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मन की शांति के लिए करें 'शशांकासन' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शरीर और मन को एक साथ प्रभावित करता है शशांकासन. इसका कुछ देर तक अभ्यास करने से ही तनाव दूर हो जाता है और मन को शांति मिलती है. शशांकासन को वज्रासन की ही तरह बैठकर किया जाता है. इसलिए इसे करने से पहले वज्रासन का अभ्यास कर लेना चाहिए. यह एक ऐसा आसन है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है. अक़्सर देखा गया है कि जब हम तनाव में होते हैं तो हमें भूख नहीं लगती है. क्योंकि तनाव से पेट की माँसपेशियाँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं. इसलिए हमें कुछ ऐसे आसन भी करने चाहिए जिनसे पेट के माँसपेशियों की मालिश हो जाए. इस आसन को करते समय हमें साँस की सजगता बनाए रखनी चाहिए. कैसे लगाएँ शशांकासन कंबल को ज़मीन पर दोहरा बिछाएं. दोनों पैरों को घुटनों से इस प्रकार मोड़कर बैठें जैसे मुसलमान नमाज़ पढ़ने के लिए बैठते हैं. दोनों हाथों को घुटनों पर रखें. कमर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें. शरीर को ढीला छोड़ दें और मन को तनाव रहित रखें. साँस भरते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर से सिर के ऊपर लेकर आएँ. अपने हाथ, सिर और धड़ एक सीध में रखें. साँस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें. पहले पेट, छाती और कंधे को आगे की ओर झुकाएं और अंत में अपने सिर और हथेलियों को ज़मीन पर टिका दें. हाथों की ढीला कर दें. जिससे कोहनियाँ ज़मीन को छू जाएँ. थोड़ी देर के लिए आँखें बंद कर लें और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें. इस स्थिति में इस बात का ख़्याल रखें कि आपका नितंब एड़ी से स्पर्श करेगा. 10 सेकेंड तक इस अवस्था में रुके रहें. गहरी लंबी साँस लें और साँस छोड़ते हुए पूरे शरीर को शिथिल कर दें.
वापस आने के लिए हाथों को सीधा करें और साँस भरते हुए पूरे शरीर को कमर से एक साथ ऊपर की ओर उठाएं. इसके बाद साँस छोड़ते हुए हाथों को सामने की ओर से घुटनों पर ले आएँ. यह इस आसन की एक अवस्था है. इस प्रकार से इसे तीन बार दोहराना चाहिए. सावधानी बरतें हाई ब्लड प्रेशर और स्लिप डिस्क की समस्या वाले लोग शशांकासन न लगाएँ. शशांकासन के फ़ायदे शशांकासन करने से पेट के निचले भाग पर दबाव पड़ता है.जिससे कब्ज़ दूर होती है. इसके अलावा शरीर की अतिरिक्त चर्बी भी इसे करने से घटती है. यह आसन एड्रीनल ग्रंथी से हाने वाले स्राव को नियमित करता है. शरीर में शिथिलता लाता है, मानसिक शांति मिलती है और तनाव दूर होता है. इस आसन को करने से क्रोध पर नियंत्रण पाया जा सकता है. शशांकासन में रुकने की अवधि को तीन से पाँच तक बढ़ाते रहना चाहिए. उत्तानपादासन पेट के बल लेट जाएँ. दोनों हथेलियों को शरीर से सटा कर रखें. हथेलियों का रुख नीचे की ओर रहेगा.
साँस भरते हुए दाएँ पैर को 90 अंश तक ऊपर की ओर उठाएँ. पैर को सीधा रखने का प्रयास करें और घुटनों को न मोड़ें. बायाँ पैर सीधा और ज़मीन से सटा रहेगा. इस स्थिति में तीन से पाँच सेकंड तक रुके रहें. साँस भी रोके रखें. इसके बाद साँस छो़ड़ते हुए दाएँ पैर को धीरे-धीरे ज़मीन पर ले आएँ.यह इस आसन की एक अवस्था है. इस तरह पाँच बार दाएं पैर से और पाँच बार बाएँ पैर से करें.इसके बाद दोनों पैरों से एक साथ इस आसन को करने का प्रयास करें. इस दौरान आप अपनी शक्ति का ध्यान रखें. क्षमता बढ़ाने के लिए हर राऊंड में पैरों की ऊंचाई क्रमश : 25,35 और 45 सेमी बढ़ानी चाहिए. उत्तानपादासन के फ़ायदे उत्तानपादासन करने से पेट की माँसपेशियों में खींचाव आता है और पेट के सभी अंग नियमित रूप से काम करते हैं और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है. जिससे पाचन प्रणाली मज़बूत होती है.
यह आसन पेट कमर और नितंब की चर्बी घटाता है. पेट और कमर के निचले भाग की कसरत के लिए सबसे बढ़िया आसन है उत्तानपादासन (योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं) |
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