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अंतरिक्षयान चलाने की नई कोशिश विफल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस में सौर ऊर्जा से अंतरिक्ष यान चलाने की कोशिश नाकाम हो गई है. मंगलवार को एक रूसी पनडुब्बी से मानव रहित अंतरिक्ष यान कॉसमोस-1 को छोड़ा गया. लेकिन अंतरिक्ष में जाने के कुछ ही घंटे बाद 40 लाख डॉलर की लागत वाले इस यान से संपर्क टूट गया. रूसी और अमरीकी वैज्ञानिकों के इस साझा प्रयास को कैलिफ़ोर्निया की प्लैनेटरी सोसाइटी का समर्थन हासिल था. वैज्ञानिकों की योजना ये थी कि दो चरण में रॉकेट अंतरिक्ष यान को 840 किलोमीटर की उँचाई तक पहुँचाएगा और फिर शुरु होना था असली प्रयोग. इसमें यान के आठ पंख खुलने थे जो अलग-अलग दिशा में घूम सकते हैं. सिद्धांत ये था कि सूर्य से आने वाली किरणें जब यान के पंख तक पहुँचेगी तो उसी से धीरे-धीरे यान की गति बढ़ेगी. एक दिन में इसकी गति 100 मील प्रति घंटा होने का अनुमान लगाया गया था जो तीन साल में बढ़कर एक लाख मील प्रति घंटा हो जाने की उम्मीद थी. |
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