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शुक्रवार, 11 अप्रैल, 2008 को 14:39 GMT तक के समाचार
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गले की सुंदरता के लिए करें ग्रीवा संचालन

ग्रीवा संचालन की मुद्रा
ग्रीवा संचालन का अभ्यास कर आप अपने गले को सुंदर बना सकते हैं

गर्दन और कंधों में भारीपन लगना एक आम शिकायत है.योग से इससे छुटकारा पाया जा सकता है. ज़रूरत है तो सही समय पर कुछ पल के लिए ग्रीवा संचालन का अभ्यास करने की.

वे लोग जिनके गर्दन और ठुड्डी के नीचे अधिक चर्बी दिखाई देती है वे ग्रीवा संचालन से अपने गले को सुंदर बना सकते हैं.

कैसे करें

आप ज़मीन पर या कुर्सी पर बैठ जाएं और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें. दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें, गर्दन सीधी हो और आँखें खुली हुई हों.

सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर झुकाएं.

सांस भरते हुए गर्दन को दायीं ओर इस तरह झुकाएं जिससे कान कंधे को छू जाएं. इस दौरान कंधों को न उठाएं.

इसके बाद गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं और ऊपर की ओर देखें. इससे गर्दन के पीछे थोड़ा खिंचाव महसूस होगा. इससे गर्दन के जोड़ ढीले होंगे.

इसके बाद सांस छोड़ते हुए अपनी गर्दन को बायीं ओर लाएं. अपने कान को बाएं कंधे से सटाने का प्रयास करें. इसके बाद गर्दन सामने की ओर ले आएं और सीधी कर लें.

इसका पाँच बार दायीं ओर से और पाँच बार बायीं ओर से अभ्यास करें. इसे करते समय किसी भी तरह के तनाव में न रहें.

अपनी आँखें खुली रखें, इससे चक्कर नहीं आएगा. कंधे को खींचकर पीछे की ओर रखें.

सावधानी

इस अभ्यास को बड़े उम्र के लोग न करें. जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की बीमारी हो वे लोग किसी कुशल योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही यह अभ्यास करें.

जिन्हें सरवाइकिल स्पांडिलाइसिस की शिकायत हो वे इस अभ्यास के दौरान गर्दन को आगे की ओर न झुकाएं. ऐसे लोग अपने डाँक्टर की सलाह और कुशल योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें.

फ़ायदा

जिन लोगों को गर्दन झुकाकर लगातार काम करना पड़ता है, उन लोगों को इस अभ्यास से अधिक लाभ होगा.

इस अभ्यास से गर्दन की मांसपेशियों में आया तनाव कम होता है. इससे सिर,गर्दन और कंधों में आए भारीपन और कड़ापन से भी छुटकारा मिलता है.

रज्जु कर्णासन

रस्सी को रज्जु कहा जाता है. रज्जु कर्णासन का अर्थ है रस्सी खींचना. यह एक बहुत ही आसान आसान है. जिससे आप अपने शरीर में प्राण ऊर्जा महसूस कर सकते हैं.

रज्जु कर्णासन की मुद्रा
रज्जु कर्णासन करने से हाथों की शिथिलता दूर होती है

यह अभ्यास महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक है. इसके अभ्यास से शरीर की जीवनी-शक्ति भी बढ़ती है.

आसन

कंबल को ज़मीन पर दोहरा बिछाकर उस पर बैठ जाएं. दोनों पैरों को मिलाकर सामने की ओर फैलाकर रखें. आँखों को खुली रखें और हाथों को सामने की ओर रखें.

आप कल्पना करें कि आपके शरीर के सामने एक रस्सी लटकी हुई है.

सांस भरते हुए दाएं हाथ को ऊपर की ओर लेकर आएं. हाथ सीधे रखें, मुट्ठी बनाएं. जिससे आप रस्सी को पकड़ने की कल्पना कर सकें.

सांस छोड़ते हुए दाएं हाथ से थोड़ा ताकत लगाते हुए नीचे की ओर धीरे-धीरे खींचे, जिससे हाथ में कंपन भी महसूस हो.

दाएं हाथ से नीचे आते ही बाएं हाथ से भी अभ्यास करें. इस तरह इस अभ्यास का एक क्रम पूरा होगा.
आप एक दिन में पाँच से 10 बार इसका अभ्यास कर सकते हैं.

ध्यान रखें

दोनों हाथों से बारी-बारी से अभ्यास करें, एक साथ न करें. हाथ को सीधा रखे, कोहनी को न मोड़ें.
सांस भरते हुए हाथ को ऊपर और छोड़ते समय हाथ को नीचे की ओर ले आएं. आँख को मुट्ठी पर ही टिकाकर रखें.

एकाग्रता सांस पर और कंधों के साथ-साथ पीठ की ऊपरी माँसपेशियों पर लगाकर रखना चाहिए.खिंचाव को महसूस करें और सांस छोड़ते हुए उसे ढीला छोड़ दें.

माँसपेशियों की मालिश

इस अभ्यास को करने से हाथों की शिथिलता दूर होती है. कंधों के जोड़ों में आए भारीपन से छुटकारा मिलता है. यह आसन उन्हें ढीला करता है.

इसे करने से एक तरह से छाती की मांसपेशियों की मालिश हो जाती है.उनको ताकत भी देता है.

(योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं)

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