म्यांमार में ऑनलाइन स्कैम के लिए कैसे ‘साइबर ग़ुलाम’ बनाए जा रहे हैं लोग

- Author, सुनेथ परेरा और इस्सारिया प्रेथोन्गएम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
"उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए. मुझे एक कुर्सी पर बिठाकर मेरे पैरों में बिजली के झटके दे दिए. मुझे लगा कि अब मेरे जीवन का अंत हो गया."
श्रीलंका के 24 साल के रवि आईटी नौकरी पाने के लिए थाईलैंड गए थे. लेकिन बैंकॉक के किसी ऊंची इमारत वाले दफ़्तर में बैठने के बजाय उन्होंने ख़ुद को म्यांमार के एक अंधेरे परिसर में फंसा पाया.
रवि का अपहरण कर लिया गया था. उसके बाद उन्हें थाईलैंड के सीमावर्ती शहर 'माए सोत' के पास की नदी के पार ले जाया गया.
उनका कहना है कि वहां उन्हें ऑनलाइन स्कैम (ऑनलाइन धोखाधड़ी) करने वाले चीनी भाषी लोगों के कई शिविरों में से एक को बेच दिया गया.
उन शिविरों में रवि जैसे तस्करी के शिकार लोगों को स्कैम करते हुए घंटों तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है.
इन पीड़ितों की फर्ज़ी ऑनलाइन पहचान बनाकर इन्हें महिला बनाकर पेश किया जाता है.
इनका काम अमेरिका और यूरोप के अकेले रहने वाले मर्दों को बरगलाना होता है.
उसके बाद कोई 'कमज़ोर' लक्ष्य पाते ही तुरंत रिटर्न का झूठा वादा करके उन्हें किसी फेक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में बड़ी राशि निवेश करने के लिए राज़ी कर लिया जाता है.
रवि 'साइबर-गुलामी' के जिस शिविर में फंसा, वो म्यांमार में म्यावाड्डी के पास जंगल में बना हुआ था. वो ऐसा इलाक़ा है, जिस पर म्यांमार की सैनिक सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है.
इंटरपोल के अनुसार, एशिया, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के हज़ारों युवाओं और युवतियों को कंप्यूटर से जुड़ी नौकरी देने का लालच देकर इन 'साइबर क्रिमिनल' शिविरों में फांस लिया जाता है.
जो लोग उनके आदेशों का पालन नहीं करते, उन्हें मारा-पीटा जाता है या उनका बलात्कार भी किया जाता है.
रवि ने बीबीसी को बताया, "उनकी बात न मानने के कारण मैंने 16 दिन एक सेल में बिताए. उन्होंने पीने के लिए मुझे जो पानी दिए, उसमें सिगरेट के टुकड़े और राख मिले हुए थे."
उन्होंने बताया, "सेल में रहते हुए जब पांच या छह दिन हो गए थे, तब दो लड़कियों को बगल वाली सेल में लाया गया. मेरी आंखों के सामने 17 लोगों ने उनके साथ बलात्कार किया. उनमें से एक फिलीपींस की थी. दूसरी पीड़ित लड़की का देश मुझे नहीं पता."
कौन हो रहे हैं तस्करी के शिकार?

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संयुक्त राष्ट्र ने अगस्त 2023 में अनुमान लगाया कि म्यांमार में 1.20 लाख से अधिक और कंबोडिया में 1 लाख लोगों को कई तरह के ऑनलाइन स्कैम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
यूएन के अनुसार इनसे अवैध जुए से लेकर क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम के अन्य काम कराए जा रहे हैं.
पिछले साल आई इंटरपोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, लाओस, फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम में ऑनलाइन स्कैम के केंद्र मौजूद थे.
इंटरपोल के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि अब यह ट्रेंड एक क्षेत्रीय समस्या से बढ़कर वैश्विक सुरक्षा के लिए ख़तरा बन गई है.
संस्था के अनुसार, कई और देश धोखाधड़ी के केंद्र, धोखाधड़ी के रास्ते या ऐसी जगह बन गए हैं जहां से लोगों को तस्करी करके लाया जाता है.
इस महीने के शुरू में भारत सरकार ने बताया कि अब तक कंबोडिया में तस्करी करके ले जाए गए कुल 250 नागरिकों को बचाया गया है.
चीन ने मार्च में, अपने सैकड़ों नागरिकों को म्यांमार के इन केंद्रों से वापस ले जाने में कामयाबी हासिल की. चीन म्यांमार की सैन्य सरकार और हथियारबंद समूहों पर धोखाधड़ी के इन केंद्रों को बंद करने के लिए दबाव बढ़ा रहा है.
श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें अपने कम से कम 56 नागरिकों के बारे में पता है. ये वो लोग हैं, जो म्यांमार के चार अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं.
म्यांमार में श्रीलंका के राजदूत जनक बंडारा ने बीबीसी को बताया कि इनमें से आठ लोग को हाल में म्यांमार के प्रशासन की मदद से बचाया गया.

इन शिविरों का संचालन कर रहे लोगों के लिए शिकार बनने वाले प्रवासी मज़दूरों की कोई कमी नहीं है. दक्षिण एशिया से हर साल लाखों इंजीनियर, डॉक्टर, नर्स और आईटी विशेषज्ञ काम की तलाश में विदेश पलायन करते हैं.
कंप्यूटर के जानकार रवि संकट से घिरी अपने देश की अर्थव्यवस्था के कारण श्रीलंका छोड़ने को बेताब थे. ऐसे वक़्त में उन्हें थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में डेटा एंट्री की जॉब देने वाले एक स्थानीय एजेंट के बारे में मालूम हुआ.
भर्ती करने वाले एजेंट ने दुबई के अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर भरोसा दिया कि कंपनी उन्हें 3,70,000 श्रीलंका रुपये (1,200 डॉलर) की बेसिक सैलरी देगी.
हाल ही में विवाह करने वाले रवि और उनकी पत्नी को लगा कि इस नौकरी से वे अपना घर बना सकते हैं. इसलिए उस एजेंट को देने के लिए उन्होंने कई लोन लिए.
थाईलैंड से म्यांमार तक का सफ़र

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2023 की शुरुआत में रवि और श्रीलंका के अन्य लोगों के एक समूह को पहले बैंकॉक भेजा गया. उसके बाद उन्हें पश्चिमी थाईलैंड के शहर माए सोत भेजा गया.
रवि ने कहा, "हमें एक होटल में ले जाया गया. उसके बाद हमें जल्द ही दो बंदूकधारियों को सौंप दिया गया. वे हमें एक नदी पार करके म्यांमार ले गए."
उसके बाद उन्हें चीनी भाषा बोलने वाले गैंगस्टरों द्वारा चलाए जा रहे शिविरों में भेज दिया गया.
रवि के अनुसार, "हम डरे हुए थे. श्रीलंका, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों के लगभग 40 युवकों और युवतियों को उस शिविर में जबरन रखा गया था."
रवि ने कहा कि वहां से भागने से रोकने के लिए परिसर के चारों ओर ऊंची दीवारें और कंटीली तारें लगाई गई थीं और प्रवेश द्वार पर 24 घंटे बंदूकधारी पहरेदारी कर रहे थे.
रवि के अनुसार, उन्हें और अन्य लोगों को हर दिन 22 घंटे तक काम करने को मजबूर किया जाता था. महीने में केवल एक दिन की ही छुट्टी मिलती थी. और अपेक्षा की जाती थी कि हर कोई हर दिन कम से कम तीन लोगों को शिकार बनाएंगे.
जो लोग उनकी बात नहीं मानते, उन्हें यातना का सामना करना पड़ता, या तो फिर बचने के लिए उन्हें धन चुकाना होता.
ऐसा ही कुछ भारत के महाराष्ट्र के 21 साल के नील विजय के साथ हुआ. उन्हें अगस्त 2022 में पांच अन्य भारतीय पुरुष और फिलीपींस की दो महिलाओं के साथ तस्करी करके म्यांमार लाया गया था.

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नील विजय ने बीबीसी को बताया कि उनकी मां के एक दोस्त ने उन्हें बैंकॉक के कॉल सेंटर में नौकरी दिलाने का वादा किया. और एजेंट की फीस के रूप में उनसे 1.50 लाख रुपये (1,800 डॉलर) ले लिए.
नील ने बताया, "चीनी भाषी लोग कई कंपनी चला रहे थे. वे सभी स्कैमर्स थे. हमें उन कंपनियों को बेच दिया गया. जब हम उस जगह पहुंचे, तो मैंने उम्मीद खो दी. अगर मेरी मां ने उन्हें फिरौती की रकम नहीं दी होती, तो मुझे भी दूसरों की तरह प्रताड़ित किया जाता."
इस स्कैम में शामिल होने से मना करने के बाद नील के परिवार ने उन्हें रिहा करने के लिए स्कैमर को 6 लाख भारतीय रुपये (7,200 डॉलर) का भुगतान किया.
हालांकि वहां से रिहा होने के पहले उन्होंने पाया कि टारगेट न पूरा करने या फिरौती न देने के कारण लोगों को क्रूर सज़ा दी गई.
उनकी रिहाई के बाद, थाईलैंड के अधिकारियों ने उन्हें भारत भेजने में मदद की. उधर उनके परिजनों ने भर्ती करने वाले स्थानीय लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की है.
थाईलैंड के अधिकारी ऐसे पीड़ितों को उनके देश भेजने के लिए दूसरे देशों के साथ काम कर रहे हैं. लेकिन वहां के न्याय मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि पड़ोसी देशों में चल रहे शिविरों में फंसे लोगों की तुलना में बचाए गए लोगों की संख्या बहुत कम है.
थाईलैंड में विशेष जांच विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पिया रक्साकुल ने कहा, "इन आपराधिक गिरोहों के बारे में जागरूक करने के लिए हमें दुनिया के साथ संवाद बढ़ाने पर और काम करने की ज़रूरत है, ताकि वे ख़ुद को पीड़ित होने से बचा सकें."
उनका कहना है कि मानव तस्कर अक्सर बैंकॉक को लोगों को लाने के लिए एक केंद्र के रूप में इस्तेमाल करते हैं. वो इसलिए कि भारत और श्रीलंका सहित कई देशों के लोग 'वीज़ा ऑन अराइवल' की सुविधा के कारण आसानी से थाईलैंड आ सकते हैं.
उन्होंने बताया कि अपराधी इस सुविधा का फ़ायदा उठाकर अपने लिए काम कराने के लिए लोगों की तस्करी कराते हैं.
कैसे होते हैं ये स्कैम

रवि ने बताया कि उन्हें चोरी के फोन नंबरों, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए रोमांटिक रिलेशन बनाकर पश्चिमी देशों के अमीर लोगों को निशाना बनाने के लिए कहा जाता था.
उन्होंने पीड़ित लोगों से सीधे संपर्क किया. आमतौर पर उन्हें भरोसा दिलाया कि पहला मैसेज (अक्सर एक सिंपल 'हाय') ग़लती से चला गया था.
रवि बताते हैं, कुछ लोग मेरे मैसेज को नजरअंदाज़ कर देते थे, लेकिन अकेले रह रहे लोग या सेक्स चाहने वाले लोग इसमें फंस जाते थे.
उनसे जवाब मिलने के बाद उन्हें और अधिक लुभाने के लिए कैंप की युवतियों को अतरंगी तस्वीरें भेजने को मजबूर किया जाता.
कुछ ही दिनों में सैकड़ों मैसेज का आदान-प्रदान करने के बाद स्कैमर्स इन लोगों का भरोसा हासिल कर लेते. उसके बाद उन्हें फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में बड़ी राशि का निवेश करने के लिए राजी कर लिया जाता. फिर ये नकली ऐप उन्हें निवेश और लाभ की ग़लत जानकारी बताते.
रवि बताते हैं, "यदि कोई व्यक्ति 1 लाख डॉलर ट्रांसफर करता, तो हम उन्हें ये कहकर 50 हज़ार डॉलर लौटा देते कि ये उनका लाभ है. इससे उन्हें लगता कि उनके पास तो अब 1.50 लाख डॉलर हैं. असल में, उन्हें तो उनकी 1 लाख डॉलर की शुरुआती राशि में से ही आधी राशि मिलती है, बाक़ी आधी राशि तो हमारे पास ही होती."
इतना भरोसा बनाने के बाद स्कैमर जब पीड़ित लोगों का यथासंभव दोहन कर लेते, उसके बाद उनका खाता और सोशल मीडिया प्रोफाइल अपने आप गायब हो जाता.
धोखाधड़ी के इस कारोबार का आकार कितना है, इसका पता लगाना मुश्किल है.
हालांकि एफबीआई ने 2023 की अपनी इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका में 'भरोसा या रोमांस' के ऐसे घोटालों की 17 हज़ार से अधिक शिकायतें मिलीं. इन शिकायतों के तहत कुल नुकसान की रकम क़रीब 65 करोड़ डॉलर बताई गई.
मानसिक और शारीरिक ज़ख़्म

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रवि ने बताया कि एक महीने की क़ैद के बाद उन्हें किसी दूसरे गिरोह को बेच दिया गया. वो इसलिए कि जिस 'कंपनी' के लिए वो काम कर रहे थे, वो अब 'दिवालिया' हो गई थी.
म्यांमार में वो छह महीने तक फंसे रहे और उस दौरान उन्हें तीन अलग-अलग गिरोहों को बेचा गया.
उसने अपने नए गैंगमास्टरों से कहा कि वो लोगों को अब और धोखा नहीं दे सकता, इसलिए अब उसे श्रीलंका लौटने की अनुमति दी जाए.
इस बात को लेकर एक दिन उनकी टीम लीडर के साथ झड़प हो गई. उसके बाद रवि को एक सेल में ले जाकर उन्हें 16 दिनों तक प्रताड़ित किया गया.
अंत में, उसके 'चीनी बॉस' ने रवि से मुलाक़ात की. उन्होंने उसे फिर से काम करने का 'आख़िरी मौक़ा' दिया.
रवि ने बताया, "मेरे पास कोई विकल्प ही नहीं था. तब तक मेरा आधा शरीर अपंग हो चुका था."
अगले चार महीनों तक रवि ने एक वीपीएन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐप्स और 3डी वीडियो कैमरों के सहारे फेसबुक अकाउंट्स को मैनेज किया. इस बीच, रवि ने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए श्रीलंका जाने की इजाज़त मांगी.
गिरोह के नेता ने रवि के सामने 6 लाख रुपये (2 हज़ार डॉलर) की फिरौती देने और नदी पार करके थाईलैंड जाने के लिए और 2 लाख रुपये (650 डॉलर) देने की शर्त रखी.
रवि के माता-पिता ने अपना घर गिरवी रखकर फिरौती की रकम दी. उसके बाद उन्हें माए सोत ले जाया गया.
वीज़ा न होने के कारण हवाई अड्डे पर उन पर 20 हज़ार थाई बाट (550 डॉलर) का जुर्माना भी लगाया गया. इसके लिए रवि के माता-पिता को और कर्ज़ा लेना पड़ा.
रवि के अनुसार, "जब मैं श्रीलंका पहुंचा, तो मुझ पर कुल 18.50 लाख रुपये ($6,100) का कर्ज़ था."
उन्होंने कहा, "मैं अब यह कर्ज़ चुकाने के लिए दिन-रात एक गैरेज में काम करता हूं. सूद चुकाने के लिए हमने शादी की दोनों अंगूठियों को गिरवी रख दिया है."
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