कनाडा में 400 किलो सोना और लाखों डॉलर की चोरी के मामले में गिरफ्तारियां

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- Author, नदीन यूसुफ़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, टोरंटो
सोने की एक सनसनीखेज लूट और उसके बाद हुई गिरफ़्तारियों से अमेरिका और कनाडा की सीमा पर होने वाला बंदूकों का अवैध कारोबार चर्चा में आ गया है.
एक साल पहले कनाडा के एयरपोर्ट से सोने के क़रीब दो करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग 120 करोड़ भारतीय रुपये) क़ीमत के हज़ारों गोल्ड बार (सोने की सलाखें) चोरी हो गईं थीं.
अब पुलिस का कहना है कि इस सोने को बेचकर हासिल हुए कैश का इस्तेमाल अमेरिका से बंदूकें ख़रीदने के लिए हुआ.
इस लूट में शामिल नौ संदिग्धों को गिरफ़्तार करने वाली पील रीजनल पुलिस के प्रमुख नैंडो इयानिका ने कहा है, 'ये चोरी सिर्फ़ सोने से जुड़ी नहीं है.' उन्होंने कहा, 'ये लूट सोने के हथियार बनने के बारे में है.'
कनाडा की पुलिस के लिए अमेरिका से अवैध हथियारों की तस्करी लंबे समय से मुद्दा रही है. कनाडा में शॉटगन और राइफ़लों को छोड़कर अधिकतर बंदूक़ों पर प्रतिबंध है.

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वहीं, अमेरिका के संविधान ने लोगों को बिना लाइसेंस के बंदूकें रखने का अधिकार दिया है. यही वजह है कि अमेरिका में बंदूकें बहुत आसानी से हासिल हो जाती हैं और बंदूक़ों की ख़रीददारी अमेरिकी राजनीति में एक गरम मुद्दा रहता है.
अमेरिका में हथियारों की सहज उपलब्धता ने कनाडा में अवैध हथियारों की तस्करी का कारोबार भी खड़ा किया है.
कनाडा में हथियारों पर पुलिस की समिति के प्रमुख बिल फोर्डी कहते हैं, "तस्कर अमेरिका से बंदूकें ख़रीदते हैं और कनाडा मेें बेचते हैं."
पिछले साल एक प्रेस वार्ता में टोरोंटो के एक पुलिस अधिकारी नॉर्मन प्रॉक्टर ने कहा था, "अमेरिका में क़रीब 500 डॉलर में ख़रीदी गई बंदूक को कनाडा में आसानी से 5 हज़ार डॉलर में बेचा जा सकता है."
साल 2020 में कनाडा के नोवा स्कोटिया में हुई एक गोलीबारी की घटना में 22 लोग मारे गए थे. ये कनाडा में हुआ सबसे बर्बर हत्याकांड था. इस घटना के बाद अवैध हथियारों का मुद्दा कनाडा में उठा था.

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इस घटना के बाद कई लोगों ने बंदूकों पर प्रतिबंध के प्रभावी होने पर सवाल भी उठाए थे. इस घटना में शामिल बंदूकें भी अवैध तरीक़े से अमेरिका से कनाडा लाई गई थीं.
पुलिस के मुताबिक़, अमेरिका से कनाडा पहुंचने के बाद इन अवैध हथियारों को देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचा दिया जाता है और इनका इस्तेमाल लूट के अलावा हिंसक घटनाओं में भी होता है.
पुलिस प्रमुख बिल फोर्डी ने 2023 में बीबीसी से कहा था कि कनाडा के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत ओंटारियो में हिंसक घटनाओं में इस्तेमाल होने वाली बंदूकों में से 90 प्रतिशत को अमेरिका से कनाडा लाया गया था.
चीफ़ फॉर्डी ने कहा था, "अपनी ट्रेसिंग और विश्लेषण से हमने पता लगाया है कि सर्वाधिक बंदूकें ओहायो, टेक्सस, फ्लोरिडा और जॉर्जिया से कनाडा पहुंचती हैं."
फॉर्डी के मुताबिक़, "कई बार इन बंदूकों को थोक में ख़रीदा जाता है और कनाडा के बाज़ार में भारी फ़ायदे के साथ बेच दिया जाता है."
सोने की लूट का बंदूकों से संबंध

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पिछले साल टोरंटो के पियरसन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उत्तरी अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी सोना लूट हुई थी.
पुलिस ने इस घटना की तुलना नेटफ्लिक्स की क्राइम सिरीज़ से की थी.
इस लूट में 400 किलो सोना और कैश एयरपोर्ट के एक कार्गो केंद्र से लूट लिया गया था. स्विट्ज़रलैंड से सोना एयरपोर्ट पहुंचने के 42 मिनट के भीतर ही लूट लिया गया था.
लुटेरो ने फ़र्ज़ी शिपिंग रसीद का इस्तेमाल किया था. ये एक बेहद जटिल लूट थी जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे.
फ़र्ज़ी रसीद का इस्तेमाल करके सोने और कैश को एक सफ़ेद रंग के कार्गो ट्रक में भर लिया गया था और फिर लुटेरे इसे लेकर फरार हो गए थे.

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इस मामले में गिरफ़्तारियों की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया था कि एयरलाइन के दो कर्मचारियों की मदद से इस लूट को अंजाम दिया गया था.
अब एयरलाइन के इन कर्मचारियों पर भी आपराधिक मुक़दमा चल रहा है.
पुलिस को जांच में पता चला है कि सोने से ब्रेसलेट बनाए गए थे और फिर उन्हें बेचकर कैश इकट्ठा किया गया था.
पिछले साल सितंबर में पेनसिल्वीनिया में पुलिस ने 25 वर्षीय डुरांटे किंग मैक्लीन को गिरफ़्तार किया था, तब इस घटना से जुड़ी और जानकारियां सामने आईं थीं.
पुलिस को पता चला था कि डुरांटे किंग के पास फ्लोरिडा और जॉर्जिया से ख़रीदी गईं बंदूकें है और वो ख़ुद अवैध तरीक़े से अमेरिका में दाख़िल हुए थे.

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पुलिस चीफ़ फोर्डी कहते हैं, "ये एक संगठित आपराधिक कारोबार है."
कनाडा की पुलिस ने सोना लूट के इस सबसे बड़े मामले में कुछ और गिरफ़्तारियां भी की हैं और 9 लोगों को वारंट जारी किए हैं.
पुलिस ने बुधवार को इस घटना के संबंध में और गिरफ़्तारियों की घोषणा की थी.
पांच लोग जिन्हें गिरफ़्तार करने के बाद ज़मानत दी गई है वे हैं परमपाल संधू, अमित जालोटा, अम्माद चौधरी, अली रज़ा और प्रासथ परमालिंगम.
तीन और लोगों के लिए वारंट जारी किए गए हैं और इन्हें अभी गिरफ़्तार नहीं किया गया है. इनके नाम हैं- सिमरन प्रीत पनेसर, अर्चित ग्रोवर और अर्सलान चौधरी.
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