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गुरुवार, 23 दिसंबर, 2004 को 02:55 GMT तक के समाचार
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अंतरिक्षविज्ञानियों और खगोलविदों का साल

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प्राइवेट अंतरिक्ष यात्रा के सपने को साकार कर दिखाया स्पेसशिपवन ने
वर्ष 2004 में समाचार माध्यमों में विज्ञान जगत की घटनाएँ छाई रहीं. विज्ञान जगत की ख़बरें सुर्खियों में रहने की होड़ में अमरीकी चुनाव और इराक़ से जुड़ी ख़बरों को नियमित रूप से कड़ी टक्कर देती रहीं.

वर्ष 2004 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा जगत में कई ऐसी प्रगति हुई जो आने वाले वर्षों में हमारे लिए काफ़ी महत्वपूर्ण साबित होंगी. यह साल वैज्ञानिक समुदाय के लिए आमतौर पर सफलताओं का वर्ष साबित हुआ. हालाँकि सर्वाधिक सफलताएँ अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में सामने आईं.

स्पेसशिप वन के सफल अभियान ने साबित कर दिखाया कि अंतरिक्ष यात्रा आने वाले वर्षों में आम लोगों के लिए भी सुलभ हो सकेगी. निजी प्रयासों से निर्मित इस यान ने अक्तूबर में तीसरी बार यात्रियों के साथ अंतरिक्ष की सफल यात्रा की. इस कारनामे के बदले इसके पीछे लगी संस्था को मिला एक करोड़ डॉलर का अंसारी पुरस्कार.

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मंगल पर अतीत में पानी की मौजूदगी के पुख़्ता सबूत मिले

धरती का पड़ोसी मंगल ग्रह इस साल भी मानवीय जिज्ञासा का प्रमुख विषय बना रहा. लेकिन पहली बार वहाँ से इस बात के पुख़्ता सबूत जुटाए जा सके कि वहाँ अतीत में पानी का अस्तित्व था. धरती से परे जीवन की उम्मीदों को जगाने वाली इस खोज को अंजाम दिया अमरीकी संस्था नासा के रोबोट यानों स्पिरिट और ऑपर्च्युनिटी ने. इस कारनामे को मशहूर विज्ञान पत्रिका ने वर्ष 2004 की सबसे प्रमुख खोज का दर्जा दिया है.

मंगल पर मिथेन गैस के अस्तित्व का भी पता लगा. यह खोज की यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यान मार्स एक्सप्रेस ने. हालाँकि एजेंसी का वह मिशन नाकाम हो गया जिसके तहत ब्रितानी लैंडर बीगल-2 को मंगल की सतह पर सुरक्षित उतारा जाना था.

इस साल अमरीका और रूस दोनों ने घोषणा की कि आने वाले वर्षों में उनका मंगल पर मानव अभियान भेजने का इरादा है.

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कैसिनी यान ने शनि के वलय की अदभुत तस्वीरें भेजी

सौर मंडल में शनि ग्रह से भी कई रोचक जानकारियाँ आईं. दरअसल पहली बार कैसिनी नामक यान शनि के दो वलयों के बीच से होकर इस भारी भरकम ग्रह के पास पहुँचा. कैसिनी ने शनि की कक्षा में ख़ुद को स्थापित करने के बाद वहाँ से इस रहस्मयी ग्रह और टाइटन जैसे उसके चाँदों की विस्मयकारी तस्वीरें भेजी. इसने अब तक अज्ञात रहे शनि के दो छोटे चाँदों की भी खोज की.

वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के दसवें ग्रह को खोजने का दावा किया. नया ग्रह प्लूटो से भी आगे अवस्थित है. इसे समुद्र की देवी सेडना का नाम दिया गया है.

अमरीकी अंतरिक्ष यान स्टारडस्ट पाँच साल की यात्रा के बाद धूमकेतु वाइल्ड-2 के क़रीब पहुँचा और वहाँ मौजूद धूलकणों के नमूने समेट लिए. ये धूल कण एक कैप्सुल के रूप में सुरक्षित रहेंगे और अब से दो साल बाद 2006 में धरती तक पहुँचेंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि स्टारडस्ट द्वारा जुटाए गए धूलकणों से न सिर्फ धूमकेतुओं के बनावट के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि सौर मंडल के शुरुआती स्वरूप पर भी रोशनी पड़ सकेगी.

जर्मन और इतालवी भौतिकविदों ने तारों में होने वाली आणविक प्रतिक्रियाओं की दर को नए सिरे से मापने के बाद दावा किया कि ब्रह्मांड अब तक के अनुमानों से कहीं ज़्यादा पुराना है. उनका कहना है कि ब्रह्मांड की आयु 14.7 अरब साल है, न कि 13.7 अरब साल जैसा कि अब तक माना जाता रहा है.

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एक मीटर लंबे मानवों की 'हॉबिट' प्रजाति के अवशेष मिले

ऑस्ट्रिया और अमरीका के वैज्ञानिकों के एक दल ने टेलीट्रांस्पोर्टेशन में सफलता मिलने का दावा कर विज्ञान कथाओं के शौकीनों तक को चौंका दिया. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि अभी उन्हें परमाणु स्तर पर ही यह सफलता मिली है. उन्होंने एक परमाणु के गुणों को दूर रखे दूसरे परमाणु तक स्थांतरित कर दिखाया, वो भी दोनों परमाणुओं के बीच किसी सीधे संपर्क के बिना. हालाँकि दोनों परमाणुओं के बीच कुछ ही माइक्रोमीटर की दूरी थी, लेकिन लेज़र आधारित इस प्रयोग को टेलीट्रांस्पोर्टेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

वर्ष 2004 में विज्ञान जगत की सबसे बड़ी सफलताओं में एक रही इंडोनेशिया मिले वे मानव अवशेष जिन्हें हॉबिट मानव कहा जा रहा है. मात्र एक मीटर लंबे ये बौने मानव की बिल्कुल अलग प्रजाति के माने जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार हॉबिट मानव आजकल के तीन-चार साल के बच्चों जितनी लंबाई के होते थे और इंडोनेशिया के एक सुदूरवर्ती द्वीप पर बौने हाथियों और बड़ी-बड़ी छिपकलियों के साथ रहते थे.

पुरातत्वविदों ने इसराइल में खेती के 23 हज़ार साल पुराने सबूत ढूंढ निकाले. इसी तरह मिस्र में अलेक्ज़ेंड्रिया विश्वविद्यालय के अवशेषों को खोजा गया. फ़्रांसीसी विशेषज्ञों ने साइप्रस में बिल्लियों को पालतू बनाए जाने के 9500 साल पुराने सबूत ढूंढे. इससे पहले बिल्लियों को पालतू बनाए जाने का सबसे पुराना सबूत मात्र 5000 साल पहले का था जो मिस्र में मिला था.

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तीसरी दुनिया के एड्सरोगियों को सस्ती दवाएँ सुलभ कराने की समस्या नहीं सुलझ पाई

स्वीडन के जीव-विज्ञानियों ने यह साबित किया कि बुढ़ापे की प्रकिया कोशिका के पॉवरहाउस माने जाने वाले हिस्से माइटोकोंड्रिया में शुरू होता है. यानी जवानी को ज़्यादा दिन तक बनाए रखने के अनुसंधान अब माइटोकोंड्रिया पर केंद्रित होंगे. पूरे साल स्टेम कोशिकाओं के उपयोग के तरह-तरह के फ़ायदों से जुड़ी रिपोर्टें आती रहीं, जिनमें गंजेपन से मुक्ति और ज़्यादा उम्र में भी महिलाओं के गर्भवती होने की बढ़ी संभावनाओं की बात शामिल थीं.

वर्ष 2004 में भी एचआईवी-एड्स का आतंक दुनिया पर छाया रहा. इसके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय मुहिम ने और ज़ोर पकड़ा. हालाँकि अब भी एचआईवी के ख़िलाफ़ काम आने वाली दवाओं को तीसरी दुनिया के लोगों को सुलभ कराने का मुद्दा सुलझ नहीं पाया है. एचआईवी के ख़िलाफ़ टीके विकसित करने के काम में भी अभी वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिली है. हालाँकि इस साल दुनिया ने इस रिपोर्ट से राहत की साँस ली कि मलेरियारोधी टीके का सपना जल्दी ही हक़ीकत में बदलने वाली है.

क्लोनिंग के क्षेत्र में इस साल दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों को सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी. उन्होंने मानव भ्रूण की सफल क्लोनिंग का दावा किया. साल ख़त्म होते-होते ऑर्डर देकर बिलौटे की क्लोनिंग कराए जाने की भी ख़बर आई.

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क्योटो संधि को रूस की मंज़ूरी से दुनिया ने राहत की साँस ली

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का मुद्दा पूरे साल किसी न किसी बहाने छाया रहा. इस बात के कई पुख़्ता सबूत सामने आए कि ग्रीनहाउस गैसें धरती की जलवायु पर बुरा असर डाल रही हैं. हालाँकि इस संबंध में दो अच्छी बातें सामने आईं- पहली बात रूस का क्योटो संधि को मंज़ूरी देना, और दूसरी बात अंतरराष्ट्रीय समुदाय का 2012 में क्योटो संधि की अवधि समाप्त होने के बाद जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बातचीत जारी रखने पर सहमत होना.

धरती पर घटती जैव-विविधता को लेकर भी पूरे साल गंभीर बहसों का सिलसिला चलता रहा. हालाँकि इस साल कुछ जानवरों और चिड़ियों की नई प्रजातियाँ भी सामने आईं.

पश्चिमी अफ़्रीकी देश वर्ष 2004 में टिड्डी दल के हमले से परेशान रहे. माना जाता है कि बारिश की असामान्य घटनाओं ने टिड्डियों के फलने-फूलने के लिए माहौल तैयार किया. दूसरी ओर पूर्वी एशियाई देशों से बर्ड फ़्लू के इक्का-दुक्का मामले इस साल भी सामने आते रहे.

...और साल के अंतिम सप्ताह में हिंद महासागर की तलहटी में आए भूकंप और उसके बाद उठी सूनामी लहरों से भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया और थाइलैंड में मची तबाही की चर्चा तो आने वाले साल में भी काफ़ी समय तक होती रहेगी.

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