बांग्लादेश में बड़े निवेश के पीछे चीन की क्या है नीयत?

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की लोकल मीडिया में चीन के राजदूत की सुर्ख़ियां
    • Author, रूपशा मुखर्जी
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

बांग्लादेश के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत बनाने के लिए चीन लगातार अपनी कोशिशें बढ़ा रहा है. जिस तरह चीन बांग्लादेश में चल रहे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन कर रहा है और चीन के राजदूत वहां के व्यापारिक मंचों पर चीन के आर्थिक प्रस्तावों को रखने में सक्रिय दिख रहे हैं, इससे बांग्लादेश में चीन की बढ़ती दिलचस्पी साफ़ झलकती है.

बांग्लादेश से व्यापारिक संबंध मजबूत बनाने के लिए चीन ने वहां के बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश के साथ उर्जा संसाधनों की सप्लाई में मदद का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही वो दोनों देशों की मुद्राओं के आसान आदान-प्रदान के लिए भी पहल कर रहा है.

चीन के ऐसे प्रस्तावों को स्वीकार करते वक्त बांग्लादेश की सरकार भी बेहद सावधानी बरत रही है. वो चीनी प्रस्तावों का स्वागत तो कर रही है, लेकिन भारत और जापान जैसे एशियाई देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मज़बूत बनाने की इच्छा भी खुले तौर पर जाहिर कर रही है.

शेख़ हसीना

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बांग्लादेश में चीन के प्रोजेक्ट्स और निवेश का जाल

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हाल के महीनों में बांग्लादेश में चल रहे चीन के कई प्रोजेक्ट्स पूरे हुए हैं. इनमें से कइयों का उद्घाटन भी हो चुका है. इन्हें लेकर बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जिमिंग के बयानों को बांग्लादेश और चीन की मीडिया में खासी प्रमुखता भी दी जा रही है.

ऐसी ही एक ख़बर 24 नवंबर को चीनी सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने छापी थी. इसमें बताया गया किस तरह चीन ने बांग्लादेश के साथ मिलकर इन्फॉर्मेशन और कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट का तीसरा चरण पूरा किया.

ग्लोबल टाइम्स ने प्रोजेक्ट के बारे में बांग्लादेश के मंत्री ज़ुनैद अहमद पलक के हवाले से लिखा, "हम बांग्लादेश को डिजिटिल बनाने की दिशा में ख़्वावे और सीआरआईजी की निरंतर कोशिशों के लिए शुक्रिया अदा करते हैं."

उद्घाटन समारोह में शामिल हुए चीनी राजदूत ली जिमिंग ने भी कहा कि "ICT सेक्टर में हमारा सहयोग 'डिजिटल बांग्लादेश' और 'डिजिटल सिल्क रोड' को मज़बूती से जोड़ेगा."

उधर 12 नवंबर को शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी ने अपने चीनी संस्करण में चीन की मदद से बन रहे ढाका-आशुलिया एक्सप्रेस वे के उद्घाटन की खबर प्रमुखता से छापी. अख़बार लिखता है कि एक्सप्रेस वे के उद्घाटन समारोह में मौजूद चीनी राजदूत ली जिमिंग ने कहा कि "ये बांग्लादेश के विज़न 2041 के साथ चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के साथ आने की शानदार मिसाल है. इससे दोनों देशों के लोगों का फ़ायदा होगा."

28 नवंबर को शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी ने चीनी कंपनियों की मदद से बन रहे बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान टनल के दक्षिणी हिस्से का काम आंशिक रूप से पूरा होने की ख़बर भी प्रमुखता से दी थी.

भारत बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

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इससे पहले सितंबर में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने बांग्लादेश-चीन मैत्री ब्रिज का उद्घाटन किया था. इस ब्रिज का निर्माण नवंबर 2018 में शुरु हुआ था. पुल की कुल लागत में 70 फ़ीसदी से ज़्यादा पैसा चीन का लगा है.

इस साल चीन बांग्लादेश में अपने इन्वेस्टमेंट प्लान को किस तरह बढ़ा रहा है, इसे कोविड की वजह से लगी पाबंदियों की पृष्ठभूमि से समझा जा सकता है. इन पाबंदियों की वजह से चीन का महात्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट' पिछले 2 साल में खासा प्रभावित हुआ था.

शेख़ मुजीबुर रहमान टनल के दक्षिणी हिस्से का काम पूरा होने पर चीन के सरकारी अख़बार पीपुल्स डेली ने लिखा, "ये प्रोजेक्ट कोविड से पैदा हुए गंभीर हालातों और प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों से पूरी तरह बाहर आ चुका है, जिसकी वजह से माल की ढुलाई प्रभावित हुई थी."

चीन ने बांग्लादेश में कई और भी नए प्रोजेक्ट शुरु करने के भी प्रस्ताव दिए हैं. इनमें उर्जा आपूर्ति से लेकर रिवर प्रोजेक्ट्स और चिटगांव क्षेत्र में एक स्मार्ट सिटी बनाने की योजना है.

बांग्लादेश में बिजली की क़िल्लत पिछले दो महीने से जारी है. इसकी मुख्य वजह है बढ़ी हुई क़ीमतों की वजह से एलपीजी की कमी. इस पर चीन ने मदद की पेशकश करते हुए कहा कि 'अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वो चुप नहीं बैठेगा.'

चीन पहले से ही कॉक्स बाजार इलाक़े में दक्षिण एशिया के पहले 'विंड पावर फैक्ट्री' लगाने में बांग्लादेश सरकार के साथ काम कर रहा है.

शेख़ हसीना चीनी राष्ट्रपति के साथ

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भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता

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5 नवंबर को बांग्लादेश के एक अख़बार 'प्रोथोम आलो' में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ चीनी राजदूत ली जिमिंग ने बांग्लादेश के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. जिमिंग ने 'बांग्लादेश-चीन सिल्क फोरम' को संबोधित करते हुए कहा कि, "चीन तीस्ता बैराज प्रोजेक्ट पर गंभीरता से विचार कर रहा है. अगर बांग्लादेश सरकार ये प्रोजेक्ट करना चाहती है तो चीन इसके लिए तैयार है."

तीस्ता नदी के पानी का इस्तेमाल भारत और बांग्लादेश दोनों करते हैं. दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. ऐसे में तीस्ता नदी पर चीन के सहयोग से कोई भी निर्माण बांग्लादेश और पड़ोसी भारत के बीच पुराने विवाद को और बढ़ा सकता है.

ये बात चीन को बख़ूबी पता है. ली जिमिंग ने कहा कि "कुछ लोग मुझे बता रहे थे कि तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर चीन को सावधान रहना चाहिए क्योंकि भू-राजनैतिक वजहों से ये काफी संवेदनशील है." 'प्रोथोम आलो' ने लिखा कि जिमिंग ने भारत का नाम लिए बग़ैर कहा कि "उन्हें ये भी ख़बर है कि बांग्लादेश पर इस बात के लिए 'बाहरी दबाव' है."

बांग्लादेश को दिए जा रहे चीन के विभिन्न प्रस्तावों पर भारतीय मीडिया की भी पैनी नज़र है. ज़ी न्यूज के वेबसाइट ने 22 नवंबर को लिखा, "भले ही भारत और बांग्लादेश के आपसी रिश्ते मज़बूत हैं, लेकिन इसे लेकर चीन की नीयत पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं... सिर्फ सैन्य क्षेत्र में ही नहीं बल्कि बांग्लादेश के बुनियादी ढांचे में चीनी कंपनियां जिस पैमाने पर निवेश कर रही हैं."

इसी तरह 22 नवंबर को ही मराठी दैनिक लोकमत के हिंदी संस्करण में एक लेख छापा. इसमें लिखा गया था, "ये बेहद गंभीर चेतावनी है. अब तक बांग्लादेश सुरक्षित था, लेकिन अब वो पूरी तरह चीन के जाल में फंसता दिख रहा है. चीन की वजह से बांग्लादेश खुद को तबाह करने के रास्ते पर ले जा रहा है. परेशानी ये है कि बांग्लादेश को स्थिति का अंदाज़ा है लेकन उसे इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि वो चीन के जाल से कैसे बाहर निकले."

10 नवंबर को एक बांग्ला दैनिक 'एई सोमॉय' ने लिखा, "श्रीलंका के रूप में बड़ा उदाहरण सामने होने के बावजूद बांग्लादेश चीन के कर्ज़ जाल में फंसता जा रहा है."

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बांग्लादेश के पास विकल्प क्या है?

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बांग्लादेश ने चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के तहत चीन के निवेश का स्वागत तो किया ही है, लेकिन उसने भारत और जापान जैसे व्यापारिक सहयोगियों से अपनी नज़दीकी बनाए रखी है.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना सितंबर महीने में जब भारत आईं, तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' पर चर्चा की. इस दौरान शेख़ हसीना और पीएम मोदी ने एक ज्वाएंट पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी किया. इसके साथ बिजली और दूसरी बुनियादी ज़रूरत की चीजों की आपूर्ति में भारत की मदद को लेकर भी दोनों नेताओं ने गंभीर चर्चा की.

पूरे एशिया में बांग्लादेश में बनी चीज़ों का सबसे ज़्यादा निर्यात भारत को होता है. जबकि बांग्लादेश चीन के बाद सबसे ज़्यादा आयात भारत से ही करता है. सरकार के ताजा आंकड़े के मुताबिक़ 2019-20 में भारत में बनी वस्तुओं का बांग्लादेश में आयात तीन फीसदी बढ़ा है.

चीन बांग्लादेश
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दूसरी तरफ जापान भी बांग्लादेश के लिए बड़ा निवेशक है. माना जा रहा है कि इस बार शेख़ हसीना के जापान दौरे के साथ दोनों देशों के संबंधों को और मज़बूती मिलेगी.

इस पर बीडीन्यूज-14 नाम की एक वेबसाइट ने लिखा, "बांग्लादेश और जापान अपने संबंधों को व्यापार और निवेश के अलावा भी और मज़बूत करना चाहते हैं. इसमें रक्षा सहयोग के साथ मुक्त व्यापार को लेकर पहल बेहद अहम है."

शेख़ हसीना नवंबर के आख़िरी में ही जापान दौरे पर जाने वाली थीं. लेकिन कुछ वजहों से उनका ये दौरा टल गया. दौरे की नई तारीखों का ऐलान जल्द ही होने वाला है. दक्षिण कोरिया और चीन के बाद जापान बांग्लादेश में तीसरा बड़ा विदेशी निवेशक है.

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अब चीन उन क्षेत्रों में भी निवेश के लिए कदम बढ़ा रहा है जहां वो अब तक पीछे हैं, जैसे निर्यात का क्षेत्र.

साल 2020-21 के आंकड़ों के अनुसार चीन बांग्लादेश के शीर्ष के 10 निर्यातक देशों की सूची में नहीं है, जबकि भारत इस लिस्ट में सातवें और जापान आठवें नंबर पर है.

संभवतः इसी वजह से चीन ने बांग्लादेश से आयात होने वाली कुछ वस्तुओं पर लगने वाला आयात कर हटाने का फ़ैसला किया है. ये नियम 1 सितंबर से ही लागू है. इसके साथ चीनी राजदूत ने बांग्लादेश से आग्रह किया है वो चीन की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए उत्पाद बनाए.

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