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ग्रहों की परिभाषा फिर तय होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
खगोलविज्ञान जगत से अभी कुछ ही दिन पहले ख़बर आई थी कि वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के दसवें ग्रह की खोज की है. लेकिन सौर मंडल के दसवें ग्रह, सेडना की खोज के दावे के बाद, खगोलविद ग्रहों की परिभाषा तय करने की पद्धति पर पुनर्विचार कर रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय खगोलविज्ञान संघ का एक कार्यकारी दल इस बात पर सोच-विचार करेगा कि सेडना को ग्रहों की श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं. संघ का कहना है कि कार्यकारी दल एक ग्रह के न्यूनतम आकार की परिभाषा पर विचार करेगा. लेकिन इस बीच, सेडना को ग्रह नहीं समझा जाएगा. इस निष्कर्ष से प्लूटो के भी ग्रह होने का दर्जा वापस लिया जा सकता है. इसके बारे में कुछ खगोलविदों की दलील है कि प्लूटो का आकार इतना छोटा है कि इसे ग्रह कहना उचित नहीं है. प्रोफेसर इवान विलियम्स ने बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन को बताया, "अगर हम नए सिरे से ग्रहों की परिभाषा तय करने की शुरुआत करें, तो संदेह नहीं है कि प्लूटो को ग्रह नहीं माना जाएगा." "लेकिन हम लगभग 100 साल से प्लूटो को ग्रह कहते आए हैं. खगोलविदों का एक कार्यकारी दल क़ायम किया जाएगा जो इस पर विचार करेगा." समझा जाता है कि सेडना का आकार, प्लूटो के आकार का लगभग तीन-चौथाई है. सेडना की खोज करने वाले कैलीफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के डॉक्टर माइकल ब्राउन समेत अनेक खगोलविद स्वीकार करते हैं कि यह सही मायनों में ग्रह नहीं है. जब 1930 में प्लूटो की खोज हुई थी तब इसका आकार कहीं बड़ा समझा जा रहा था. लेकिन कई खगोलविदों को यह बात गवारा नहीं होगी कि प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीन लिया जाए. |
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