भारत-यूरोप के बीच परिवहन गलियारे को लेकर ईरान का मीडिया क्यों है नाराज़

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- Author, बीबीसी मॉनीटरिंग
- पदनाम, मध्य पूर्व मामलों पर
भारत को यूरोप से जोड़ने वाले ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को लेकर ईरान की मीडिया में नाराज़गी व्यक्त की जा रही है.
एक वजह ये भी है कि इस भारत-मध्यपूर्व-यूरोप-आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईईसी) कॉरिडोर से ईरान को दूर रखा गया है.
ईरान के दो समाचार पत्रों ने ज़ोर देकर कहा कि इस कॉरिडोर का मकसद मध्य पूर्व को इसराइल पर निर्भर बनाना है और उसके “वजूद को सुनिश्चित” करना है.
ईरान के प्रभावशाली अख़बार केहान डेली ने चेतावनी दी है कि यह “कॉरिडोर ज़मीन पर नहीं उतरने” जा रहा है.

केहान ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह ख़ामेनेई के हालिया भाषण का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने इस कॉरिडोर का विरोध किया है.
ईरान रूस के साथ, भारत, ईरान, अज़रबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच उत्तर-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) और चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के माल ढुलाई कॉरिडोर का लंबे समय से समर्थन करता रहा है.
ईरान के प्रमुख अख़बार ने क्या लिखा

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ईरान के कट्टरपंथी केहयान डेली ने आठ अक्टूबर को आईएमईईसी ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के ख़िलाफ़ पहले पन्ने पर एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था- ‘आईएमईईसी कॉरिडोर नहीं बनने जा रहा.’
इस अख़बार के प्रधान संपादक को सीधे सुप्रीम लीडर ख़ामेनेई की ओर से नियुक्त किया जाता है.
असल में आईएमईईसी की संकल्पना दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले जी20 गुट ने 2023 में की थी, जिसका मकसद है भारत और यूरोप को संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इसराइल और ग्रीस से होते हुए जोड़ा जाए. इसमें ईरान को बायपास किया गया है.
केहान ने तर्क दिया है कि यह कॉरिडोर इसराइल की लाइफ़ लाइन बन जाएगा और अरब जगत से उसके संबंध सामान्य होने में मदद करेगा और अरब देशों को इसराइल पर निर्भर बना देगा.
इस लेख में कहा गया है कि आधुनिक समय में परिवहन गलियारे का इस्तेमाल भूराजनीतिक बढ़त हासिल करने के हथियार के रूप में किया जाने लगा है और आईएमईईसी प्रोजेक्ट अरब देशों और इसराइल के बीच ख़ास तौर पर संबंधों में सुधार लाने और शांति में तेजी लाने की एक “ख़तरनाक योजना” है.
इसराइल और सऊदी अरब के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच हमास ने सात अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमला बोला था.
केहान के अनुसार, “इस हमले ने किसी भी चीज़ से ज़्यादा, इस पश्चिमी-यहूदी आईएमईईसी प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ा झटका था.”

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इस लेख में ये भी कहा गया है कि यह प्रोजेक्ट बाब अल-मंदाब, अदन की खाड़ी, लाल सागर और स्वेज़ नहर के रणनीतिक महत्व को ख़त्म कर देगा और “पश्चिमी एशियाई लोगों के ख़िलाफ़ अत्याचार और नफ़रत की आंधी” के लिए “पश्चिमी और इसराइली अपराधियों” के डर को कम कर देगा.
असल में यह लाल सागर से होकर गुजरने वाले शिपिंग लेन पर यमन के हूती हमलों के संदर्भ में कहा गया.
अख़बार ने आगे लिखा है कि ग़ज़ा में हमास के ख़िलाफ़ और अन्य क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के ख़िलाफ़ इसराइली युद्ध का “असल मक़सद है आईएमईईसी कॉरिडोर को पूरा करने और उसे कामकाजी बनाने में मदद करना.”
हाल ही में इसराइल की बमबारी में लेबनान के हिज़्बुल्लाह ग्रुप के नेता हसन नसरल्लाह की मौत हो गई थी.
इस लेख में ईरान को कॉरिडोर से अलग करने पर भी बात की गई और दो अन्य क्षेत्रीय कॉरिडोर परियोजनाओं पर कथित रूप से इससे पैदा होने वाले ख़तरे का ज़िक्र किया गया है.
इनमें पहला है, आईएनएसटीसी- उत्तर दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, जिसका ईरान और रूस समर्थन करते हैं, जबकि दूसरा है चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई).

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केहान ने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के चार अक्टूबर को जुमे की नमाज के दौरान दिए गए भाषण का भी ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने आईएमईईसी प्रोजेक्ट का ज़िक्र किया था.
खामेनेई ने कहा था, “अमेरिकियों और उनके सहयोगियों की नीति है कि इस परियोजना को, इस क्षेत्र से ईंधन को पश्चिमी जगत में निर्यात करने और पश्चिम से सामान और टेक्नोलाजी का इस क्षेत्र में आयात करने का प्रवेश द्वार बना दिया जाए...जिसका मतलब है कि अत्याचारी सरकार (इसराइल) के वजूद को सुनिश्चित किया जा सके और इस पूरे क्षेत्र को उसके ऊपर निर्भर बना दिया जाए.”
अख़बार ने ये भी कहा कि 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र आम सभा में अपने भाषण के दौरान बिन्यामिन नेतन्याहू ने जो नक्शा दिखाया था, “उसने जॉयनिस्ट सरकार के वजूद के लिए इस योजना की अहमियत को स्पष्ट रूप से खोल दिया है.”
केहान ने तर्क दिया कि इस परियोजना का “नाकाम होना” तय है और इसराइल पर हमास के हमले के एक साल बाद, उसे इस बात का अहसास हो गया है कि यह “परियोजना पूरी नहीं” होगी.
इसी तरह के एक लेख ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी इरना ने भी प्रकाशित किया है और सरकार के आधिकारिक नज़रिये को प्रस्तुत किया है.
छह अक्टूबर को प्रकाशित इस लेख में इरना ने लिखा कि आईएमईईसी प्रोजेक्ट का मक़सद 'ज़ॉयनिस्ट सरकार' के वजूद को सुरक्षित करना है.
केहान डेली की तरह ही इरना ने भी इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र को पैदा होने वाले ख़तरे का ज़िक्र किया है.
आईएमआईईसी पर चीन और अमेरिका का रुख़

इस परियोजना का मक़सद भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को रेल एवं पोर्ट नेटवर्क के ज़रिए जोड़ा जाना है.
इस परियोजना के तहत मध्य पूर्व में स्थित देशों को एक रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा जिसके बाद उन्हें भारत से एक शिपिंग रूट के माध्यम से जोड़ा जाएगा. इसके बाद इस नेटवर्क को यूरोप से जोड़ा जाएगा.
बीते साल जब आईएमईईसी प्रोजेक्ट की घोषणा हुई तब इसे कई विश्लेषकों ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का जवाब माना था.
हालांकि उस समय चीन ने भारत, मध्यपूर्व के देशों और यूरोप के बीच आर्थिक कॉरिडोर का स्वागत किया है. लेकिन उसने ये भी कहा कि इसे 'भू-राजनीतिक हथियार' नहीं बनाया जाना चाहिए.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने आईएमईईसी को 'सचमुच बड़ी डील' बताया था.
हाल के समय में कई यूरोपीय देशों ने चीन के गलियारे से अलग होने की घोषणा की है जिनमें प्रमुख है इटली.
पिछले साल इटली के रक्षा मंत्री गोइदो क्रोसेटो ने एक इंटरव्यू में इसे 'जल्दबाज़ी में लिया गया और तबाह करने वाले फैसला करार दिया था.'
यूरोपीयन बैंक फ़ॉर रीकंस्ट्रक्शन एंड डेवलेपमेन्ट के अनुसार चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना में अब तक 130 देश शामिल हैं.
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