कोहली ने अपनी बल्लेबाज़ी में क्या बदला है कि पुरानी रंगत दिखने लगी

    • Author, शारदा उगरा
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

बीते तीन महीने से वनडे क्रिकेट के उस्ताद विराट कोहली का नया अवतार देखने को मिल रहा है.

वनडे क्रिकेट में दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी विराट कोहली का ये नया अवतार एक उदाहरण पेश करने के साथ एक मैसेज भी देता है.

विराट कोहली के हालिया प्रदर्शन ने वनडे क्रिकेट में उनकी पहले से रही महारत के अलावा कई नए पहलुओं को भी दिखाया है.

संदेश स्पष्ट है: अप्रत्याशित चोट को छोड़कर, उनकी उम्र चाहे जो भी हो, विराट कोहली को 18 महीने बाद जब 2027 आईसीसी वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का चयन होगा, तब नज़रअंदाज़ करना बहुत मुश्किल होगा.

बीते तीन महीने में विराट कोहली ने नौ वनडे मैच खेले हैं.

इनमें से ऑस्ट्रेलिया में खेले गए पहले दो मैचों के शून्य स्कोर को हटा दिया जाए, तो वो फिर कभी संघर्ष करते हुए नहीं दिखे.

ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेले गए बाक़ी सात मैचों में विराट कोहली ने हमेशा की तरह शानदार प्रदर्शन किया है.

लेकिन इस दौरान उनकी बल्लेबाज़ी में एक बदलाव आया है. वो अब पारी की शुरुआत में तेज़ी से रन बना रहे हैं और उनके खेल में नई आज़ादी भी देखने को मिली है.

विराट कोहली ने खोज लिया है नया रास्ता

वनडे क्रिकेट की पिछली सात पारियों में विराट कोहली ने 123.2 की औसत और 108 के स्ट्राइक रेट से 616 रन बनाए हैं. इनमें तीन शतक और तीन अर्धशतक शामिल रहे हैं.

इनमें से लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने चार में से तीन मैचों में जीत दर्ज की है. हालाँकि इंदौर में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेले गए मैच में भारतीय टीम को जीत नहीं मिली.

तीन नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए विराट कोहली को तीन मौक़ों पर शुरुआती पाँच ओवर में ही क्रीज़ पर आना पड़ा.

जबकि तीन अन्य मौक़ों पर वो 9वें, 11वें और 13वें ओवर में बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरे.

आँकड़े हमें ये नहीं बताते कि कोहली जो पिछले 15 सालों में वनडे क्रिकेट में सबसे महान चेजर रहे हैं, उन्होंने कैसे रिएक्ट किया है.

बात चाहे पहले बल्लेबाज़ी की हो या फिर लक्ष्य का पीछे करने की, कोहली नए गियर्स के साथ खेलते हुए नज़र आए हैं.

कोहली पहले परिस्थितियों का जायज़ा लेते हुए एक या दो रन लेकर धीरे-धीरे अपनी पारी को आगे बढ़ाते थे. लेकिन बीते सात मैचों में देखें, तो उन्होंने खुलकर खेलना शुरू कर दिया है.

इसमें रोहित शर्मा के 2023 में सलामी बल्लेबाज के रूप में बेहद आक्रामक रुख़ अपनाने की झलक मिलती है.

लेकिन रोहित के ऐसा होने के पीछे एक वजह ये भी थी कि कप्तान के रूप में बोर्ड ने उन पर पूरा भरोसा जताया था.

विराट कोहली अब सिर्फ़ वनडे क्रिकेट ही खेल रहे हैं और अपने करियर के अंतिम दौर में उन्होंने अपने पुराने तरीक़े को छोड़ दिया है और एक नया रास्ता खोज लिया है.

विकेट के बीच उनकी शानदार रनिंग के साथ वो अब ज़्यादा बाउंड्री स्कोर कर रहे हैं. इसकी वजह से उन्हें पारी को आगे बढ़ाने और रन रेट को कंट्रोल करने में मदद मिल रही है.

उन्होंने ये सब अपने पारंपरिक क्रिकेट शॉट्स, जैसे ड्राइव, फ़्लिक और तेज़ ऑनसाइड प्ले, जो लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट की सफलता का बेसिक है, उसी के माध्यम से ही किया है.

क्यों मिल रही है विराट कोहली को सफलता?

ईएसपीएन क्रिकइन्फ़ो की रिपोर्ट के मुताबिक़ दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ से ही उन्होंने शुरुआती 20 गेदों में 103.75 के स्ट्राइक रेट से रन स्कोर किए हैं और उन्होंने औसतन हर 6 बॉल में बाउंड्री स्कोर की है.

विराट कोहली की पहचान कभी भी ताबड़तोड़ छक्के जड़ने वाले बल्लेबाज़ के तौर पर नहीं रही है.

उन्होंने एक पारी में अधिकतम 8 सिक्स लगाए हैं. लेकिन बीते तीन महीने में वो 16 सिक्स लगा चुके हैं. रांची में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ उन्होंने सात छक्के लगाए.

वो पावरप्ले में बाउंड्री लगा रहे हैं, क्रीज़ से बाहर निकलकर शॉट्स लगा रहे हैं और बॉलर्स के सिर के ऊपर से भी शॉट मार रहे हैं.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 91 गेंदों में 93 रन की पारी खेलने के बाद उन्होंने कहा, "ज़्यादा देर तक इंतज़ार करने का कोई मतलब नहीं है. लेकिन आपको जोखिम भरे शॉट्स भी खेलने चाहिए. आपको अपनी ताक़त पर टिके रहना चाहिए. लेकिन आपको ख़ुद पर इतना भरोसा होना चाहिए कि आप विपक्षी टीम को बैकफ़ुट पर धकेल सकें."

कोहली के नए नज़रिए के पीछे ये बात भी है कि वो एक ही फ़ॉर्मेट में खेल रहे हैं और उनके पास कोई लीडरशिप रोल भी नहीं है.

उन्होंने अपनी वनडे बल्लेबाज़ी की रणनीति में बदलाव किया है.

मुश्किल परिस्थितियों में एक छोर पर टिके रहने की कोशिश करने के बजाय कोहली कहते हैं, "मैं सिर्फ़ क्रीज़ पर जमे रहने की बजाए काउंटरअटैक करने की कोशिश कर रहा हूँ."

ऐसा करने में कोहली का वनडे क्रिकेट का अनुभव और सफलता तो उनकी मदद कर ही रही है.

साथ ही बिना जोखिम स्ट्रोक प्ले और विकेटों के बीच उनकी फ़िटनेस भी उन्हें 'मुश्किल परिस्थितियों' को अपने अनुकूल ढालने की अनुमति देती है जहाँ वो गेंदबाज़ों पर दबाव डालकर गेम को कंट्रोल करते हैं.

अभी से 2027 के वर्ल्ड कप तक भारत को 9 और वनडे सिरीज़ खेलनी हैं.

इनमें से छह भारत अपने घर में खेलेगा, जबकि बाक़ी तीन सिरीज़ इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश में खेलेगा. ये क़रीब 24 से 27 मैच होंगे.

विराट कोहली के करियर के इस पड़ाव को देखना मज़ेदार होने वाला है.

एक कलाकार, एक उस्ताद ने अपने कैनवास पर रंगों को देखने का एक नया तरीक़ा खोज लिया है और वह ऐसी कलाकृति बनाने के लिए तैयार है जो पहले कभी नहीं देखी गई.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.