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सौर ऊर्जा से रोशन हैंडबैग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
किसी महिला के हैंडबैग में रखी चीज़ें हमेशा से रहस्य रही हैं और कई बार उस महिला को भी पूरी तरह पता नहीं होता वो क्या-क्या लेकर चल रही है. लेकिन ब्रिटेन में डिज़ायन किए गए एक हैंडबैग से इस समस्या पर कुछ रोशनी पड़ सकेगी. दरअसल ब्रनेल विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने एक सौर-पैनल युक्त हैंडबैग डिज़ायन किया है. यह बैग सौर ऊर्जा की सहायता से रोशन होता है और इस कारण उसमें चाभी जैसी छोटी-छोटी चीज़ों को चुटकी बजाते ढूँढ कर निकाला जा सकता है. नए हैंडबैग को सन ट्रैप नाम दिया गया है. बाहरी सतह पर लगे सोलर-सेल द्वारा जमा की गई सौर ऊर्जा अंदर लगी बैटरी में जमा होती है जिससे हैंडबैग की अंदरूनी सतह रोशन होती है. यह अंदरूनी सतह उसी तरह की विशेष सामग्री से बनी होती है जो कि मोबाइल फ़ोनों में इस्तेमाल होता है. बैग में रोशनी की व्यवस्था के लिए ज़िप का इस्तेमाल स्विच की तरह होता है. लेकिन ग़लती से बैग 15 सेकेंड से ज़्यादा देर तक खुला रहा तो रोशनी ख़ुद बंद हो जाएगी. बैग में लगी बैटरी का इस्तेमाल ज़रूरत पड़ने पर मोबाइल फ़ोन चार्ज करने के लिए भी किया जा सकता है. रोशन हैंडबैग को डिज़ायन करने वाली छात्रा रोशाना किलफिडर ने बताया, "सन ट्रैप बैग का विचार मुझे उन दोस्तों को देख कर आया जो अंधेरे में घर के दरवाज़े पर खड़े होकर बैग में चाभी ढूँढ- ढूँढ कर परेशान होती हैं." किलफिडर ने आगे बताया, "मैंने ये भी नोटिस किया कि कैसे लोग अँधेरे में बैग में चाभी ढूँढने में मोबाइल फ़ोन की रोशनी का इस्तेमाल करते हैं." यदि बारिश या ख़राब मौसम के कारण दिन में भी अँधेरा छाया रहता हो...तो भी घबराने की बात नहीं. सोलर बैग की बैटरी बिजली से भी चार्ज की जा सकती है. |
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