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'थकान से नुक़सान तो ज़रूर होगा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की ख़ासियतों में से मुझ पर जिसने सबसे अधिक असर डाला वो है खेलों से जुड़ी राष्ट्रीय पहचान का धुंधला पड़ जाना. इसमें दो राय नहीं कि वफ़ादारी पर सवालिया निशान उठाए बिना विभिन्न देशों के खिलाड़ियों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खेलते देखना अच्छा लगता है और इसका स्वागत भी किया जाना चाहिए, लेकिन मुझे नहीं पता कि जिस धन ने राष्ट्रीय झंडे की जगह ले ली है, उसका भी स्वागत होना चाहिए. पिछले साल की तरह इस बार भी कई खिलाड़ियों ने आईपीएल में खेलने को तरजीह दी है. उन्होंने ये परवाह भी नहीं की कि आईपीएल में उनके घायल हो जाने की सूरत में उनकी राष्ट्रीय टीम को बड़ा झटका लगेगा. इस मामले को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है, क्योंकि आईपीएल के लिए अलग से कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कार्यक्रम इस कदर व्यस्त है कि खिलाड़ी को अपने शरीर और दिमाग़ की थकान को दूर करने का मौक़ा मुश्किल से ही मिल पाता है. प्राथमिकता आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने इस बार खुद को आईपीएल से दूर रखा. उन्हें शायद इस बात का अहसास हो गया था कि पिछले साल आईपीएल में खेलने की वजह से ही राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन प्रभावित हुआ. फिलहाल तो कहा ही जा सकता है कि करोड़ों की चमक-दमक इन खिलाड़ियों को नहीं डिगा सकी और उन्होंने आईपीएल की अपनी टीमों की बजाय ऑस्ट्रेलियाई टीम के बेहतर प्रदर्शन को तरजीह दी. क्या किसी को भी इस पर आपत्ति हो सकती है.
इंग्लैंड के कप्तान एंड्र्यू स्ट्रॉस ने एंड्र्यू फ़्लिंटॉफ़ की चोट के लिए आईपीएल को कोसा ज़रूर, लेकिन ये भी माना कि इतनी बड़ी रकम की पेशकश को ठुकरा देना किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत मुश्किल है. इंग्लैंड अब फ़्लिंटॉफ़ के बिना ही वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ खेलने जा रहा है और बस यही उम्मीद कर सकता है कि उनका ये ऑलराउंडर टी-20 विश्व कप तक चुस्त-दुरुस्त हो जाए. भारत को शायद इन सबकी ज़्यादा परवाह नहीं है. टी-20 विश्व कप के लिए उसके खिलाड़ी बहुत पहले ही कूच कर गए हैं और दक्षिण अफ़्रीका में आईपीएल निपटाने के बाद इंग्लैंड पहुंच जाएंगे. किसी को ये जानने-समझने की भी फ़ुर्सत नहीं है कि न्यूज़ीलैंड के लौटने के बाद तुरंत दक्षिण अफ़्रीका रवाना होने वाले खिलाड़ी आख़िरकार टी-20 विश्व कप का अपना ख़िताब कायम रखने के लिए पूरी तरह चुस्त-दुरस्त हैं भी या नहीं. महेंद्र सिंह धोनी और हरभजन सिंह जब देश में होते हुए भी पद्म पुरस्कार लेने राष्ट्रपति भवन नहीं पहुंचे थे तब ज़रूर कुछ हो-हल्ला मचा था. इस पर इन खिलाड़ियों ने पारिवारिक व्यस्तता की दलील दी थी और कहा था कि क्योंकि उन्हें आईपीएल में शिरकत करने जाना है, इसलिए उनके पास परिवारवालों के साथ समय बिताने का कुछ ही समय था. इन खिलाड़ियों ने पद्म पुरस्कार लेने की बजाय आईपीएल महोत्सव में शामिल होने को तरजीह दी, भले ही इससे देश के राष्ट्रपति का अपमान ही क्यों न हो. इस घटना को देश के सोच के आईने के तौर पर भी देखा जा सकता है जो पद्म पुरस्कारों को ज़्यादा महत्व नहीं देता और आईपीएल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के 'ब्रैंड' के रूप में देखता है. भारत की टी-20 और टेस्ट टीम के इन दो स्टार खिलाड़ियों की आईपीएल में असफलता को अभी तक कोई भी उनकी शारीरिक और मानसिक थकान से नहीं जोड़ रहा है. शायद ऐसा करना अभी ज़ल्दबाज़ी होगा. लेकिन क्या भारत के क्रिकेट प्रेमियों का ये रवैया तब भी कायम रहेगा, जब ये खिलाड़ी टी-20 विश्व कप में ऐसा ही प्रदर्शन करेंगे. तब किसको दोष दिया जाएगा. हम कम से कम इतने पाखंडी तो नहीं हो सकते कि तब इस असफलता का ठीकरा आईपीएल के सर फोड़ देंगे. |
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