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होयगन्स ने भेजी चौंकाने वाली तस्वीरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
होयगन्स यान ने शनि के चाँद टाइटन की सतह की तस्वीरें भेजी हैं. तस्वीरों से वहाँ किसी तरल पदार्थ के अस्तित्व का संकेत मिलता है. तस्वीरों में सफेद सतह पर बल खाती काली लकीरें दिख रही हैं. इसमें किसी तटीय इलाक़े और गहरी घाटियों के भी लक्षण दीखते हैं. कुछ तस्वीरों में गहरे रंग के एक तरल पदार्थ का भंडार भी दिखता है. वैज्ञानिक यह तय करने में लगे हैं कि तरल पदार्थ का भंडार कोई समुद्र है या फिर किसी तैलीय पदार्थ से बनी बड़ी झील. एक तस्वीर में बिल्कुल सपाट सतह पर पत्थर की बड़ी-बड़ी चट्टानें देखी जा सकती हैं. होयगन्स ने टाइटन के वायुमंडल से उतरते हुए कोई 300 तस्वीरें भेजी हैं. इनमें से एक को छोड़कर बाकी तस्वीरें सतह से 16 किलोमीटर और आठ किलोमीटर ऊपर से खींची गई हैं जब शुक्रवार को हाइगन्स यान एक पैराशूट के सहारे नीचे उतर रहा था. इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि तस्वीरों को अभी और स्पष्ट बनाया जाएगा. वैसी स्थिति में कई चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आ सकती हैं. इससे पहले जर्मनी में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के वैज्ञानिकों ने होयगन्स यान से मिली सूचनाओं के आधार पर कहा था कि यान सफलतापूर्वक टाइटन की सतह पर उतर गया है.
धरती से इतनी दूर पहली बार कोई यान किसी सतह पर उतरा है. होयगन्स परियोजना से जुड़े ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर जॉन ज़ार्नेकी ने कहा है कि उन्हें यान के टाइटन के सतह पर उतरने का भरोसा है और उनके यंत्रों ने जो सूचनाएँ दर्द की है उससे लगता है कि होयगन्स किसी ठोस या दलदली सतह पर उतरा है. होयगन्स को लेकर कसिनी यान सात साल पहले धरती से चला था. इतने दिनों में यान ने एक अरब किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय की. अमरीका में वेस्ट वर्जीनिया स्थित ग्रीन बैंक रेडियो टेलीस्कोप ने जब सबसे पहले हाइगन्स द्वारा प्रसारित संकेतों को पकड़ा तो वैज्ञानिक समुदाय में ख़ुशी की लहर दौड़ गई. होयगन्स क्रिसमस के दिन कसिनी अंतरिक्ष यान से अलग होकर शनि के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन की तरफ बढ़ा था, और 20 दिनों से इसने चुप्पी-सी साध रखी थी. होयगन्स टाइटन के वायुमंडल और सतह से जुड़ी सारी सूचनाएँ कसिनी यान को भेज रहा है. कसिनी उन सूचनाओं को आगे धरती तक प्रसारित करने का काम कर रहा है. धरती के रहस्य होयगन्स द्वारा भेजी सूचनाओं के समन्वय का काम जर्मनी में डार्मस्टैड स्थिति यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का मॉनेटरिंग केंद्र कर रहा है. एसा के विज्ञान निदेशक डेविड साउथवुड ने कहा, "हम आज जो कुछ कर रहे हैं, उसका महत्व शताब्दियों तक रहेगा." माना जाता है कि शनि के उपग्रह टाइटन से रहस्य का पर्दा उठने से धरती पर जीवन के विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिल सकेंगी. दरअसल माना जाता है कि टाइटन की स्थिति काफ़ी कुछ उस तरह की है जैसा साढ़े चार अरब साल पहले धरती की स्थिति रही होगी. मतलब नाइट्रोजन, मिथेन और अन्य ऑर्गेनिक अवयवों की भरपूर मौजूदगी. ऐसे वातावरण का विश्लेषण कर वैज्ञानिक उन रासायनिक परिवर्तनों का रहस्य ढूंढने की कोशिश करेंगे जिनके कारण धरती पर जीवन की शुरुआत हुई है. एसा और नासा का संयुक्त अभियान यदि पूरी तरह सफल रहा तो कुछ ऐसी अभूतपूर्व तस्वीरें मिलने की उम्मीद है जो सौर मंडल में और कहीं से नहीं मिल सकतीं. |
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