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शनिवार, 29 मार्च, 2008 को 01:52 GMT तक के समाचार
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पीठ का दर्द दूर करने के लिए स्कंध आसन
स्कंध आसन
तनाव मुक्त होकर यह आसन करना चाहिए

योग हमारे व्यक्तित्व में महत्वपूर्ण निखार लाता है. जैसे-जैसे हम शरीर से लचीले हो जाएंगे वैसे-वैसे हम उतने ही व्यवहार कुशल भी बन जाएंगे.

इसका कारण है कि हमारा मस्तिष्क और शरीर एक दूसरे के पूरक हैं.

अगर हम कुछ ऐसे अभ्यास करें जो हमारे शरीर के गठन में सुधार लाए तो निश्चित तौर पर हमारा व्यवहार भी उतना ही सहज होगा.

इसलिए हमें शुरुआत में गर्दन, कंधे, हाथ, पैर के जोड़ों आदि के सूक्ष्म अभ्यास सीखने चाहिए जो इतने आसान हैं कि कम से कम समय में भी कुशलतापूर्वक किए जा सकते हैं. मज़बूत और चौड़े कंधे तथा गर्दन हमारी चाल-ढाल पर असर डालती है. तो क्यों न इनसे संबंधित कुछ आसान सी क्रिया सीख लें.

स्कन्ध चक्र

पहली अवस्था- दाएँ बाज़ू को कोहनी से मोड़िए और दाएँ हाथ की अंगुलियों को दाएँ कंधे पर रखिए.

बायाँ हाथ बाएँ घुटने पर ही रहेगा. इस तरह स्थिति बनाते हुए दाहिने बाज़ू को कोहनी से गोलाकार चलाना है.

पहले साँस भरते हुए कोहनी को सामने से ऊपर की ओर लाने का प्रयास करें तथा साँस छोड़ते हुए पीछे की ओर से नीचे फिर सामने वापस उसी स्थान पर ले आइए.

इस प्रकार बाजू को सामने की ओर से पाँच बार तथा पाँच बार विपरीत दिशा में घुमाइए.

उसके बाद दाहिने हाथ को भी विधिपूर्वक वापस घुटने पर ले आइए. कुछ पल इस अवस्था में रुकें. साँस का ध्यान करें तथा कंधों में ढीलापन लाएँ.

इसी तरह बाएँ बाजू को भी कोहनी से पाँच बार सीधी दिशा में तथा पाँच बार विपरीत दिशा में गोलाकार चलाइए.

दूसरी अवस्था- शरीर को सीधा रखिए. दोनों बाज़ू को कंधों के सामने लाइए, अब हथेली का रुख़ आकाश की ओर कर लें.

उसके बाद दोनों बाज़ुओं को कोहनी से मोड़ें और हाथों की अंगुलियों को अपने कंधों पर रखिए.

दोनों कोहनी को छाती के सामने मिलाने का प्रयास करें. अब साँस भरते हुए दोनों बाजू को कोहनियों को सामने से उपर की ओर लाइए.

कोशिश करें कि बाजू ऊपर लाते हुए कान से स्पर्श हो जाएं.

इस प्रकार साँस छोड़ते हुए बाजू पीछे की और से गोलाकार घुमाते हुए छाती के सामने लाएँ और दोनों कोहनियों को फिर से मिलाने का प्रयास करें.

इस प्रकार एक चक्र पूरा होता है. यथाशक्ति अनुसार इसे पाँच बार दोहराइए तथा विपरीत दिशा में भी पाँच बार करें.

विशेष- बाजू को ऊपर लाते हुए साँस भरना है तथा नीचे लाते हुए साँस छोड़ना है.

गर्दन को स्थिर रखने का प्रयास करें. इसके लिए थोड़ा प्रयत्न करना होगा. ख़ासकर जब दोनों बाजुओं को आप गोलाकार घुमाते हैं.

आंखें खुली ही रखिए. चेहरे पर किसी प्रकार का तनाव न आने दें.

एकाग्रता को ख़ासतौर पर साँस पर तथा कंधे में खिंचाव की ओर रखना चाहिए.

लाभ- मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाने के बाद जो दर्द आप कंधों में महसूस करते हैं उसे इस आसन के अभ्यास से निश्चित तौर पर दूर कर सकते हैं.

आफ़िस में कम्प्यूटर पर देर तक काम करते रहने से जो पीठ और गर्दन की मांशपेशियों में तनाव होता है, स्कन्ध चक्र उसे भी कम करने में सहायक है.

जिनके कंधे सीधे नहीं हैं आर्थात छाती धंसी हुई है और कंधे आगे की तरफ़ से गोल दिखते हों, वो व्यक्ति स्कन्ध चक्र के अभ्यास से लाभ उठा सकते हैं. कुछ ही हफ़्तों में वे इसका परिणाम देख पाएंगे.

सरवाईकिल स्पीडिलॉसिस में भी सुधार लाता है...अभ्यास करके तो देखिए.

ग्रीवा संचालन

ग्रीवा गले को कहते हैं. आज ग्रीवा संचालन की पहली विधि का अभ्यास करेंगे.

विधि- सुखासन में अर्थात दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पलथी मारकर बैठें. दोनों हथेलियों को घुटने पर या जंघाओं पर रखिए.

ग्रीवासन
इस आसन को करते हुए रीढ़ को सीधा रखें

पहले साँस छोड़ते हुए गर्दन आगे की ओर झुकाइए. कोशिश करें कि ठुड्डी छाती से लग जाए अन्यथा कोई बात नहीं.

फिर साँस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर ले जाएँ तथा आकाश देखिए.

इस स्थिति में कंधों को भी पीछे की ओर खींचिए तथा गर्दन के पिछले भाग खिंचाव को महसूस कीजिए. आंखें खुली रखिए.

तत्पश्चात गर्दन सीधी कर लीजिए तथा साँस को भी सामान्य कर लें.

आप इसे 5 से 10 बार कर सकते हैं.

विशेष- बिल्कुल धीरे-धीरे साँस की सजगता के साथ इसका अभ्यास करें

साँस छोड़ते हुए गर्दन आगे झुकाएं तथा साँस भरते हुए गर्दन पीछे की ओर ले जाएं.

सावधानियां- जिन्हें गर्दन में दर्द या सरवाईकिल हो वो गर्दन आगे नहीं झुकाएंगे. वो गर्दन केवल पीछे की और झुकाएं और साँस छोड़ते हुए गर्दन सीधी कर लें.

लाभ- गर्दन के तनाव को दूर करता है अर्थात गर्दन की माँसपेशियों की अकड़न को कम करता है.

सिर के भारीपन को कम करके हल्कापन लाता है.

लगातार अभ्यास करने से गर्दन के दर्द की संभावना नहीं रहती.

(योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं)

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