|
'कश्मीर पर कड़ा रुख़ छोड़ सकते हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू-कश्मीर के कार्यवाहक मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कहा है कि पिछले 57 सालों में पहली बार भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कश्मीर पर केंद्रित हुए हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देश कश्मीर पर अपने कड़े रुख़ को छोड़ सकते हैं क्योंकि दोनों देशों की जनता अपनी-अपनी सरकारों से चाहती है कि दोनों के रिश्ते दोस्ताना रहे. बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने ये बातें कहीं. सईद ने कहा, "इस साल सात अप्रैल को श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा का शुरू होना और भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए पाँच जगह नियंत्रण रेखा खोलने पर सहमति ये दिखाती है कि कश्मीर के लोगों को दोनों देशों के रिश्तों में महत्ता मिलने लगी है." शांति प्रक्रिया उन्होंने कहा कि ये बात जान लेना आवश्यक है कि सब चीज़ें एक बार में नहीं हो सकती. मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि वे दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया के जारी रखने पर ज़ोर दे रहे हैं. निवर्तमान मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कहा, "राजनीति संभावनाओं की कला है. अगर दोनों देश एक-दूसरे के क़रीब आ रहे हैं तो इसका मतलब ये है कि भारत और पाकिस्तान ज़मीनी सच्चाई को समझ रहे हैं." यह पूछे जाने पर कि भारत और पाकिस्तान दोनों कश्मीर को लेकर अपने रुख़ में कोई बदलाव नहीं कर रहे हैं, तो इस मसले का कैसे हल निकलेगा, मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि यह सच्चाई है लेकिन उन्हें इस बात पर भरोसा है कि नयी तस्वीर उभर सकती है. उन्होंने कहा, "यह सच्चाई है कि दोनों देशों का कश्मीर पर अपना नज़रिया है. लेकिन मेरा मानना है कि कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच ठोस प्रगति संभव है. मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में एक नयी तस्वीर उभरेगी." इस सवाल के जवाब में कि क्या नियंत्रण रेखा पर राहत शिविर खोलना ही वह सबसे बड़ी उपलब्धि है जो दोनों देश हासिल कर सकते हैं, उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं मानते. उन्होंने कहा कि इस समय माहौल बदला हुआ है और जनता नहीं चाहती कि सरकारें इससे भटक जाएँ. मुफ़्ती मोहम्मद सईद आगामी दो नवंबर को कांग्रेस के ग़ुलाम नबी आज़ाद के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं. गठबंधन सरकार बनने के समय यह तय हुआ था. अपने तीन साल के कार्यकाल के बारे में मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कहा, "हमारे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा को शुरू करना. यह 1947 के बाद पहली बार हुआ था." उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चरमपंथी घटनाएँ उतार पर हैं और उनके कार्यकाल में इन गतिविधियों को जनता का समर्थन नहीं मिला. | इससे जुड़ी ख़बरें मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने इस्तीफ़ा दिया29 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नियंत्रण रेखा सात नवंबर से खुलेगी29 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राहत कार्यों पर पैसे की कमी की मार28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बनेंगे आज़ाद 27 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस बारामूला में सुरक्षा बलों पर हमला26 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राहत राशि दोगुनी करने की अपील26 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नियंत्रण रेखा के पास राहत शिविर तैयार24 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर समस्या सुलझाने का अवसर'21 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||