अंटार्कटिका में 8 महीनों तक अकेले ज़िंदा रह सकते हैं आप?

- Author, तनिका कैटो
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
वाइल्ड लाइफ़ कैमरामैन लिंडसे मैकक्रे को 2016 में ज़िंदगी की सबसे अच्छी ख़बर मिली.
उन्हें अंटार्कटिका में पेंगुइनों के समूह पर फ़िल्म बनाने का मौक़ा मिला. यह उनका ख़्वाब था.
लिंडसे को जिस प्रोजेक्ट पर काम करना था, वह डेविड एटनबरो की नई बीबीसी सिरीज़ "डायनेस्टीज़" का हिस्सा था. उनको एक छोटी टीम के साथ अंटार्कटिका जाना था.
वैसे तो अंटार्कटिका सुनने में ज़्यादा दूर नहीं लगता, लेकिन जिस जगह पर लिंडसे को रहना था वहां सर्दियों में फ़िल्म शूट करने का मतलब है कम से कम 8 महीनों के लिए क़ैद हो जाना.
इस दौरान वहां जाने या वहां से आने का कोई ज़रिया नहीं होता.
अंटार्कटिका की चुनौतीपूर्ण यात्रा
तीन सदस्यों की उनकी टीम के अलावा जो लोग उस समय अंटार्कटिका में मौजूद थे, उनमें से सबसे पास में एक दक्षिण अफ्रीकी टीम थी. उनका बेस भी सैकड़ों किलोमीटर दूर था.
लिंडसे को वह घड़ी याद है, जब उन्होंने अपनी पार्टनर बेकी को इस फ़िल्म प्रोजेक्ट के बारे में बताया था.

इमेज स्रोत, Lindsay McCrae
पहले तो वह घबरा गई और साफ़ मना कर दिया था. लिंडसे ने उनको समझाया कि एम्पेरर पेंगुइन को कैमरे से शूट करना उनके ख़्वाबों में बसा है. दो हफ्ते बाद उन्होंने जाने की इजाजत दे दी.
बेकी भी टीवी की दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. उनको पता था कि हालात कैसे भी हों और आने-जाने में चाहे जितनी मुश्किलें हों, वे कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे.
वे दोनों छह साल से साथ रह रहे थे. सफ़र पर निकलने से पहले लिंडसे और बेकी ने शादी कर ली.
किसी नए शादीशुदा जोड़े के लिए 15,000 किलोमीटर दूर रहने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि दूरी के बावजूद वे यह काम करेंगे.


परिवार से अलगाव
अंटार्कटिका रवाना होने से पहले लिंडसे को प्री-फिल्मिंग इमरजेंसी ट्रेनिंग के लिए ऑस्ट्रिया भेजा गया था. वहां 3,000 मीटर की ऊंचाई पर उनका ट्रेनिंग कैंप था.
लिंडसे को एक टेक्स्ट मैसेज़ मिला, जिसमें बेकी ने उनसे फोन कॉल करने को कहा था.

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वह कहते हैं, "ईमानदारी से कहूं तो मैंने सोचा भी नहीं था. मुझे भरोसा नहीं था कि मेरे पास फोन सिग्नल भी हो सकता है. मैंने पूछा- क्या हो रहा है? उसने बताया- मैं प्रेग्नेंट हूं."
लंबी बहस और चर्चा के बाद लिंडसे और बेकी ने तय किया कि वह डायनेस्टीज़ टीम के साथ अंटार्कटिका जाएंगे, भले ही अपने पहले बच्चे के जन्म के समय उन्हें वहां रहने का मौक़ा न मिले.


जादुई दुनिया
अंटार्कटिका दुनिया का सबसे ठंडा महादेश है. यहां तेज़ तूफानी हवाएं चलती हैं.
यह विशाल महादेश 140 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है. गर्मियों में यहां इंसान की आबादी करीब 4,000 तक पहुंच जाती है और पेंगुइन की तादाद करीब 1.20 करोड़ होती है.

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अंटार्कटिका में मौसम का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता. ठंड बढ़ने पर समुद्र में बर्फ दूर तक फैल जाती है.
जमा देने वाली ठंड में विमान उड़ नहीं सकते और समुद्री जहाज चल नहीं सकते.
लिंडसे कहते हैं, "आखिरी विमान वहां से लौटा तो भरोसा ही नहीं हो रहा था कि हमें धरती के सबसे दूर वाले कोने में सिर्फ़ अपने भरोसे छोड़ दिया गया था."


ज़िंदा रहना है तो धीरज रखिए
"एक बार जब आप वहां चले गए तो वहां से निकलने का कोई ज़रिया नहीं है. कोई विमान नहीं है. आपको बस इसे स्वीकार करना है."
इस वातावरण में ज़िंदा रहना है तो धीरज रखिए. लिंडसे मैकक्रे के वहां रहने के दौरान एक बार बर्फीली आंधी शुरू हुई तो 14 दिनों तक चलती रही.
सर्दियों में ख़राब मौसम कई हफ्तों तक ख़राब रह सकता है.
क्रू मेंबर को कैंप के अंदर बैठकर तूफान के गुजर जाने का इंतज़ार करना होता है. इसके लिए शारीरिक के साथ मानसिक ताक़त भी ज़रूरी है.
लिंडसे बताते हैं. "मुझे माइनस 30 डिग्री सेल्सियस में अपना पहला दिन याद है. मैंने अपनी ज़िंदगी में उतनी तकलीफ़ कभी नहीं झेली थी. मेरी हड्डियां तक ठंडी हो रही थीं. मैं बता नहीं सकता. वह सिर्फ़ -30 डिग्री सेल्सियस था. आगे इससे भी ज्यादा ठंड हुई."
ऐम्पेरर पेंगुइन के लिए उनकी टीम को लंबा इंतज़ार करना था. इसके लिए बेहद ठंडा और शांत मौसम जरूरी था.
लिंडसे के कैंप में एक ही टेलीफोन लाइन थी, जिससे एक लैंडलाइन फोन जुड़ा था. उसी केबल को कंप्यूटर में जोड़कर वे इंटरनेट चला सकते थे.
जिस दिन लिंडसे और उनके साथी समुद्र पर जमी बर्फ पर पेंगुइन की फिल्म बनाने पहुंचे, उसी दिन स्टेशन लीडर टिम को बेकी की मां का फोन आया.
लिंडसे उस दिन को याद करते हैं, "वापस आकर मैं स्काइप पर लॉग-इन में क़ामयाब रहा. मेरा बेटा पैदा हो गया था."
"वह तुरंत पैदा हुआ होगा, क्योंकि मैंने सिर्फ़ उसके रोने की आवाज़ सुनी. मैं वहां बैठ गया था. वह एक अजीब अनुभव था."
पत्नी और नवजात बेटे से दूर रहना लिंडसे कभी नहीं भूल पाते. लेकिन अंटार्कटिका के अनुभव भी उनके लिए अनमोल हैं.

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वह कहते हैं, "यह धरती की सबसे खूबसूरत जगह है जहां मैं कभी गया हूं. गर्मियों में इसकी खूबसूरती अचंभित कर देती है. सूरज 24 घंटे आपके ऊपर रहता है. उसकी चमकीली रोशनी आंखें चौंधिया देती है."
"लेकिन इसका असली मज़ा लेने के लिए आपको वहां सर्दियों में रहना पड़ता है जब सूरज नहीं निकलता और सब कुछ अंधेरे में डूबा रहता है."


अंटार्कटिका की सबसे अनोखी चीज
सर्दियों में अंटार्कटिका की सबसे अनोखी चीज दिखती है. वह है सदर्न लाइट्स.
लिंडसे कहते हैं, "आप हक्के-बक्के रह जाते हैं. हरी, बैंगनी, गुलाबी और सफेद रोशनियां इतनी तेज़ी से आसमान में उड़ती हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर पाते.
अंटार्कटिका पर कोई शोर नहीं है. किसी तरह का ध्वनि प्रदूषण नहीं है. यह शांति पेंगुइन को पसंद है.
लिंडसे खुद को खुशकिस्मत समझते हैं कि उन्होंने यह सब देखा है. "यह ऐसी चीज है जिसे बहुत कम लोग देख पाते हैं. मैं बहुत भाग्यशाली हूं."
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