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मानव क्लोन पर फ़ैसला दो साल बाद
संयुक्त राष्ट्र ने मानव क्लोनिंग यानी मानव की प्रतिकृति बनाए जाने से जुड़े शोधों पर रोक लगाने के बारे में अपना फ़ैसला दो साल के लिए टाल दिया है. ईरान ने इस संबंध में किसी समझौते को रोकने के लिए एक प्रस्ताव रखा था जिसपर संयुक्त राष्ट्र की क़ानूनी समिति ने मतदान के बाद निर्णय लिया. मतदान काफ़ी क़रीबी रहा और प्रस्ताव 90 के मुक़ाबले 89 मतों से ही पारित हो पाया. संवाददाताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के सभी 191 सदस्य दो खेमों में बँट गए हैं. लगभग 50 देश चाहते हैं कि ऐसे शोधों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया जाए. अमरीका विरोध करनेवाले प्रमुख देशों में शामिल है जबकि फ़्रांस और जर्मनी जैसे देश कुछ ख़ास प्रकार की क्लोनिंग का शोध होने देना चाहते हैं. मतभेद बीबीसी के विज्ञान संवाददाता का कहना है कि मानव क्लोनिंग के बारे में वार्ताओं का चक्र संयुक्त राष्ट्र में एक साल पहले शुरू हुआ था. मगर मगर कुछ बुनियादी मुद्दों पर असहमति के कारण ये बातचीत एक साल के लिए टाल दी गई. अमरीका और कोस्टारिका जैसे देश सभी तरह के मानव क्लोनिंग को रोकना चाहते हैं. वहीं कुछ देश चाहते हैं कि मानव की पूरी तरह से क्लोनिंग पर तो रोक लगा दी जानी चाहिए मगर चिकित्सा संबंधी अध्ययन के लिए मानव शरीर से जुड़ी अन्य तरह की क्लोनिंग की इज़ाज़त दे देनी चाहिए. संवाददाताओं का कहना है कि फ़ैसला टाल देने से मुख्यधारा में काम करनेवाले वैज्ञानिकों को निराशा हो सकती है. उनका मानना है कि ऐसा इसलिए होगा क्योंकि फ़ैसला टालने का मतलब ये है कि मानव क्लोन के विकास के लिए यहाँ-वहाँ ऐसे ही कोशिश करने की संभावना बनी रहेगी. |
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