पृथ्वी की कक्षा छोड़ मंगल की ओर बढ़ा यान

मंगल के रहस्यों पर से पर्दा उठाने गया भारत का महत्वाकांक्षी मंगलयान लाल ग्रह की 300 दिन की यात्रा पर निकल पड़ा है.
रविवार तड़के इस यान के मुख्य इंजन को क़रीब 20 मिनट तक चलाया गया ताकि इसे पृथ्वी की कक्षा को छोड़ने के लिए अपेक्षित गति मिल सके.
अब यह 68 करोड़ किमी लंबी यात्रा पर निकल पड़ा है और इसके 24 सितंबर 2014 को अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने का कार्यक्रम है.
मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओेएम) यानी मंगलयान इस लाल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने की भारत की क्षमताओं को साबित करेगा.
साथ ही 7.2 करोड़ डॉलर की लागत वाला यह यान मंगल के वायुमंडल में मीथेन गैस का पता लगाने के साथ ही कई अन्य प्रयोग भी करेगा.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने एमओएम एकाउंट से ट्वीट किया, "मंगलयान के पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाने का चरण समाप्त हो गया है और अब यह मंगल की यात्रा पर निकल पड़ा है."
निर्विघ्न

इसरो के प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा कि मंगलयान के पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने का अभियान निर्विघ्न संपन्न हो गया है.
1350 किग्रा वज़नी मंगलयान के पांच नवंबर को प्रक्षेपित किया गया था और उसके बाद कई बार इंजन चलाकर उसकी कक्षा को बढ़ाया गया था.
इस दौरान केवल चौथी बार मंगलयान की कक्षा को बढ़ाने में दिक़्क़त आई थी क्योंकि तरल ईंधन थ्रस्टर में समस्या के कारण यान को अपेक्षित गति नहीं मिल पाई थी.
लेकिन इसरो ने मंगलयान के सफ़र में कुछ ज़रूरी बदलाव किए हैं.
एनडीटीवी के मुताबिक़ इसरो के वैज्ञानिक सचिव वी कोटेश्वर राव ने कहा, "हमने इस सफ़र के दौरान चार बार इसका मार्ग दुरुस्त करने की योजना बनाई है. पहली बार 11 दिसंबर के आसपास ऐसा किया जाएगा. लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह किस तरह आगे बढ़ता है."
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