जर्मन महिला टीम के 'पूरे कपड़े और नॉर्वे की टीम का 'बिकिनी विरोध' चर्चा में क्यों है?

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टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी की महिला जिम्नास्टिक टीम ने इस बार फ़ुल बॉडी सूट यानी पूरे शरीर को ढंकने वाली ड्रेस पहनकर स्पर्धा में हिस्सा लिया.
टीम की खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने ऐसा जिम्नास्टिक में महिलाओं के 'सेक्शुअलाइज़ेशन' के विरोध में और इस पर रोक लगाने के इरादे से किया.
जर्मन टीम ने कहा कि वो महिला खिलाड़ियों में अपनी पंसद और सुविधा के हिसाब से कपड़े पहनने की आज़ादी को बढ़ावा देना चाहती है.
इसी उद्देश्य से टीम की महिला जिम्नास्ट्स ने फ़ुल बॉडी सूट पहना जिसका टॉप उनकी बाहों और पेट को ढँके था और लेगिंग उनकी उनकी एड़ियों तक थी.
जर्मन टीम के इस कदम की काफ़ी तारीफ़ हो रही है. ओलंपिक जैसे स्पोर्ट्स इवेंट में उनके इस फ़ैसले ने स्पोर्ट्स की दुनिया में महिला खिलाड़ियों को सेक्शुअल नज़र से देखे जाने के मसले को एक बार फिर चर्चा का विषय बना दिया है.

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बिकिनी बॉटम न पहनने पर जुर्माना
वहीं, दूसरी ओर नॉर्वे की महिला बीच हैंडबॉल टीम पर इसलिए जुर्माना लगा दिया गया क्योंकि उन्होंने एक टूर्नामेंट के दौरान बिकिनी बॉटम्स की बजाय शॉर्ट्स पहना.
नॉर्वे की महिला टीम ने यूरोपियन बीच हैंडबॉल चैंपियनशिप के दौरान बिकिनी बॉटम पहनने से इनकार कर दिया. नतीजतन उन पर 1,295 पाउंड का जुर्माना लगाया गया.
अब बड़ी संख्या में लोग नॉर्वे की टीम के समर्थन में उतर आए हैं और खेल में महिलाओं के शरीर के प्रदर्शन के लिए उन पर दबाव बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं.
यहाँ तक कि ग्रैमी अवॉर्ड विजेता और मशहूर गायिका पिंक भी नॉर्वे की टीम के समर्थन में उतर आई हैं.
इतना ही नहीं, उन्होंने टीम की खिलाड़ियों पर लगे जुर्माने की राशि भरने का प्रस्ताव तक दे डाला.
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उन्होंने ट्वीट किया, "मुझे नॉर्वे की महिला बीच हैंडबॉल टीम पर बहुत गर्व है कि उन्होंने अपने 'यूनिफ़ॉर्म' से जुड़े बेहद सेक्सिस्ट (महिलाविरोधी) नियम का विरोध किया. असल में तो यूरोपियन हैंडबॉल फ़ेडरेशन पर सेक्सिज़्म के लिए जुर्माना लगाया जाना चाहिए. आपके लिए अच्छी बात है, लेडीज़. मुझे ख़ुशी होगी अगर मैं आप पर लगा जुर्माना भर सकूँ. इसे जारी रखिए."
पिंक के समर्थन और ट्वीट से नॉर्वे की टीम बेहद ख़ुश और चकित है.
वहीं, यूरोपियन हैंडबॉल फ़ेडरेशन ने अपने बचाव में कहा है कि नॉर्वे महिला टीम की पोशाक 'अनुचित' थी.
सोशल मीडिया पर नॉर्वे की टीम पर लगे इस जुर्माने का भारी विरोध हो रहा है. वहीं, टीम का कहना है कि वो खेल में सेक्सिस्ट नियमों का विरोध जारी रखेगी और अगले मैच में भी बिकिनी बॉटम की बजाय शॉर्ट्स ही पहनेगी.

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नया नहीं है महिला खिलाड़ियों को सेक्शुअल नज़रों से देखा जाना
स्पोर्ट्स में महिलाओं के सेक्शुअलाइज़ेशन का मुद्दा नया नहीं है.
कभी महिला खिलाड़ियों को 'कम और छोटे कपड़े' पहनने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है तो कभी उन पर बिकिनी बॉटम और शॉर्ट स्कर्ट पहनने का दबाव बनाया जाता है.
भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा ने जब शुरू में खेलना शुरू किया था तो शॉर्ट स्कर्ट पहनने की वजह से एक तबके ने उनके ख़िलाफ़ फतवा तक जारी किया था.
वहीं, साल 2011 में बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ेडरेशन ने खेल में 'ग्लैमर' लाने के लिए महिला खिलाड़ियों को शॉर्ट्स के बजाय स्कर्ट पहनने का निर्देश दिया था लेकिन विरोध का कारण उसे यह फ़ैसला वापस लेना पड़ा.
(बीबीसी न्यूज़बीट संवाददाता डैनियल रोज़्ने और मनीष पांडेय के इनपुट्स के साथ)
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