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भारतीय चंद्र अभियान में यूरोप भागीदार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने अपने चंद्र अभियान में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी को साझीदार बनाया है. सोमवार को दोनों पक्षों के बीच हुए अनुबंध के अनुसार एक भारतीय यान यूरोपीय अनुसंधान उपकरणों को चंद्रमा की कक्षा में ले जाएगा. इसरो के अनुसार अनुबंध पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) के प्रमुख जी माधवन नायर और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के महानिदेशक ज्याँ ज्याक़ डोरडेन ने हस्ताक्षर किए. नायर ने पत्रकारों से कहा कि इसरो भारतीय चंद्र अभियान से अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को भी जोड़ना चाहता है. उन्होंने कहा कि चंद्रमा के ध्रुवों पर बर्फ़ की तलाश के लिए नासा के इमेजिंग उपकरण को भारतीय चंद्र यान पर जगह देने के लिए दोनों संगठनों के बीच बातचीत जारी है. महत्वाकांक्षी अभियान भारत के 2007-08 में प्रस्तावित मानवरहित चंद्र मिशन के तहत चंद्रयान-1 नामक उपग्रह को चंद्रमा की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा. चंद्रयान-1 अपने साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के तीन अनुसंधान उपकरण भी साथ ले जाएगा. ये उपकरण होंगे- ब्रिटेन में निर्मित एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर, जर्मनी में निर्मित नीयर इन्फ़्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर और चाँद पर सौर आँधियों के प्रभाव के अध्ययन के लए स्वीडन में निर्मित एक वैज्ञानिक उपकरण. चंद्रयान-1 क़रीब 100 किलोमीटर दूर रह कर चंद्रमा की परिक्रमा करेगा. बंगलोर के पास इस अभियान के लिए विशेष केंद्र का निर्माण किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी पहले से ही विभिन्न परियोजनाओं में परस्पर सहयोग कर रहे हैं. |
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