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तीस मानव भ्रूणों के क्लोन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने तीस मानव भ्रूणों के क्लोन तैयार करने में सफलता पाने का दावा है. उनका कहना है कि इनसे वे कोशिकाएँ मिल सकती हैं जिनका उपयोग बीमारियों के इलाज में किया जा सके. सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक वू सुक वांग और उनके सहयोगियों ने एक महिला दानदाताओं की कोशिकाएँ लेकर उनको अंडाणुओं के साथ मिलाया. इस प्रयोग से जुड़ी टीम का कहना है कि इस प्रयोग में उन्होंने 16 महिलाओं से 242 अंडाणु लिए गए. इस प्रक्रिया से जो भ्रूण बने उनके विकसित होने पर ऐसी 'स्टेम सेल्स' यानी कोशिकाएँ मिल सकती हैं जिनसे शरीर के किसी भी दूसरे हिस्से में विकसित किया जा सकता है. इस तरह की कोशिकाएँ तैयार करने का उद्देश्य किसी भी मरीज़ के शरीर के उस हिस्से में नई कोशिकाएँ रोपित करना है जहाँ कोशिकाओं ने काम करना बंद कर दिया हो. इससे 'अल्ज़मैर्स' जैसी बीमीरी का इलाज करने में कामयाबी मिल सकती है. प्रोफ़ेसर वांग का कहना है, ''क्योंकि इन कोशिकाओं में उस व्यक्ति का न्यूक्लियर जीनोम होता है इसलिए शरीर इसे बिना किसी परेशानी के स्वीकार कर सकता है और इससे इलाज आसानी से हो सकता है.'' परीक्षण दक्षिण कोरियाई वैज्ञानिकों के इस प्रयोग पर गुरुवार को अमरीकी एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ साइंसेस की वार्षिक बैठक में चर्चा भी होनी है. इससे पहले कई बार मानव भ्रूण के क्लोन तैयार करने, ख़ासकर स्टेम सेल्स तैयार करने के दावों को लेकर विवाद हो चुका है. लेकिन अब तक किसी ने भी इस तरह भ्रूण तैयार करके उसको विकसित करने में सफलता नहीं पाई थी. इस प्रयोग की पुष्टि और किसी भी पत्रिका में प्रकाशन से पहले इन प्रयोगों की किसी स्वतंत्र वैज्ञानिक से इसका परीक्षण ज़रुरी होगा. प्रोफ़ेसर वांग ने बीबीसी ऑनलाइन से कहा, ''ये अब तक के सबसे विकसित मानव भ्रूण के क्लोन हैं.'' |
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