कॉमनवेल्थ खेल 2022 में भारतीय महिलाओं ने लॉन बॉल में जीता गोल्ड, क्या है ये खेल?

रूपा रानी तिर्की

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    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलीट्स का शानदार प्रदर्शन जारी है. महिलाओं की वीमेंस फ़ोर लॉन बॉल में भारत ने गोल्ड मेडल हासिल कर लिया है. फ़ाइनल में भारतीय महिलाओं ने दक्षिण अफ़्रीका को हराया. भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को 17-10 से मात दी.

भारत की महिलाओं ने शुरू से ही दक्षिण अफ़्रीका पर बढ़त बना ली थी. लेकिन दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वापसी की और एक समय बढ़त भी बना ली थी.

लेकिन भारतीय महिलाओं ने संयम से खेलते हुए न सिर्फ़ बढ़त बनाई, बल्कि आख़िरकार जीत भी हासिल की. सेमी फ़ाइनल में भारत ने न्यूज़ीलैंड को मात दी थी.

रविवार को एक ऐसे खेल में भारत की टीम ने मेडल सुनिश्चित किया जिसके बारे में कम लोग ही जानते हैं.

भारत की महिला लॉन बॉल टीम ने गेम के फोर्स इवेंट में न्यूज़ीलैंड को हराते हुए फ़ाइनल में जगह बनाई थी.

आखिर क्या है लॉन बॉल गेम और इसका फोर्स इवेंट कैसा होता है, जानते हैं.

फ़ाइनल में पहुँची भारतीय महिला लॉन बोल खिलाड़ी

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प्राचीन खेल

लॉन बॉल एक तरह का बोलिंग गेम है. इसकी शुरुआत इंग्लैंड में तेरहवीं शताब्दी में हुई और इसके औपचारिक नियम और क़ानून 18वीं सदी के अंत में बने.

लॉन बॉल खेल की शुरुआत भारत में 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से माना जाता है.

आज लगभग 40 देशों में ये खेल खेला जाता है. लॉन बॉल के इवेंट्स कॉमनवेल्थ गेम्स में तो होते हैं लेकिन अभी इसे ओलंपिक्स और एशियन गेम्स में जगह नहीं मिली है.

हालांकि 1966 को छोड़कर हर कॉमनवेल्थ गेम्स में इस खेल को शामिल किया गया है.

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खेल के नियम

लॉन बॉल खेल घास के मैदान या लॉन में खेला जाता है. इस खेल को सिंगल्स या टीम में खेल सकते हैं. सिंगल्स में दो खिलाड़ी आमने सामने होते हैं वहीं टीम इवेंट के फॉरमैट में 2, तीन या चार खिलाड़ियों की एक टीम बनाई जाती है. चार खिलाड़ियों का फॉरमैट फोर्स कहलाता है.

खेल की शुरुआत सिक्के के टॉस से होती है. जो टीम टॉस जीतती है उसे जैक बॉल को रोल करने का मौका मिलता है. ये एक मुख्य थ्रोइंग बॉल से छोटा बॉल होता है. टॉस जीतने वाली खिलाड़ी इसे प्लेइंग एरिया के एक एंड से दूसरे एंड की तरफ रोल करती है. जैक जहां रुकती है वही खिलाड़ियों का निशाना बन जाता है.

अब खिलाड़ियों को एक एक करके थ्रोइंग बॉल रोल करना होता है और मकसद होता है उसे जैक के सबसे करीब पंहुचाना. जितना करीब बॉल पंहुचती है, उतना ही बढ़िया अंक मिलते है. सिंगल्स इवेंट के एक फॉरमैट में जिस खिलाड़ी को पहले 25 अंक मिल जाते है वो सेट जीत जाता है. थ्रो करने पर खिलाड़ियों के बॉल प्लेइंग रिंक से बाहर जा सकते है लेकिन आखिर में उसे प्लेइंग एरिया के अंदर ही रूकना होता है नहीं तो उसे गेम से बाहर या नॉट इन प्ले माना जाता है.

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के फोर्स इवेंट में टीम के हर खिलाड़ी को हरेक एंड से 2 बॉल रोल करने का मौका मिलता है, यानी चार एंड के मुताबिक टीम के चारों खिलाड़ियों को 8-8 बॉल रोल करने का मौका मिलता है. खेल यहीं खत्म नहीं होता, फोर्स इवेंट में कुल 15 एंड के बाद अंकों में आगे रहने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है.

लॉन बॉल

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भारतीय टीम का संघर्ष

भारतीय टीम के फोर्स इवेंट में लवली चौबे (लीड में), पिंकी (सेकंड), नयनमोनी सैकिया (थर्ड) और रूपा रानी टिर्की (स्किप) पोज़ीशन में खेलती हैं.

बारह साल के छोटे से सफ़र में अब इसमें मेडल मिलना भी तय हो गया है. लेकिन भारतीय महिला टीम के लिए बर्मिंघम तक का सफ़र आसान नहीं था.

स्पॉन्सर्स के अभाव में टीम की खिलाड़ी खुद अपने पैसे से इंग्लैंड का दौरा कर रही हैं.

जहां लवली चौबे झारखंड पुलिस में कॉन्सटेबल है वहीं नयनमोनी सैकिया असम पुलिस में कॉन्स्टेबल है.

रूपा रानी टिर्की झारखंड के रामगढ़ में स्पोर्ट्स ऑफिसर है जबकि पिंकी दिल्ली के एक स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर है.

लॉन बोल

क्रिकेटर्स करते है पसंद

वैसे तो लॉन बॉल पूरी दुनिया में नहीं खेला जाता लेकिन इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के कई क्रिकेटर्स भी इस खेल को खेलते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ और मार्क वॉ भी इस खेल को अपने घरेलू मैदान में खेलते हैं.

यहां तक कि महेंद्र सिंह धोनी भी कभी कभी रांची के लॉन बॉल प्रैक्टिस मैदान पर खेलते नज़र आ चुके हैं.

उम्मीद है कि टीम के इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें और इस खेल को सरकार से भी मदद मिलेगी जिससे इसे और अधिक प्रचलित किया जा सके.

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