भारत का मंगलयान पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा

भारत के बहुप्रतीक्षित मंगलयान का मंगलवार को दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर दिया गया.
मंगलयान को पीएसएलवी-सी25 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा गया है.
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जब पीएसएलवी धुंआ उठाता हुआ उपर उठा तो अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद सभी वैज्ञानिकों की निगाहें इस पर थीं कि क्या ये राकेट सफलता पूर्वक चरणबद्ध तरीके से पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो पाएगा या नहीं.
लेकिन जैसे ही यान पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हुआ इसरो के अध्यक्ष ने पूरी टीम में शामिल सभी वैज्ञानिकों को प्रक्षेपण की सफलता की बधाई दी.

इसरो के निदेशक डॉ. राधाकृष्णन ने कहा, ''मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि यह पीएसएलवी की 25वीं उड़ान है. मैं समस्त इसरो परिवार को बधाई देता हूं, जिन्होंने बेहद कम वक्त में यह मुमकिन कर दिखाया."
भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी मंगल मिशन की सफलता पर बधाई दी. उन्होंने इसे मील का पत्थर बताया है.
आलोचना के सुर
मंगल मिशन की सफलता पर उत्साह के बीच आलोचना की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं. यह कहा जा रहा है कि जब देश ग़रीबी और भूखमरी की स्थिति का सामना कर रहा है, ऐसे हाल में मंगल अभियान पर 450-500 करोड़ रुपए खर्च करने का क्या औचित्य है?
सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मेरा मानना है कि जब भारत में रोज़ाना 23 करोड़ लोग रात में भूखे पेट सोते हैं, इनमें से अधिकांश के पास आवास, दवा, साफ़ पानी और सफ़ाई व्यवस्था की बुनियादी सुविधाएं नहीं है. ऐसे में मंगल मिशन पर भारी राशि खर्च करना, ग़रीबों के सम्मान की उपेक्षा करना है."
इसरो के पूर्व प्रमुख माधवन नायर ने भी मंगल मिशन की आलोचना की है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने उम्मीद जताई है कि 450 करोड़ रुपए के मंगल यान अभियान से मंगल के रहस्यों पर से पर्दा उठाने में मदद मिलेगी.
यान पृथ्वी की कक्षा में लगभग 25 दिनों तक रहेगा. फिर एक अंतिम तौर पर मंगलयान को 30 नवंबर को अंतरग्रहीय प्रक्षेप वक्र में भेज दिया जाएगा.
मंगल की कक्षा में

उपग्रह को मंगल की कक्षा में जाने के लिए पहले पृथ्वी की कक्षा पार करनी होगी. इसके बाद यह एक दीर्घवृत्ताकार ट्रांसफ़र ऑर्बिट से गुज़रने के बाद मंगल की कक्षा में पहुंच जाएगा.
मंगलयान को अपने मुक़ाम तक पहुंचने के लिए क़रीब तीन सौ दिन का समय लगेगा.विशेष: भारत की पहली 'मंगल यात्रा'
यह उपग्रह मंगल ग्रह के 80 हज़ार किलोमीटर के दायरे में चक्कर काटेगा. भारत के इस मंगलयान में पाँच ख़ास उपकरण मौजूद हैं. इसमें मंगल के बेहद संवेदनशील वातावरण में जीवन की निशानी मीथेन गैस का पता लगाने वाले सेंसर, एक रंगीन कैमरा और मंगल की धरती पर खनिज संपदा का पता लगाने वाले उपकरण मौजूद हैं.
इसरो ने इस यान पर नियंत्रण के लिए बंगलौर के पास डीप स्पेस नेटवर्क स्टेशन बनाया है, जहां से इस यान पर नियंत्रण रखा जाएगा और आँकड़े हासिल किए जाएंगे.
साल 1960 से अब तक 45 मंगल अभियान शुरु किए जा चुके हैं. इसमें से एक तिहाई असफल रहे हैं. अब तक कोई भी देश अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हुआ है. हालांकि भारत का दावा है कि उसका मंगल अभियान पिछ्ली आधी सदी में ग्रहों से जुड़े सारे अभियानों में सबसे कम खर्चे वाला है.
अगर भारत का मंगल मिशन कामयाब होता है तो भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की यह एक बड़ी उपलब्धि होगी.
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