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योग: पदांगुलि से पाएँ नई ऊर्जा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
योग से सजगता बढ़ती है. स्थूलता से हम सूक्ष्म की ओर बढ़ते है. कुछ योगाभ्यास भी सूक्ष्म होते है जो हमारे शरीर के जोड़, सूक्ष्म अंग तथा उनकी मांसपेशियों को स्थायी रूप से प्राण-ऊर्जा प्रदान कर सकते है. अभ्यास जितना सूक्ष्म हो, सजगता उतनी ही बढ़ जाती है. फलस्वरूप प्राण-शक्ति का अनुभव होता है जो जन्म से मृत्यु तक इस स्थूल रूपी शरीर को धारण किए रहती है. इसका अर्थ यह हुआ कि कुछ ऐसे योगाभ्यास भी सीख लिए जाएँ जो देखने और करने में सरल हो और जिसका सीधा संपर्क हमारे शारीरिक और मानसिक शांति से हो. किसा शायर ने क्या ख़ूब कहा है- 'दुनिया में दो ही शगुन दुरूस्त, अल्लाह आबरू से रखे और तंदरूस्त.' आरंभिक स्थिति आइए आज दो-तीन ऐसे अभ्यास करें जो आप कुर्सी या सोफ़े पर बैठ कर भी कर सकते हैं बशर्ते पैरों को घुटनों से सीधा रखें तथा रीढ़ की हड्डी को भी. वैसे पारंपरिक तरीके से ज़मीन पर दोहरा कंबल बिछा इसका अभ्यास करें तो बहुत बढ़िया. यह आसन पैरों के ज़रिए दिन भर थके शरीर को नई ऊर्जा देने के लिए बहुत उपयोगी है. प्रारंभिक स्थिति ज़मीन पर बैठने की विधि है. दोनों पैरों को सामने की ओर फैला कर बैठें और पैरों को आपस में मिला कर रखें. दोनों हथेलियाँ नितंब के पास रखेंगे तथा अँगुलियों का रूख़ पीछे की ओर रहेगा. कोहनियों को सीधा कर लें तथा रीढ़ की हड्डी, सिर को भी सीधा रखने का प्रयास करें. इस स्थिति में कुछ देर विश्राम कर सकते हैं. विशेष: कंधों को पीछे की और खींच कर रखना चाहिए, कंधे उठे हुए न हो. पादांगुलि नमन विधि: - आरंभिक स्थिति में बैठिए और दोनों पैरों में थोड़ा अंतर रखिए.
दोनों हथेलियों के सहारे रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने का प्रयास करें. अब दोनों पैरों की अंगुलियों के प्रति सजग हो जाएँ और अपना ध्यान पैरों की अंगुलियों की ओर लगातर रखिए. सजग हो जाने पर श्वास भरते हुए सिर्फ़ पैरों की अंगुलियों को पीछे की ओर (घुटनों की ओर) खींचिए, श्वास भरने तक अंगुलियों को खींचकर ही रखिए. थोड़ा रुकने का प्रयत्न करें. इसी प्रकार श्वास छोड़ते हुए पैरों की अंगुलियों को बाहर की ओर खींचेंगे, थोड़ी देर उसी अवस्था में रुकेंगे और चेतना पैरों की ओर लगाकर रखेंगे. इस प्रकार 10 से 15 बार दोहराइए. विशेष: श्वास भरते हुए पैरों की अंगुलियों को पीछे की ओर खींचना है और श्वास छोड़ते हुए अंगुलियों को बाहर की ओर खींचना है. पैर सीधे ही रखें, टखनों को ढीला और स्थिर रखें. सिर्फ़ पैरों की अंगुलियों को गति प्रदान करें. गुल्फ नमन विधि: यह अभ्यास भी प्रारंभिक स्थिति में बैठकर करना है. श्वास भरें और पैरों को टखनों से मोड़ते हुए अपनी ओर खींचेंगे. कुछ पल रुकिए और मांसपेशियों में खिंचाव को महसूस करें. इसके बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को बाहर की ओर खींचते हुए पैरों के तलवे को ज़मीन से लगाने का प्रयास करें. दोनों ही स्थिति में कुछ देर रुकने का प्रयास करें. इस प्रक्रिया को 10 से 15 बार दोहराइए. विशेष: श्वास भरते हुए पैरों को टखने से मोड़ते हुए अपनी ओर खींचना है तथा श्वास छोड़ते हुए बाहर की ओर. एकाग्रता श्वास के प्रति तथा पैरों के तलवे, टखने, पिंडलियाँ और पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव की ओर रखेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें योग; पूर्ण स्वानुभूति कराने का साधन 01 मार्च, 2008 | विज्ञान ताड़ासन; पूरे शरीर के लिए लाभदायक08 मार्च, 2008 | विज्ञान योग और गंगा की शरण में आईं ‘ड्रीमगर्ल’05 सितंबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस हिब्रू भाषा में अनूदित योग सूत्र22 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस पश्चिमी देशों में योग का बढ़ता कारोबार13 अक्तूबर, 2003 को | विज्ञान योग से रोग को बुलावा?12 अगस्त, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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