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पाचन तंत्र को मज़बूत बनाता है वज्रासन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वज्रासन अकेला ऐसा आसन है, जिसे भोजन करने के बाद किया जा सकता है, ख़ासकर दोपहर के भोजन के बाद. वज्रासन से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और उससे संबंधित रोग भी धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं. यह ध्यानात्मक आसन भी है. इसमें कुछ समय तक अपनी सुविधानुसार बैठना चाहिए. जो लोग अधिक देर तक पैर मोड़कर नहीं बैठ सकते वे वज्रासन की स्थिति में बैठकर कुछ देर तक विश्राम कर सकते हैं. कैसे करें वज्रासन
इस आसन में घुटनों को मोड़कर इस तरह से बैठते हैं कि नितंब दोनों एड़ियों के बीच में आ जाएं, दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिले रहें और एड़ियों में अंतर भी बना रहे. दोनों हाथों को घुटनों पर रखें. पीछे की ओर ज़्यादा न झुकें. शरीर को सीधा रखें ताकि संतुलन बना रहे. हाथों और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें और कुछ देर के लिए अपनी आँखें बंद कर लें. अपना ध्यान साँस की तरफ़ बनाए रखें. धीरे-धीरे आपका मन भी शांत हो जाएगा. इस आसन में पाँच मिनट तक बैठना चाहिए, ख़ासकर भोजन के बाद. ख़ास बातें नया-नया अभ्यास करने वालों को घुटनों, जंघों और टखनों में इतना खिंचाव आएगा कि वे इस आसन को करने से घबराएँगे. लेकिन धीरे-धीरे कुछ समय बाद ऐसे लोग भी आसानी से वज्रासन करने लगते हैं.
शुरुआत में एक छोटा तकिया या छोटा कंबल मोड़कर अपने नितंबों और पैरों के बीच में रखना चाहिए. इससे घुटनों और टखनों पर दबाव नहीं पड़ेगा और आसन करना आसान हो जाएगा. इस आसन को सबसे पहले 10 सेकेंड करें, फिर 20 सेकेंड तक बढ़ाएँ. कुछ दिन तक लगातार अभ्यास करने पर आप एक मिनट तक वज्रासन करने लगेंगे. वज्रासान में अगर पैरों या टखनों में अधिक खिंचाव और तनाव हो रहा हो तो दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठें और पैरों को बारी-बारी से घुटने से ऊपर नीचे हिलाएं. कुछ समय में ही आप इस तरह के दबाव से आज़ाद पाएँगे. जिनके घुटने कमज़ोर हों, जिन्हें गठिया हो या फिर जिनकी हड्डियां कमज़ोर हों, वे लोग वज्रासन न करें. वज्रासन के फ़ायदे वज्रासन से रक्त का संचार नाभि केंद्र की ओर रहता है. इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट से संबंधित रोग भी दूर होने लगते हैं. महिलाओं के लिए भी वज्रासन उपयोगी है. इससे मासिक धर्म की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. भू-नमनासन की प्रक्रिया...
कमर और रीढ़ के लिए एक बहुत उपयोगी आसन है भू-नमनासन. इसमें हम शरीर को पीछे या आगे की ओर न झुकाकर दाएँ या बाएँ घुमाते हैं. इस आसन को करने से लंबे समय तक बैठने या खड़े होने से आई थकावट दूर होती है. भू-नमनासन से रीढ़ की हड्डी का तनाव कम होता है और पीठ की थकान मिटती है. इस तरह के आसन को बाक़ी आसनों के अंत में करना चाहिए. इसके बाद प्राणायाम जैसे आसनों से मन को शांति मिलती है. कैसे करें भू-नमनासन ज़मीन पर कंबल को बिछाकर बैठ जाएं. दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर और आपस में सटा कर रखें.
शरीर को सीधा रखें. सबसे पहले साँस भरिए. कमर से ऊपर के भाग को दाईं ओर मोड़ें और दोनों हथेलियों को ज़मीन पर दाईं ओर रखें. अब साँस को छोड़ते हुए अपने सिर को ज़मीन से छूने का प्रयास करें. इस स्थिति में कुछ पल रुकें. इसके बाद साँस भरते हुए शरीर को ऊपर की ओर लाएं और साँस को छोड़ते हुए शरीर को सीधा कर लें. इसी तरह से इस प्रक्रिया को दूसरी ओर से भी करें. ख़ास बातें
भू-नमनासन करते समय अपना ध्यान पीठ और कंधे की माँसपेशियों पर लगाकर रखें. आसन के दौरान कोशिश करें कि रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और शरीर का भार हाथों पर आए. इस आसन से रीढ़ की हड्डी और कमर के निचले हिस्से पर खिंचाव आता है, जिससे तनाव कम होता है और मांसपेशियों में भी हल्कापन आता है. जब हम अधिक समय तक पैरों को मोड़कर बैठते हैं या ध्यान लगाते हैं तो एक समय के बाद थकान आने लगती है. इससे निज़ात पाने के लिए पैर को सामने की ओर फैलाकर यह आसन करने से थकावट और तनाव दूर होता है. शरीर में स्फूर्ति और ताज़गी लौट आती है. |
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