|
भुजंगासन से भागे कमर का दर्द | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भुजंगासन और तिर्यक भुजंगासन पीछे झुककर करने वाले दो मुख्य आसन हैं. ये सरल भी हैं क्योंकि ये आसन लेटकर किए जाते हैं. कमर दर्द को दूर करने और रीढ़ का कड़ापन दूर करने में इन आसनों का बहुत फ़ायदा मिलता है. भुजंग हम साँप को कहते हैं. जिस तरह से साँप अपने मुँह को उठाकर फन फैलाता है, उसी तरह भुजंगासन में हम अपने धड़ को उठाकर रखते हैं. भुजंगासन विधिः पेट के बल लेट जाएँ. दोनों पैरों को मिलाकर रखिए. सिर ज़मीन पर, आँखें खुली हुई और दोनों बाजू को कोहनी से मोड़ें और हाथों को कंधों के नीचे रखें. कोहनी बाहर की ओर न हो बल्कि शरीर के साथ लगाकर रखें. एक ही बार में साँस नहीं भरेंगे बल्कि आसन करते हुए धीरे-धीरे साँस भरेंगे. धीरे-धीरे साँस भरना शुरू करें और पहले सिर को उठाइए, गर्दन को पीछे की ओर मोड़ें. इसी तरह साँस भरते जाएँ. पीठ की माँसपेशियों का बल लगाते हुए आप कंधे भी उठाइए, हथेलियों पर थोड़ा दबाव रखते हुए छाती और नाभि तक का भार उठाना चाहिए. हर स्थिति में नाभि को ज़मीन से 30 सेंटीमीटर ही ऊपर उठना चाहिए. ज़्यादा नहीं अन्यथा कमर भी उठ जाएगी. इस स्थिति में आम तौर पर कोहनी सीधी नहीं होगी. ऐसा बलपूर्वक करना भी नहीं चाहिए अन्यथा कंधे ऊपर की ओर उठ जाएँगे. बल्कि अंत की अवस्था में कंधे पीधे की ओर खींचना चाहिए और आकाश की ओर देखना चाहिए. इस अवस्था में साँस रुकी रहेगी और कमर के निचले भाग पर खिंचाव आएगा जिसे आप महसूस कर पाएँगे. इस स्थिति में आप कुछ पल यानी 3-4 सेंकेंड तक ही रुक पाएँगे. तत्पश्चात धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए पहले नाभि ज़मीन से स्पर्श करेंगे, फिर छाती, उसके बाद कंधा और सबसे अंत में माथा ज़मीन को स्पर्श करेगा. इस प्रकार एक क्रम पूरा हुआ. साँस को सामान्य कर लें और यथाशक्ति आप इसे पाँच बार दोहरा सकते हैं. हर क्रम के बाद थोड़ा विश्राम भी कर सकते हैं. सावधानीः भुजंगासन और पीछे झुकने वाले आसन पेप्टिक अल्सर, हर्निया और हाइपर थाईरॉडियम के रोगियों को किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए अन्यथा नहीं. लाभः कमर दर्द को दूर करने में रामबाण है भुजंगासन. स्लिप डिस्क को ठीक करने में भी सहायक है. रीढ़ में कड़ापन दूर करता है. इस प्रकार मस्तिष्क और शरीर के बीच बेहतर समन्वय बना रहता है. मस्तिष्क से आने वाली तरंगे शरीर के हर अंग में बिना रुकावट के पहुँचती हैं. रीढ़, कमर और पीठ की माँसपेशियों में खिंचाव आने से मस्तिष्क और शरीर में रक्त का संचार भी अच्छे ढंग से होने लगता है. महिलाओं के लिए भी भुजंगासन विशेष उपयोगी है. तिर्यक भुजंगासन
विधिः भुजंगासन और तिर्यक भुजंगासन में थोड़ी भिन्नता है. जैसे तिर्यक भुजंगासन में दोनों पैरों में डेढ़ फुट का अंतर होता है और पैरों को ऊँगलियों के बल खड़ा करके रखते हैं. सिर और गर्दन को पीछे की ओर नहीं मोड़ते हैं बल्कि सामने की ओर देखते हुए कंधे, छाती और नाभि को ऊपर की ओर उठाते हैं, साँस भरते हुए. कुछ पल के लिए साँस रोकें और सिर बायीं ओर घुमाएँ और दाएँ पैर की एड़ी को देखने का प्रयास करें. इस स्थिति में बाएँ कंधे से लेकर दायीं कमर तक एक तिरछा खिंचाव आप महसूस करेंगे. तत्पश्चात बिना रुके गर्दन सीधी करें और सिर को दायीं ओर मोड़िए और बायीं एड़ी को देखने का प्रयास करें. बिना रुके गर्दन सीधी करें, सामने की ओर देखें तथा साँस छोड़ते हुए प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाएँ. कुछ पल बाल शयन आसन में विश्राम करें और श्वास-प्रश्वास को सामान्य कर लीजिए. तिर्यक भुजंगासन आप तीन से पाँच बार दोहरा सकत हैं. सावधानीः भुजंगासन का पूर्ण अभ्यास होने के बाद ही तिर्यक भुजंगासन करें. पेप्टिक अल्सर, हर्निया और हाइपर थाईरॉडियम के रोगियों को किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही यह आसन करना चाहिए अन्यथा नहीं. लाभः तिर्यक भुजंगासन करने से भुजंगासन के सभी लाभ मिलते हैं. इसके अलावा भूख बढ़ती है और कब्ज दूर होती है. यह पेट के सभी अंग लीवर, गुर्दे आदि की कार्यक्षमता को बनाए रखता है. थाइराईड ग्रंथि जो गले में है, उसकी कार्यक्षमता को नियमित करने में भी ये सहायक है. इस आसन से कमर दर्द दूर होता है. ख़ासकर कमर के निचले हिस्से के तनाव को यह कम करता है. पीठ की माँसपेशियों का बल बढ़ाता है और रीढ़ का कड़ापन दूर करता है. |
इससे जुड़ी ख़बरें पीठ दर्द दूर करता है 'स्फ़िंग्स आसन' 18 जुलाई, 2008 | विज्ञान मकरासन, शयनासन से कमर दर्द से राहत05 जुलाई, 2008 | विज्ञान मोटापा दूर करता है पवनमुक्तासन06 जून, 2008 | विज्ञान गंजेपन का इलाज हो सकता है आसान 03 जून, 2008 | विज्ञान मन की शांति के लिए करें 'शशांकासन'31 मई, 2008 | विज्ञान महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है 'चक्कीचालन'24 मई, 2008 | विज्ञान सिंहगर्जन आसन से निखरता है व्यक्तित्व17 मई, 2008 | विज्ञान पाचन तंत्र को मज़बूत बनाता है वज्रासन03 मई, 2008 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||