने वाली नावों पर 100 से ज़्यादा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बैठाया जा रहा था.

ये नाव ऐसे तस्कर चलाते थे, जिनके पास नाव चलाने का कोई अनुभव नहीं होता था और तटरक्षक दल से बचने के लिए ये ख़तरनाक रास्ते से नाव को ले जाते थे.

ये लोग बहुत सारा पैसा कमा रहे थे. ऐसा कहा जाता है कि हर एक व्यक्ति को इस नाव से जाने के लिए 10 हज़ार यूरो देने होते हैं.

पिछले 10 साल में सात लाख 20 हज़ार से ज्यादा लोगों ने भूमध्य सागर को पार करके यूरोप में जाने की कोशिश की. क़रीब 2,500 लोगों मौत हो गई, ज़्यादातर लोग डूबने से मरे.

चैरिटी एसओएस मेडिटेरेनियन की जूलिया शेफ़रमेयर कहती हैं कि तस्कर लोगों की ज़िंदगियों को ख़तरे में डालते हैं. ''लोग मरें या ज़िंदा रहें, इससे उन लोगों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता है.''

अचानक एक बार फिर उसकी कॉल आई. अब हमारे पास 'स्कॉर्पियन' से सीधे सवाल करने का वक्त था.

एक बार फिर स्कॉर्पियन ने तस्कर होने से इनकार किया. हालांकि, तस्कर शब्द के लिए उनकी परिभाषा किसी ऐसे शख़्स से थी, जो शारीरिक रूप से मौजूद होकर ये काम करता है, न कि ऐसा व्यक्ति जो इससे जुड़ा हुआ है.

उनका कहना था, "आपको वहां रहना होता है. अब भी मैं वहां नहीं हूं."

मजीद का कहना था कि वो बस ''पैसे वाले आदमी'' हैं.

मजीद भी डूबे हुए प्रवासियों के लिए थोड़ी सहानुभूति दिखाते हैं.

उनका कहना था, ''ऊपर वाले को पता होता है कि आपको कब जाना है, लेकिन ये कभी-कभी आपकी ग़लती होती है. ऊपर वाले ने कभी नहीं कहा कि जाओ उस नाव में बैठ जाओ.''

स्कॉर्पियन

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इमेज कैप्शन, तुर्की की पुलिस का मानना था कि मार्मारिस में स्कॉर्पियन का एक विला है.

''...इराक़ में है स्कॉर्पियन''

हमारा अगला पड़ाव मार्मारिस का एक रिज़ॉर्ट था. तुर्की की पुलिस का मानना था कि यहां स्कॉर्पियन का एक विला है. हमने आसपास बात की और हमें एक कॉल आई, एक महिला की, जिनका कहना था कि उनकी स्कॉर्पियन से जान पहचान है.

वो जानती थीं कि मजीद लोगों की तस्करी में शामिल हैं. उनका कहना था कि इससे स्कॉर्पियन को तनाव होता है लेकिन उन्हें प्रवासियों से ज़्यादा पैसों की चिंता है.

वो कहती हैं, ''उसे उनकी परवाह नहीं. ये सच में दुखद है ना? ये कुछ ऐसा है जिसके बारे में मैं सोचती हूं और शर्म महसूस करती हूं क्योंकि... मैंने चीजें सुनी हैं और मुझे पता है कि वो चीजें अच्छी नहीं हैं.''

इस महिला ने कहा कि उन्होंने हाल फ़िलहाल में स्कॉर्पियन को मार्मारिस के विला में नहीं देखा, हालांकि किसी ने उनसे कहा था कि स्कॉर्पियन इराक़ में है.

इस बात की पुष्टि एक दूसरे संपर्क से हुई. उसका कहना था कि उसने इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र के सुलेमानियाह शहर में एक मनी एक्सचेंज पर स्कॉर्पियन को देखा था.

हम चल पड़े. हमने तय किया कि अगर यहां हमें स्कॉर्पियन नहीं मिलता है तो हम ये सब रोक देंगे. लेकिन रॉब का कॉन्टेक्ट स्कॉर्पियन से संपर्क करने में कामयाब रहा.

शुरुआत में वो बहुत शक कर रहा था, इस बात से चिंतित लग रहा था कि हमने उसे दोबारा यूरोप ले जाने की कोई योजना बनाई है.

इसके बाद लगातार टेक्स्ट मैसेज आने लगे. पहले रॉब के कॉन्टैक्ट के ज़रिए और फिर सीधे रॉब को.

स्कॉर्पियन का कहना था कि वो हम से मिल सकते हैं, लेकिन तब जब मिलने की जगह उनकी चुनी हुई हो. हमने ये शर्त खारिज कर दी, हमें शक था कि इससे हमें फँसाया जा सकता है.

और फिर एक टेक्स्ट मैसेज आया. ये पूछते हुए, ''तुम कहां हो?''

हमने कहा कि हम पास के एक मॉल में है. स्कॉर्पियन ने हमें वहां ग्राउंड फ़्लोर पर एक कॉफ़ी शॉप में मिलने के लिए कहा.

आख़िरकार, हम स्कॉर्पियन को देख पाए.

स्कॉर्पियन
इमेज कैप्शन, स्कॉर्पियन से सु और रॉब की मुलाक़ात की तस्वीर गुप्त तरीक़े से उनके ड्राइवर ने ली.

आख़िरकार वो मीटिंग हुई

बरज़ान मजीद एक गोल्फ़र की तरह दिखते थे. अच्छी तरह से कपड़े पहने हुए थे, नई जींस, हल्के नीले रंग की शर्ट और हाफ़ जैकेट.

जब उन्होंने अपने हाथ टैबल पर रखे तो मैंने देखा कि उनके नाखून मैनीक्योर किए हुए थे.

इस बीच, तीन और लोग बगल की सीट पर आकर बैठे. हमारा अनुमान था कि ये लोग उनकी सिक्योरिटी टीम के थे.

एक बार फिर उन्होंने किसी बड़े आपराधिक संगठन के टॉप पर बैठा हुआ शख़्स होने से इनकार कर दिया.

उनका कहना था कि दूसरे गैंग के लोग उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं.

वो कहते हैं, ''कुछ लोग जब गिरफ़्तार होते हैं तो कहते हैं कि हम उसके लिए काम करते हैं, ताकि उन्हें कम सजा मिले.''

उन्हें ये बात भी ख़राब लग रही थी कि कुछ तस्करों को ब्रिटिश पासपोर्ट मिले हुए थे और वो अपना कारोबार कर रहे थे.

बरज़ान का कहना था, ''तीन दिनों में एक शख़्स ने 170 या 180 लोगों को तुर्की से इटली भेजा, उसके पास अब भी ब्रिटिश पासपोर्ट है. लेकिन मैं किसी दूसरे देश में कारोबार करने जाना चाहता हूं लेकिन नहीं जा सकता.''

जब हमने उन पर प्रवासियों की मौत की ज़िम्मेदारी को लेकर दबाव डाला तो उनका वही कहना था जो उन्होंने फ़ोन पर कहा था कि मैं बस पैसे लेता हूं और जगह बुक करता हूं.

उनके हिसाब से, तस्कर वो है जो लोगों को नाव और लॉरियों पर चढ़ाता है और उन्हें ले जाता है. ''मैंने किसी को नाव पर नहीं चढ़ाया और न ही किसी को मारा है.''

बातचीत ख़त्म हो गई लेकिन स्कॉर्पियन ने रॉब को सुलेमानियाह में उस मनी एक्सचेंज को दिखाने के लिए आमंत्रित किया जहां से वो काम करते थे.

ये एक छोटा ऑफ़िस था, वहां अरबी में खिड़की पर कुछ लिखा हुआ था और कुछ मोबाइल नंबर लिखे हुए थे.

लोग यहां पर यात्रियों के लिए पैसे जमा करने आते थे. रॉब ने बताया कि जब वो वहां थे तो उस समय एक शख़्स बक्से में भरकर कैश लेकर आया था.

स्कॉर्पियन
इमेज कैप्शन, बेल्जियम की एक अदालत ने स्कॉर्पियन की गैर-मौजूदगी में सज़ा सुनाई है

मानव तस्करी की बात से लगातार इनकार

इस मौके़े पर स्कॉर्पियन ने बताया कि कैसे वो साल 2016 में इस कारोबार में आए. ये वो दौर था, जब हज़ारों लोग यूरोप जा रहे थे.

स्कॉर्पियन का कहना था, ''उन्हें किसी ने मजबूर नहीं किया, वो जाना चाहते थे. वो तस्करों से भीख मांग रहे थे कि कृपया हमारे लिए ये काम कर दो. कभी कभी तस्कर कहते हैं, 'सिर्फ़ ऊपरवाले के लिए वो मदद करेंगे.' फिर वो शिकायत करते थे, 'अरे ये नहीं वो नहीं... ये सच नहीं है.''

स्कॉर्पियन ने बताया कि साल 2016 से 2019 के बीच वो बेल्जियम और फ्रांस में ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले दो अहम लोगों में से एक थे. उन्होंने लाखों डॉलर की हेराफेरी की बात मानी. उन्होंने कहा, ''मैंने उनके साथ कई तरह का काम किया. पैसा, स्थान, यात्री, तस्करी... मैं इन सब चीज़ों में था.''

इसके बाद भी वो मानव-तस्करी की बात से इनकार करते रहे, लेकिन उनके काम उनकी बात से मेल नहीं खा रहे थे.

स्कॉर्पियन को इस बात का अहसास नहीं हुआ कि जब वो अपने फोन को स्क्रॉल कर रहे थे, रॉब ने पीछे की पॉलिश की हुई दीवार पर उनके मोबाइल की स्क्रीन देखी.

रॉब ने मोबाइल में पासपोर्ट नंबरों की लिस्ट देखी. हमें बाद में पता चला कि तस्कर इन्हें इराक़ी अधिकारियों को भेजेंगे. बाद में उन्हें ग़लत वीज़ा जारी करने के लिए रिश्वत दी जाएगी ताकि वो लोग तुर्की जा सकें.

वो आख़िरी मौक़ा था जब हमने स्कॉर्पियन को देखा था.

हर चरण में हमने अपनी जानकारी ब्रिटेन और यूरोप के अधिकारियों के साथ साझा की है.

स्कॉर्पियन को दोषी ठहराने में शामिल बेल्जियम की पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एन लुकोविआक को अब भी उम्मीद है कि स्कॉर्पियन को एक दिन इराक़ से प्रत्यर्पित किया जा सकेगा.

वो कहती हैं, ''इस बात का संकेत देना ज़रूरी है कि आप वो सब नहीं कर सकते, जो आप करना चाहते हैं. हम उसे ले आएंगे.''

(इस रिपोर्ट में बेन मिल्ने का भी योगदान रहा है)

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