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मंगल पर मिथेन गैस को लेकर रोमाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों का एक वर्ग इस संभावना को लेकर उत्साहित है कि मंगल पर मिथेन गैस की उपस्थिति वहाँ जीवन होने का संकेत साबित हो सकती है. ग़ौरतलब है कि यहाँ धरती पर लगे टेलीस्कोपों ने मंगल पर मिथेन गैस होने के संकेत दिए थे, जिसकी पुष्टि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मार्स एक्सप्रेस यान ने की. मंगल पर मिथेन की कोई निश्चित मात्रा एक नियत समय तक ही बनी रह सकती है, और इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि इस गैस की लगातार आपूर्ति की कुछ व्यवस्था ज़रूर होगी. और नियमित रूप से मिथेन की आपूर्ति दो तरीके से हो सकती है- सक्रिय ज्वालामुखी या सूक्ष्म जीवाणु. अभी तक मंगल की सतह पर किसी सक्रिय ज्वालामुखी के संकेत तो मिले नहीं हैं.
धरती पर जीवाणु हाइड्रोजन और कार्बन डायऑक्साइड से मिथेन पैदा करते हैं. चूकि उन्हें इसके लिए ऑक्सीजन की ज़रूरत नहीं होती, सो अनुमान लगाया जाता है कि मंगल पर मिथेन के लिए शायद सूक्ष्ण जीवाणु ही ज़िम्मेवार हों. हाल ही मंगल की सतह पर उतारे गए दो अमरीकी रोबो यान मिथेन की पहेली को सुलझाने में मददगार नहीं हैं क्योंकि उन्हें भूगर्भीय कार्यों के लिए डिज़ायन किया गया है. अब भविष्य के मंगल अभियानों में निश्चय ही यानों में मिथेन का विश्लेषण करने वाले सेंसर लगाए जाएँगे. |
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