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'कश्मीर से दस हज़ार लोग लापता' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में लापता लोगों के माता-पिता और उनके परिजनों की एक संस्था एपीडीपी के मुताबिक़ पिछले 16 सालों में क़रीब 10 हज़ार लोग लापता हुए हैं. जबकि जम्मू-कश्मीर सरकार सिर्फ़ 743 लोगों के लापता होने की बात मानती है. बीबीसी उर्दू सर्विस की ओर से श्रीनगर में लापता लोगों के लिए एक ख़ास कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस विशेष कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के मंत्री और सेना के अधिकारी और लापता लोगों के माता-पिता और परिजनों ने हिस्सा लिया. जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री मंगतराम शर्मा, क़ानून मंत्री तारीक़ हमीद करा और भारतीय सेना के प्रतिनिधि कर्नल माथुर ने एपीडीपी के आँकड़ों को मानने से इनकार कर दिया. जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री मंगतराम शर्मा ने लापता लोगों के बारे में सरकारी आँकड़े देते हुए कहा कि सरकारी एजेंसियों की ओर से उन्हें जो आँकड़े मिले हैं, उनके मुताबिक़ पुलिस या सेना की हिरासत से 108 लोग लापता हुए हैं. इनकार क़ानून मंत्री तारीक़ हमीद करा ने कहा कि पिछले 16 वर्षों में कश्मीरी समाज के लिए एक नया शब्द सामने आया है. वो है- लापता. उन्होंने कहा कि एक सोच ये है कि हज़ारों लोग लापता हो गए हैं जबकि ऐसा नहीं है. लापता लोगों के संगठन के अधिकारी परवेज़ अमरोज़ ने कहा कि घाटी और जिन इलाक़ों में आर्म्ड फ़ोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट लागू है, वहाँ कराए जाने वाले एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ 10 हज़ार लोग लापता हुए हैं. उन्होंने कहा कि कश्मीर में लापता लोगों की संख्या चीन में तिनेमन स्क्वेयर में लापता हुए लोगों या थाईलैंड में उठाए जाने वाले लोगों से भी ज़्यादा है. परवेज़ अमरोज़ ने कहा कि फ़लस्तीन में 50 सालों से जद्दोजहद जारी है लेकिन वहाँ लोग लापता नहीं होते. इस कार्यक्रम में लापता लोगों के कई रिश्तेदारों ने अपने अनुभव बताया और कहा कि उनके परिजनों के लापता होने के बाद भी पुलिस ने एफ़आईआर तक दर्ज नहीं की. लापता लोगों के इस कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों और एपीडीपी के अधिकारी के बीच इस बात पर भी मतभेद पाया गया कि कश्मीर में कितनी भारतीय सैनिक तैनात हैं. सेना की मौजूदगी परवेज़ अमरोज़ ने कहा कि एक अंदाज़े के मुताबिक़ कश्मीर में सात लाख भारतीय सैनिक मौजूद हैं. जबकि उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर में सेना के सिर्फ़ दो कोर तैनात हैं.
उन्होंने कहा कि एक कोर में 60-70 हज़ार सैनिक होते हैं. परवेज़ अमरोज़ ने पुलिस की ओर से एफ़आईआर दर्ज न करने पर कहा कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह सेना के नियंत्रण है. परवेज़ अमरोज़ ने कहा कि सेना जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं बल्कि उसकी जवाबदेही केंद्र सरकार के प्रति है. उन्होंने आरोप लगाया कि मानवाधिकार हनन के मामलों में पुलिस को ये हिदायत है कि वो मामला ही दर्ज ना करें. दूसरी ओर सैनिकों की संख्या के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कर्नल माथुर ने कहा कि वर्दी पहनने वाली सभी लोग सैनिक नहीं होते. उन्होंने कहा कि सेना कभी बिना वर्दी के कार्रवाई नहीं करती और कभी-कभी चरपमंथी भी सेना की वर्दी में कार्रवाई करते हैं. |
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