सही रास्ते पर लौटा इसरो का मंगलयान

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान मंगलयान को सही पथ पर बनाए रखने के लिए उसकी गति की दिशा में सुधार किया है.

इसरो ने एक बयान में कहा है, "यान के पहले पथ सुधार कवायद (टीसीएम) को सुबह छह बजकर 30 मिनट पर पूरा कर लिया गया. इसके लिए 22 न्यूटन थ्रस्टर्स को 40.5 सेकेंड तक दागा गया. अंतरिक्ष यान इस समय पृथ्वी से करीब 29 लाख किलोमीटर की दूरी पर है."

यह कवायद अंतरिक्ष यान को लाल ग्रह की ओर सही दिशा में बनाए रखने के लिए की गई है.

इसरो ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि <link type="page"><caption> मार्स ऑर्बिटर मिशन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/12/131201_mars_orbiter_mission_dp.shtml" platform="highweb"/></link> (एमओएम) के प्रचालक अंतरिक्ष यान की गति को माप रहे हैं और आवश्यक संशोधनों के जरिए उसे सही रास्ते पर बनाए रखने का काम कर रहे हैं.

इसरो ने आगे कहा है, "इस आधार पर फाइरिंग की अवधि और डेल्टा-वी की गणना की गई, ताकि विचलन को सही किया जा सके. पथ सुधार कवायद के दौरान एमओएम के ऐक्सेलरोमीटर ने डेल्टा-वी के हासिल होने की सूचना दी."

महत्वाकांक्षी परियोजना

इसरो ने कहा कि इस कवायद को यान के कंप्यूटर ने ही पूरा किया और इस दौरान अंतरिक्ष यान तक संकेतों के जाने और वापस लौटने में कुल 20 सेकेंड का समय लगा.

इस मिशन के जरिए इस <link type="page"><caption> लाल ग्रह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/11/131114_mars_lost_evvironment_maven_mssion_rd.shtml" platform="highweb"/></link> की कक्षा तक पहुंचने की भारत की क्षमताएं साबित होंगी.

करीब 450 करोड़ रुपये की लागत वाला यह यान मंगल के वायुमंडल में मीथेन गैस का पता लगाने के साथ ही कई अन्य प्रयोग भी करेगा.

इससे पहले एक दिसंबर को यह यान मंगल ग्रह की 68 करोड़ किमी लंबी यात्रा पर निकला था. इसे 24 सितंबर 2014 को अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना है.

1350 किग्रा वज़नी मंगलयान के पांच नवंबर को प्रक्षेपित किया गया था और उसके बाद कई बार इंजन चलाकर उसकी कक्षा को बढ़ाया गया था.

<link type="page"><caption> मंगलयान की कक्षा को बढ़ाने</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/11/131112_mars_mission_snag_ml.shtml" platform="highweb"/></link> के दौरान चौथे दौर में कुछ दिक़्क़त आई थी क्योंकि तरल ईंधन थ्रस्टर में समस्या के कारण यान को अपेक्षित गति नहीं मिल पाई थी. हालांकि इस समस्या को दूर कर लिया गया.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>