टोक्यो ओलंपिक : महिला पहलवान विनेश फोगाट और अंशु मलिक की पटखनी दिला सकती है पदक

विनेश फोगाट

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

साल 2016 में हुए रियो ओलंपिक में भारत के 117 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. यह किसी भी ओलंपिक में शामिल होने वाला तब तक का सबसे बड़ा भारतीय दल था.

रियो पहुँचने से पहले भारतीय कुश्ती टीम को तब बड़ा झटका लगा जब 74 किलो भार वर्ग के पहलवान नरसिंह पंचम यादव डोप का शिकार हो गए.

उन्हें रियो ओलंपिक में भाग लेने से तो हाथ धोना ही पड़ा उनपर चार साल का प्रतिबंध लगा.

उन्हें दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार ने ट्रायल की चुनौती दी थी. रियो जाने को लेकर मामला रोज़ गरमाता रहा.

आख़िरकार कुश्ती फेडेरेशन ने नरसिंह के नाम पर मोहर लगाई लेकिन उनका रास्ता डोपिंग ने रोक लिया. रियो में भारत के दो पुरुष पहलवानों ने फ़्री स्टाइल और दो पहलवानों ने ग्रीको रोमन शैली कुश्ती में हिस्सा लिया लेकिन सभी ख़ाली हाथ लौटे.

रियो में साक्षी मलिक ने दिलाया पहला पदक

रियो ओलंपिक के शुरू के 12 दिन बाद तक भारतीय खिलाड़ी पदक तालिका में अपना खाता भी नहीं खोल पाए थे. आख़िरकार महिला पहलवान साक्षी मलिक ने 58 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को कांस्य पदक के रूप में पहला पदक दिलाया.

साक्षी मलिक ने पहले दौर में स्वीडन की मैट्टससन को 3-1 से और दूसरे दौर में मालदोवा की मारियाना चेर्दीवारा को भी 3-1 से हराया लेकिन क्वार्टर फ़ाइनल में वह रूस की वालेरिया कोबलोवा से 1-3 से हार गईं.

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साक्षी मलिक हार से निराश थीं लेकिन कोबलोवा के फ़ाइनल में पहुँचने से उन्हें रेपचेज के माध्यम से कांस्य पदक जीतने का मौक़ा मिला जिसे उन्होंने नहीं गँवाया . साक्षी मलिक को रेपचेज के पहले मुक़ाबले में बाई मिला. इसके बाद उन्होंने दो मुकाबले जीते.

साक्षी मलिक के बाद भारत की पीवी सिंधू ने महिला बैडमिंटन में एकल वर्ग का रजत पदक जीता.

रियो में साक्षी मलिक के अलावा भारत की विनेश फोगाट भी 48 किलो भार वर्ग में उतरीं लेकिन क्वार्टर फ़ाइनल में चीन की सुन यिन से 1-5 से हार गईं. एक अन्य महिला पहलवान बबीता कुमारी भी 53 किलो भार वर्ग में पहले ही दौर में हार गईं.

अब इस बार टोक्यो ओलंपिक में भारत की चार महिला पहलवान अपना दमख़म दिखाएंगी. इनमें 50 किलो भार वर्ग में सीमा बिस्ला, 53 किलो में विनेश फोगाट, 60 किलो में अंशु मलिक और 62 किलो में सोनम मलिक शामिल है.

विनेश फोगाट

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विनेश फोगाट

टोक्यो में पदक की सबसे बड़ी दावेदार 53 किलो भार वर्ग में विनेश फोगाट है. उन्हें अपने भार वर्ग में शीर्ष वरीयता दी गई है. विनेश फोगाट ने साल 2019 में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता और ओलंपिक का टिकट भी हासिल किया. इससे पहले विनेश ने साल 2014 के ग्लासगो और 2018 के गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता.

इसके अलावा विनेश ने साल 2014 के इंचयोन एशियाई खेलों में कांस्य और साल 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया. विनेश फोगाट ने इसी साल अप्रैल महीने में अल्माटी में हुई एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप में 53 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, वह भी सभी मुक़ाबलों में बिना कोई अंक गंवाए.

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एशियन चैंपियनशिप में यह उनका पहला स्वर्ण पदक था. इससे पहले वह एशियन चैंपियनशिप में तीन रजत और चार कांस्य पदक जीत चुकी थी. विनेश फोगाट कुश्ती में किसी ख़ास परिचय की मोहताज नहीं है. भारत में फोगाट परिवार महिला कुश्ती के लिए ही जाना जाता है. विनेश फोगाट का सपना भी हर भारतीय खिलाड़ी की तरह टोक्यो में पदक जीतना ही है.

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विनेश फोगाट मीडिया की चमक दमक से दूर रहकर अभ्यास करने को प्राथमिकता देती हैं. रियो में मुक़ाबले के दौरान उनका घुटना बुरी तरह मुड़ गया था और वह कराहते हुए मैट से लौटीं थीं जिसका मलाल उन्हें आज तक है.

साल 2016 में अर्जुन पुरस्कार विनेश ने व्हीलचेयर पर बैठकर ग्रहण किया था. अगर विनेश फोगाट ने टोक्यो ओलंपिक में अपने मुक़ाबले शुरू होने तक अपनी फ़ॉर्म और फ़िटनेस को बरक़रार रखा तो वह अपने भारवर्ग में पदक जीतने की सबसे बड़ी दावेदार हैं. पाँच अगस्त को उनके मुक़ाबले होंगे और 25 अगस्त को वह अपना 27वॉ जन्मदिन मनाएँगी. टोक्यो ओलंपिक में अगर वह पदक जीतती हैं तो इससे बेहतर तोहफ़ा शायद ही वह देश और ख़ुद को दे पाएं.

सीमा बिस्ला

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सीमा बिस्ला

सीमा बिस्ला टोक्यो के लिए जगह बनाने वाली भारत की चौथी और अंतिम महिला पहलवान थी.

सीमा 50 किलो भार वर्ग में अपनी चुनौती पेश करेंगी. उन्होंने इसी साल मई में बुल्गारिया में आयोजित हुए विश्व ओलंपिक क्वालीफ़ायर्स के फ़ाइनल में पहुँचकर टोक्यो का टिकट हासिल किया. सीमा ने सेमीफ़ाइनल में यूरोपियन चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता पोलैंड की अन्ना लुकासियाक को 2-1 से हराया.

इसके बाद अल्माटी में हुई एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य पदक भी जीता. वह सेमीफ़ाइनल में उज़्बेकिस्तान की जैस्मिना इमाएवा से 2-3 से हारीं. महिला कुश्ती टीम के कोच कुलदीप मलिक, सीमा को छुपी रूस्तम मानते हैं. उनके अनुसार सीमा बिस्ला बेहद मेहनती खिलाड़ी है. सीमा बिस्ला ने साल 2018 में हुई विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में भी हिस्सा लिया था. तब वह 55 किलो भारवर्ग में उतरी थीं.

अंशु मलिक

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इमेज कैप्शन, अंशु मलिक (बाएं)

वह साल 2019 में वह 50 किलो भार वर्ग में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में पहले ही दौर में हार गई थीं. सीमा बिस्ला ने अपनी शुरुआती कुश्ती कहीं ज़्यादा वजन 67 किलो में की थी लेकिन वह 50 किलो तक पहुँच गई. ऐसा कुश्ती में बहुत कम देखने को मिलता है. रोहतक में जन्मी सीमा का परिवार भी पहलवानी से जुड़ा है. सीमा 29 साल की हैं और उनके भार वर्ग में मुक़ाबले बेहद तेज़ी के साथ खेले जाते हैं. उनका अनुभव उनके कितने काम आता है, देखना दिलचस्प होगा.

अंशु मलिक

विनेश फोगाट के बाद टोक्यो ओलंपिक में अगर किसी भारतीय महिला पहलवान को वरियता मिली है तो वह अंशु मलिक है. उन्हें सातवीं वरीयता दी गई है जो अपने आप में इशारा करती हैं कि वह पदक की कितनी बड़ी दावेदार है. अंशु मलिक को इसी साल अल्माटी में हुई एशियन ओलंपिक क्वालीफ़ायर्स कुश्ती चैम्पियनशिप में शानदार प्रदर्शन के बूते टोक्यो के लिए टिकट मिला.

अंशु मलिक (बाएं)

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57 किलो भार वर्ग में खेलने वालीं अंशु मलिक ने फ़ाइनल में पहुँचने से पहले केवल दो अंक गंवाए. केवल 19 साल की अंशु मलिक के पिता धर्मवीर मलिक ख़ुद पहलवान रहे हैं. चार अगस्त को अंशु मलिक के मुक़ाबले टोक्यो में शुरू होंगे और अगले ही दिन पाँच अगस्त को उनका जन्मदिन है. केक के साथ अगर पदक भी रखा हो तो कहना ही क्या.

जूनियर स्तर पर उन्होंने विश्व कैडेट चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक के अलावा साल 2019 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता है. विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भी साल 2018 में वह रजत पदक जीत चुकी हैं. पिछले साल हुए विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीता. ज़ाहिर है युवा पहलवान अंशु मलिक लगातार कामयाबी हासिल कर रही हैं. अगर उन्होंने टोक्यो में अपनी सातवीं वरीयता के साथ न्याय किया तो उनका पदक पक्का है.

सोनम मलिक

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इमेज कैप्शन, सोनम मलिक (नीली जर्सी)

सोनम मलिक

62 किलो भार वर्ग में बेहद सरल स्वभाव की सोनम मलिक की दुनिया जैसे कुश्ती ही है. कुश्ती के अलावा वह दूसरे सवालों के जवाब में बस मुस्कुरा के रह जाती हैं. वह केवल 18 साल की हैं और भारतीय कुश्ती दल की सबसे युवा खिलाड़ी है. उन्होंने इसी साल एशियाई ओलंपिक क्वालीफ़ायर्स के माध्यम से टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाई.

सेमीफ़ाइनल में एक समय वह कज़ाखस्तान की अयालिम कासिमोवा से 0-6 से पिछड़ रही थी लेकिन उसके बाद उन्होंने लगातार नौ अंक बनाए और फ़ाइनल में पहुंचकर कोटा सुरक्षित किया. ओलंपिक कोटा हासिल करने के बाद उनके बचपन से कोच रहे अजमेर मलिक ने कहा कि अब वह सीनियर सर्किट के लिए तैयार है.

वीडियो कैप्शन, सोनम मलिक ने कैसे हराया ओलंपिक विजेता साक्षी को?

सोनम मलिक को कोटा मिलने से पिछले ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक का टोक्यो जाने का सपना टूट गया. सोनम मलिक ने इससे पहले हुए ट्रायल में साक्षी मलिक को हराया था. अंशु मलिक के कोच अजमेर मलिक ने ख़ास बातचीत में हमें बताया कि उनकी कामयाबी का राज़ उनका कभी भी किसी बात को मना नहीं करना है.

अजमेर मलिक के अनुसार वह सर्दी गर्मी बरसात यानी हर मौसम में अभ्यास के लिए तैयार रहती है, वह भी लड़कों के साथ. अजमेर मलिक को सोनम मलिक पर तब भरोसा हुा जब उन्होंने साक्षी मलिक को हराया. पहली बार साक्षी को हराने से उन्हें हैरानी हुई लेकिन अब सोनम साक्षी को कई बार हरा चुकी है.

सोनम मलिक

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सोनम मलिक ने साल 2016 में नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और अगले ही साल 2017 में नेशनल कैडेट चैंपियनशिप में रजत, विश्व स्कूल गेम्स में स्वर्ण पदक और साल 2018 में विश्व कैडेट चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता. साल 2019 में उन्होंने विश्व कैडेट चैंपियनशिप में फिर अपनी स्वर्णिम कामयाबी दोहराई.

सोनम मलिक को साल 2017 में नसों से जुड़ी समस्या का सामना भी करना पड़ा जिससे उभरने में उन्हें डेढ़ साल लग गए. सोनम मलिक पिछले दिनों भी चोट का शिकार हो गई थीं. उम्मीद की जानी चाहिए कि सोनम मलिक पूरी तरह फ़िट होकर टोक्यो के कुश्ती मैट पर उतरे और ओलंपिक पदक जीतने का अपना सपना पूरा करें.

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