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अब चलने से पैदा होगी बिजली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका और कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा यंत्र बनाया है जिसे पहनकर चलने से ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी चार्ज की जा सकेगी. विज्ञान पत्रिका ‘साइंस’ में छपे इस शोध के मुताबिक़ ये एक तरह का पट्टा है जिसमें उपकरण लगा है. इसे पहनकर एक मिनट तक चलने से मोबाइल फ़ोन की बैटरी आधा घंटे के लिए चार्ज हो जाएगी. वैज्ञानिक इसे आधुनिक युग की एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं जहां बैटरी को चार्ज करने में काफ़ी ऊर्जा का इस्तेमाल होता है. पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय के डॉक्टर डगलस वेबर ने बीबीसी को बताया, “इसके लिए तंत्रिका की ऊर्जा और जोड़ों को दौड़ाने की ज़रूरत होती है.” उन्होंने कहा कि इस तरह की ऊर्जा आने वाले समय में बहुत उपयोगी साबित होगी. ऊर्जा ये यंत्र जिस प्रक्रिया के तहत ऊर्जा उत्पन्न करता है उसे “जनरेटिव ब्रेकिंग” कहते हैं. ये ठीक वैसे ही है जैसे हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कार में ऊर्जा उत्पन्न होती है. कनाडा की साइमन फ्रेज़र यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मैक्स डोनेलन ने बताया, “इसकी चाल कुछ ‘रूको-और-चलो’ की तर्ज़ पर होगी.” उन्होंने कहा कि हर क़दम में माँसपेशियाँ लगातार तेज़ गति से बढ़ेंगी और धीमी होंगी. हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कार में भी ऊर्जा इसी तरह उत्पन्न होती है. इसे ही ‘रिजनरेटिव ब्रेकिंग’ कहते हैं जहां सामान्यतया ऊर्जा ताप के रूप में नष्ट हो जाती है, यहां जनरेटर को चलाने के प्रयोग में लाई जाती है. “हम चलने में भी इसी सिद्धांत का प्रयोग करते हैं.” शोध प्रयोगों के दौरान देखा गया है कि 1.6 किलोग्राम के यंत्र धीमी चाल से 5 वाट तक बिजली पैदा करते हैं.
डॉक्टर डोनेलन ने कहा, “हमने इससे अधिक बिजली पैदा करने के रास्ते भी तलाशे हैं और चलने से अधिकतम 13 वाट बिजली उत्पन्न कर सके हैं.” उनका कहना था “13 वाट ऊर्जा एक सामान्य मोबाइल को मिनट भर चालने से 30 मिनट तक चार्ज रखने के लिए पर्याप्त है.” हालाँकि इस तरह से ऊर्जा के दोहन का यह पहला मामला नहीं है. अमरीकी रक्षा शोध एजेंसी ‘डार्पा’ के पास सैनिकों के जूतों की एड़ियों की धमक से बिजली पैदा करने की लंबी योजना है. इससे नए यंत्र की तुलना में कम ऊर्जा पैदा होती है. डॉ. डोनेलन के मुताबिक़, “उस यंत्र से इतनी उर्जा के लिए लगभग 38 किलो वज़न की जरूरत होगी.” जिस तरह के बैग सैनिक अपने साथ लेकर चलते हैं उसमें इतना वज़न अपने साथ लेकर चलना संभव नहीं होता है. डॉक्टर डोनेलन ने कहा कि ये सैनिकों के लिए भी उपयोगी होंगे जो अपने साथ जीपीएस और अंधेरे में प्रयोग करने वाले चश्मों जैसे यंत्र ले जाते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अब बिना तार बिजली....08 जून, 2007 | विज्ञान मोबाइल से गाँवों को जोड़ेगी बायोडीजल08 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान अजगर ने निगला बिजली का तार20 जुलाई, 2006 | विज्ञान देश का पहला गैसीफ़ायर पावर प्लांट 27 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान पक्षियों के लिए अँधेरे में डूब जाता है शहर06 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान सौर ऊर्जा से रोशन हैंडबैग26 सितंबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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