ओलंपिक डायरी: दुनिया के सबसे महंगे शहरों में एक टोक्यो का सिक्कों से लगाव

- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, टोक्यो से
टॉयलेट्स से लेकर वेंडिंग मशीनों तक, जापान की आला दर्जे की टेक्नॉलॉजी का मैं पूरी तरह से मुरीद हो गया हूं.
लेकिन इन सब के बीच जिस चीज़ ने मुझे हैरत में डाला है, वो है सिक्कों को लेकर जापानी लोगों का लगाव.
अब तक मुझे ये लगता था कि सिक्कों का चलन कम हो गया है.
यहां आए हुए दो हफ़्ते हो गए हैं, अपने पास पड़े सिक्कों को संभालकर रखने के लिए मुझे काफ़ी जतन करना पड़ रहा है.
इसकी वजह भी है. जापान में जो सबसे छोटा नोट चलता है, वो एक हज़ार येन का है और जो सबसे बड़ा नोट है, वो दस हज़ार येन का है. इसका मतलब ये हुआ कि 1000 येन से नीचे की जो मुद्रा है, वो सिक्कों में चलती है.

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सबसे बड़ा नोट
आप ये जान कर चौंक जाएंगे कि 500 और 100 येन यहां सिक्कों के रूप में मिलते हैं. अपने हिंदुस्तान में तो ऐसा नहीं होता है.
टोक्यो की सड़कों पर चलते हुए मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था.
मेरी जेब में पड़े एक येन से लेकर 500 येन तक के सिक्के यूं खनक रहे थे, मानो मैंने पाजेब पहन रखी हो.
मैं यहां हिंदुस्तान से आया हूं, जहां सिक्के अपनी अहमियत तक़रीबन खो चुके हैं.

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सिक्के रखने का दबाव
पांच रुपये या दस रुपये के सिक्के में भारत में आप क्या ख़रीद पाएंगे, ये बताने की ज़रूरत नहीं है.
दस रुपये या उससे ज़्यादा मूल्य के नोट हमारे यहां मिल जाते हैं, इसलिए वहां सिक्के रखने का बहुत दबाव नहीं रहता है.
लेकिन जापान में केवल छोटे सिक्कों से आपका गुज़ारा नहीं हो सकता है.
मैं भारत से टोक्यो दस हज़ार और पांच हज़ार येन के नोट लेकर आया था.
ईमानदारी से कहूं तो मैं इस बात से बहुत प्रभावित था. मैंने ख़ुद से कहा, 'आख़िर जापान का मतलब बड़ी बात होती है.'
रोज़मर्रा की चीज़ें
भारत में जो सबसे बड़ा नोट है, वो दो हज़ार रुपये का है.
इसकी शुरुआत भी पांच साल पहले 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों की बंदी के बाद हुई थी.
लेकिन पहले ही दिन मुझे झटका लग गया. मैंने पानी की दो बोतलें ख़रीदी और वेंडर को 5000 येन का नोट पकड़ाया और वेंडर ने मुझे 500, 100 और कुछ दूसरे मूल्य के सिक्के वापस लौटाए. ये देखकर मैं हैरत में पड़ गया.
मेरे पास क्रेडिट कार्ड था, लेकिन रोज़मर्रा की चीज़ें नक़दी देकर ख़रीदना पसंद करता हूं क्योंकि क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर मुझे एहसास हुआ कि मैं कुछ ज़्यादा पैसे अतिरिक्त शुल्क के नाम पर चुका रहा हूं.
यहां आने से पहले मैंने एक फ़ॉरेक्स कार्ड (विदेशों में भुगतान के काम आने वाला कार्ड) ख़रीदा था, लेकिन आप जानते हैं कि भारत में बैंक कभी-कभी किस तरह से काम करते हैं.
मैं आज तक उस फॉरेक्स कार्ड को चालू कराने के लिए संघर्ष कर रहा हूं.
इसलिए कपड़े पहनते वक़्त मुझे इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि मेरी ज़ेब में इतने पॉकेट हों कि मैं उनमें सिक्के रख सकूं.
मेरी एक सहकर्मी ने इस काम के लिए अलग से एक बटुआ रखा है.
भारतीय करेंसी
कभी-कभी मुझे यूं ही ग्रोसरी स्टोर्स पर एक्स्ट्रा स्नैक्स और दूसरी चीज़ों के लिए भटकना पड़ता है ताकि मैं अपने पास पड़े सिक्कों को कहीं खपा सकूं और कई बार मुझे ये सोचना पड़ता है कि 10, पांच और एक येन के सिक्कों से किस तरह से छुटकारा पाऊं.
ख़ैर जो भी हो, जापान इस मामले में ज़रूर दिलचस्प देश है जहां आप डॉलर और पाउंड की तुलना में कमज़ोर हमारी भारतीय करेंसी से भी ढेर सारे जापानी सिक्के इकट्ठा कर सकते हैं.
भारत का 100 रुपये का नोट यहां आपको 150 येन दिला सकता है. आपको ये बात आश्चर्यजनक नहीं लगती है?
लेकिन ये बात सिर्फ़ लगने भर की ही है. टोक्यो एक महंगा शहर है. दरअसल, ये दुनिया के सबसे महंगे शहरों में से एक है.
टोक्यो की महंगी जीवन शैली
आधा लीटर पानी का बोतल यहां 100 येन में मिलता है. सॉफ़्ट ड्रिंक या जूस का एक छोटा सा बोतल भी इतने में ही पड़ता है.
पानी और सॉफ़्ट ड्रिंक के नाम पर मेरे काफ़ी पैसे ख़र्च हो गए हैं.
मेरा दिल जीतने वाली जापान की हाई टेक्नॉलॉजी की वेंडिंग मशीनें भी मेरा ढेर सारा पैसा हजम कर गईं.
यहां आने वाले पत्रकार टोक्यो की महंगी जीवन शैली के बारे में अक्सर बातें करते मिल जाते हैं.
एक दिन एक पत्रकार ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि एक सामान्य से होटल रूम के लिए वो 16,000 येन (भारतीय मुद्रा में 10 हज़ार रुपये से ज़्यादा) प्रत्येक रात की दर से चुका रहे हैं.
लेकिन इससे भी ज़्यादा जो बात उन्हें खटक रही थी, वो टोक्यो का टैक्सी रेंट था.
उन्होंने बताया कि अपने होटल से ओलंपिक वेन्यू तक पहुंचने के लिए उन्हें 4200 येन (भारतीय मुद्दा में तकरीबन 2900 रुपये) तक चुकाना पड़ रहा है.
जबकि उनके होटल से ओलंपिक वेन्यू की दूरी केवल सात किलोमीटर है.
शुक्र है कि स्थानीय प्रशासन ने फ्ऱी शटल सर्विस का इंतज़ाम कर रखा है जिससे वे वापस अपने होटल तक जा पाते हैं.
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