फ़्री डेटा ट्रांसफर करना अब हुआ और आसान

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आजकल के सभी कनेक्टेड डिवाइस में ब्लूटूथ होता है. इसका इस्तेमाल दो डिवाइस के बीच डेटा ट्रांसफर करने के लिए होता है. इसलिए ये छोटी सी चीज़ आपके बड़े काम की है.
पिछले हफ्ते ब्लूटूथ का नया वर्ज़न लॉंच किया गया जो अब उसकी कनेक्टिविटी की रेंज को पहले से कहीं बेहतर कर देगा. लॉन्च के बाद की इस <link type="page"><caption> रिपोर्ट</caption><url href="www.engadget.com/2016/06/16/bluetooth-5" platform="highweb"/></link> के मुताबिक़ उसकी रेंज अब चौगुनी हो गई है और डेटा ट्रांसफर की रफ़्तार दोगुनी. ब्लूटूथ अब पहले के मुक़ाबले आपके काफी काम की चीज़ बन गया है.
ब्लूटूथ से जुड़ी कुछ पुरानी बातों पर लोग अब भी भरोसा करते हैं. लेकिन आपके स्मार्टफोन या टैबलेट के लिए ये कैसे पहले से बेहतर काम करता है उसके बारे में बताते हैं.
अगर स्मार्टफोन या टैबलेट पर ब्लूटूथ ऑन छोड़ दिया तो बैटरी पर असर पड़ता है. ऐसा पहले होता था क्योंकि पुराने ज़माने का फ़ोन (तब स्मार्टफ़ोन नहीं होते थे) हमेशा कनेक्ट करने के लिए दूसरा डिवाइस ढूंढ़ता रहता था.
ब्लूटूथ4 के बाद अब ये 'लो एनर्जी मॉड्यूल' में काम करते हैं. इससे बैटरी पर असर अब काफी कम हो गया है. एक बार कनेक्शन होने के बाद डिवाइस नहीं के बराबर बैटरी पर काम करता है. अगर स्मार्टफोन ब्लूटूथ हेडसेट से कनेक्टेड है तो उसका असर बैटरी पर नहीं के बराबर होगा.

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ब्लूटूथ सिर्फ छोटे कमरे में काम करता है, ये बात पूरी तरह सच नहीं है. ब्लूटूथ के क्लास 3 डिवाइस पर आप 10 मीटर से कम फ़ासले तक ही कनेक्ट कर सकते हैं, क्लास 2 डिवाइस पर कनेक्टिविटी करीब 10 मीटर तक की होती है और क्लास 1 डिवाइस पर कनेक्टिविटी 100 मीटर तक की मिल जाती है.
स्मार्टफोन पर आपको क्लास 3 या 2 वाला ही ब्लूटूथ मिलेगा. ब्लूटूथ वाई फाई के सिग्नल में बाधा डालता है. ब्लूटूथ और वाई फाई के सिग्नल एक ही फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं. लेकिन इसी फ्रीक्वेंसी पर घर का माइक्रोवेव ओवन भी काम करता है.
इसलिए ब्लूटूथ या वाई फाई की स्पीड इस पर निर्भर करती है कि पास में कौन से और डिवाइस काम कर रहे हैं. किसी भी ऑफिस में दर्जनों लोग काम करते हैं लेकिन उससे कनेक्टिविटी की रफ़्तार कम नहीं हो जाती है.

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अगर आपके डिवाइस को लोग ब्लूटूथ के ज़रिये नहीं ढूंढ सकते हैं तो वो सुरक्षित होगा. ये सही नहीं है. ब्लूटूथ डिवाइस पर पासवर्ड या तो 0000 या 1234 होते हैं. इसकी वजह से कोई भी थोड़ी कोशिश करके आपके डिवाइस से कनेक्ट कर सकता है. इस पासवर्ड को बदल कर अपने काम का पासवर्ड रख लीजिए ताकि कोई आपके डिवाइस से बिना किसी वजह के कनेक्ट नहीं कर सके.
कई लोग घर के दो स्मार्टफोन के बीच में डेटा ट्रांसफर करने के लिए वाई फाई डायरेक्ट कर इस्तेमाल करते हैं. अब, जब ब्लूटूथ और बेहतर हो गया है, वाई फाई डायरेक्ट की तरह ही आपके पास एक और विकल्प है. कई बार अपने घर से पडोसी के घर तक भी आप आसानी से डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं. शुरुआत में एक बार दोनों डिवाइस को कनेक्ट कर दीजिये उसके बाद एक दूसरे से कनेक्टेड रहना काफी आसान हो जाता है.
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