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कलाई और गले के लिए आसन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगर आप चाहते हैं कि जोड़ों में तनाव न हो तो आज के अभ्यास को वैज्ञानिक दृष्टि से कम न समझें. इस अभ्यास को आप पूरी तरह से सांस की सजगता के साथ करने से शरीर के जोड़ खुलते हैं और उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ती है. हाथ और कलाई से संबंधित अभ्यास से उन लोगों को सबसे ज़्यादा लाभ होता है जो लिखने का काम या टाइपिंग आदि ज़्यादा करते हैं. मणिबंध चक्र हाथ की कलाई को मणि कहते हैं. मुट्ठी बनाकर कलाई से गोलाकार घुमाने को मणिबंध चक्र कहते हैं. पहली अवस्था किसी भी अवस्था में बैठें, शरीर को सीधा रखिए. दाएं बाजू को कंधों की सीध में लेकर आइए और हथेली का रुख़ नीचे की ओर रखें. मु्ट्ठी बना लें, अंगूठा अंदर और अंगुलियां बाहर की ओर हों. धीरे-धीरे मुट्ठी को कलाई से गोलाकार घुमाइए. कोशिश करें कि मुट्ठी को इस प्रकार मोड़ें, पहले दाएं फिर बाएं और तब नीचे की तरफ़ ताकि मुट्ठी को कलाई से गोलाकार चलाया जा सके. ख़्याल रहे कि बाजू यानी कलाई से पीछे वाला भाग न मुड़े. इस अभ्यास को अच्छे ढंग से करने के लिए आप अपनी कलाई पर एक रुपए का सिक्का रख लीजिए. अगर बाजू मुड़ी तो सिक्का ज़मीन पर गिर जाएगा. अर्थात सिक्का ज़मीन पर नहीं गिरना चाहिए. इस प्रकार 10 बार घड़ी की दिशा में तथा 10 बार विपरीत दिशा में गोलाकार बनाइए. उसके बाद बाएं हाथ से भी अभ्यास करें. दूसरी अवस्था दोनों हाथ कंधों की सीध में लाएं, मुट्ठी बना लें. दोनों हाथों की मुट्ठी को एक ही दिशा में गोलाकार चलाएं लेकिन ध्यान रहे बाजू न मोड़ें. यह अभ्यास 10 बार दोहराएं तथा 10 बार दूसरी दिशा में भी घुमाइए. तीसरी अवस्था दोनों हाथों की मुट्ठी को एक दूसरे की विपरीत दिशा में भी घुमा सकते हैं. इस प्रकार 10 बार दोनों दिशाओं में घुमाना चाहिए. सिर्फ़ कलाई से ही घुमाना है बाजू न मुड़े. धीरे-धीरे तथा पूरी सजगता के साथ करें. विशेष बाजुओं को सीधा और तान कर रखिए. अभ्यास के दौरान सांस के प्रति सजगता बनाए रखिए. ग्रीवा संचालन (भाग-2) गर्दन के जोड़ तथा उनकी मांसपेशियों को शिथिल करने का सरलतम अभ्यास है ग्रीवा संचालन. आपको याद होगा कि हमने गर्दन से संबंधित एक अभ्यास सीखा था. आज इसका दूसरा अभ्यास सीखेंगे.
गर्दन की मांसपेशियों के तनाव को दूर करने के लिए गर्दन के सभी अभ्यास सीखने चाहिए. हां, इन छोटे-छोटे अभ्यासों के लिए ये ज़रूरी नहीं है कि आप खाली पेट हों या सुबह सवेरे ही करें. आप कभी भी आवश्यकत अनुसार इनका अभ्यास कर सकते हैं ताकि आप तनाव मुक्त रहें. आप चाहें तो ज़मीन पर दोहरा कंबल बिछकर बैठें या कुर्सी पर बैठें, बस अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें. कंधे सीधे तथा हथेलियों को घुटने पर रखिए. सजगता से सांस भरें तथा थोड़ी तेज़ी के साथ सांस निकालते हुए दायीं ओर देखिए अर्थात कंधे से पीछे देखने का प्रयास करें. दो पल रुककर दोनों कंधों को भी पीछे की ओर खींचए और तानकर रखिए. इस अवस्था में ऐसे महसूस करें कि गर्दन की मांसपेशियों का तनाव दूर हो रहा है और गर्दन के जोड़ ढीले हो रहे हैं. सहजता से सांस भरते हुए गर्दन को सीधा कर लें तथा इसी प्रकार सांस को कुछ तेज़ी से बाहर निकालते हुए बाएं कंधे से पीछे देखने का प्रयास करें. पांच बार दायीं और इतनी ही बार बायीं ओर से इसका अभ्यास करें. उसके बाद थोड़ी देर के लिए आंखें बंद करके बैठिए. गर्दन और कंधे की मांसपेशियों में हल्कापन महसूस करें. अगर आप 100 प्रतिशत लाभ चाहते हैं तो ये अभ्यास बहुत ज़रूरी है. सावधानियां- जिन्हें पहले से सरवाईकिल स्पोडिलोसिस है या ब्लड प्रेशर ज़्यादा या कम होने की शिकायत हो तो ऐसे लोग डॉक्टरी सलाह या किसी योग प्रशिक्षक की देख-रेख में ही अभ्यास करें. |
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