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सरकारी प्रयासों के बावजूद चीन में तेज़ी से घटती आबादी, बच्चे पैदा नहीं करना चाहते लोग
- Author, केली एनजी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
चीन में तेज़ी से आबादी घट रही है, लगातार चौथे साल ऐसा हुआ है. 2016 में 'वन चाइल्ड' पॉलिसी ख़त्म कर दी गई थी, फिर भी आबादी में बढ़ोतरी नहीं हुई.
सरकार जन्म दर बढ़ाने के लिए कई प्रयास कर रही है, लेकिन वे सब विफल साबित हो रहे हैं. सरकार जन्म दर को बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके से मदद और सुविधाएं दे रही है. लेकिन यह चौथा साल है, जब जन्म दर लगातार घटी है.
सोमवार को सरकारी आंकड़े जारी हुए, जिनमें सामने आया कि अब जन्म दर 1,000 लोगों पर सिर्फ़ 5.63 रह गई है.
1949 में कम्युनिस्ट पार्टी के सत्ता में आने के बाद यह सबसे कम जन्म दर मापी गई है. दूसरी ओर, चीन में मृत्यु दर बढ़कर 1,000 लोगों पर 8.04 हो गई है, जो 1968 के बाद सबसे ज़्यादा है.
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साल 2025 के अंत तक चीन की आबादी 33.9 लाख कम हुई और 140 करोड़ रह गई. यह गिरावट पिछले साल के मुक़ाबले अधिक है.
बुज़ुर्ग लोगों की संख्या बढ़ने और अर्थव्यवस्था धीमी होने की वजह से चीन सरकार युवाओं को शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
सरकार बच्चे पैदा करने के लिए दे रही है पैसे
साल 2016 में चीन की सरकार ने 'वन चाइल्ड' पॉलिसी ख़त्म कर दी थी और दो बच्चे पैदा करने की इजाज़त दे दी थी. यह जन्म दर बढ़ाने के प्रयास के तौर पर लिया गया फ़ैसला था, लेकिन जब इससे भी जन्म दर में निरंतर बढ़ोतरी नहीं हुई, तो 2021 में तीन बच्चे पैदा करने तक की अनुमति दी गई.
हाल में सरकार ने तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे के माता-पिता को 3,600 युआन (भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 47 हज़ार रुपये) देने की घोषणा की है. देश के कुछ प्रांत अपने स्तर पर भी अतिरिक्त पैसे और ज़्यादा मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) दे रहे हैं.
जन्म दर बढ़ाने के लिए चीनी सरकार के कुछ फ़ैसलों पर विवाद भी हुआ. मिसाल के तौर पर, कंडोम, गर्भ निरोधक गोलियां और अन्य साधनों पर 13% नया टैक्स लगाया गया, जिससे लोग चिंतित हो गए. ऐसी आशंका है कि इससे अनचाहे गर्भ और एचआईवी के मामले बढ़ सकते हैं.
दुनिया में सबसे कम बच्चे पैदा होने की दर चीन में ही है. इसी तरह दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और ताइवान में भी बच्चे बहुत कम पैदा हो रहे हैं.
बच्चे पैदा क्यों नहीं करना चाहते चीन के लोग?
बीजिंग के युवा पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट (2024) बताती है कि चीन उन देशों में शामिल है, जहां बच्चे पालना सबसे महंगा है. लेकिन बच्चे पैदा न करने की वजह केवल महंगाई या पैसे की कमी ही नहीं है. चीन के कुछ लोगों ने बीबीसी को बताया कि पैसों के अलावा और भी वजहें हैं, जैसे बिना चिंता या ज़िम्मेदारी के आज़ादी से जीवन जीना.
बीजिंग के एक निवासी ने 2021 में बीबीसी को बताया, "मेरे बहुत कम दोस्तों के बच्चे हैं. जो हैं, वे सबसे अच्छी दाई ढूंढने या बच्चों को सबसे अच्छे स्कूल में डालने को लेकर चिंतित हैं. यह सब सुनकर ही थकान होने लगती है."
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की आबादी लगातार घटती रहेगी. उनका अनुमान है कि साल 2100 तक देश की आबादी आधी से भी कम रह जाएगी. आबादी घटने से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है. काम करने वाले लोग कम हो रहे हैं और कंज्यूमर सेंटिमेंट कमज़ोर हो रहा है.
कई युवा माता-पिता से दूर रहते हैं, इसलिए बुज़ुर्ग अकेले रह जाते हैं या सरकार के पैसे पर निर्भर हो जाते हैं. लेकिन सरकारी संस्था चाइनीज़ अकेडमी ऑफ़ सोशल साइंस के अनुसार, बुज़ुर्गों के लिए पेंशन का फ़ंड ख़त्म होने की कगार पर है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.