भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: बैलगाड़ी से मंगल तक

भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ की थी. जब पहले उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया था तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि भारत का अंतरिक्ष यान किसी दिन मंगल के लिए जा सकेगा.

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम
इमेज कैप्शन, भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम 60 के दशक में शुरू हुआ था. ऐपल सैटेलाइट को 1981 में प्रक्षेपण के लिए बैलगाड़ी में ले जाया जा रहा है.
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम
इमेज कैप्शन, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से कई बड़े वैज्ञानिक जुड़े रहे हैं. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान दे चुके हैं. कलाम (बाएं) एक रॉकेट पर काम कर रहे हैं.
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम
इमेज कैप्शन, सबसे पहले थुंबा को रॉकेट लॉन्चिंग सेंटर के तौर पर चुना गया था. इसके पीछे वजह ये थी कि धरती की भूचुंबकीय भूमध्य रेखा थुंबा से गुज़रती है.
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इमेज कैप्शन, भारत ने पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को लॉन्च किया था. यानी मंगल यान से करीब 50 साल पहले. ये एक नाइक-अपाचे रॉकेट था और इसे अमरीका से लिया गया था.
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इमेज कैप्शन, भारत में बना पहला रॉकेट रोहिणी-75 था जिसे 20 नवंबर 1967 को लॉन्च किया गया था.
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इमेज कैप्शन, आर्यभट्ट भारत का पहला उपग्रह था. इसका वज़न सिर्फ़ 360 किलोग्राम था और इसका नाम प्राचीन भारत के खगोलविद् आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था.
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इमेज कैप्शन, आर्यभट्ट को संदेश इस तरह के एक एंटिना से भेजे जाते थे.
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इमेज कैप्शन, भास्कर-1 भारत का पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट था. इस उपग्रह का कैमरा जो तस्वीरें भेजता था उन्हें वन, पानी और सागरों के अध्ययन में इस्तेमाल किया जाता था.
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इमेज कैप्शन, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, जिसे पीएसएलवी के तौर पर जाना जाता है, इसरो का पहला ऑपरेशनल लॉन्च व्हीकल है. जुलाई 2013 तक पीएसएलवी ने लगातार 23 सफल उड़ानें भरी.
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इमेज कैप्शन, इनसैट सिरीज़ के उपग्रहों ने भारत की संचार सेवाओं को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है.
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इमेज कैप्शन, चंद्रयान का भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अहम स्थान है. चंद्रयान ने चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज की थी.
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इमेज कैप्शन, भारत 5 नवंबर को मंगल यान को प्रक्षेपित करेगा, मंगल यान 2014 में मंगल की कक्षा में पहुंचेगा.