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बुधवार, 26 अक्तूबर, 2005 को 07:48 GMT तक के समाचार
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राहत राशि दोगुनी करने की अपील
भूकंप से हुई तबाही
मलबे से जो लोग निकाले जा सके उनमें से बहुत से ज़ख़्मों का समय पर इलाज नहीं हो सका है
संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिण एशिया में भूकंप के पीड़ितों की सहायता के लिए दान दाता देशों से राहत राशि बढ़ाकर लगभग दोगुनी करने की अपील की है.

अब संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए 55 करोड़ डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी लेकिन इस राशि का अभी सिर्फ़ आठवाँ हिस्सा ही मिला है.

अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस और रेड क्रिसेंट ने भी अपनी अपील की राशि दोगुनी करके 11 करोड़ 70 लाख डॉलर के लिए कर दी है.

राहत राशि दोगुनी करने की यह अपील दाना दाता देशों की जेनेवा में हुई एक बैठक के मौक़े पर की गई है.

'और मौतें न हों'

दान दाता देशों की इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी हिस्सा लिया.

 त्रासदी इतनी भयानक है कि हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. हज़ारों लोग मारे गए हैं, 70 हज़ार घायल हैं और तीस हज़ार वर्ग किलोमीटर का इलाक़ा तबाह हो गया है. हम आज इसलिए मिल रहे हैं ताकि अब और लोग न मारे जाएँ
कोफ़ी अन्नान

अन्नान का कहना था, "त्रासदी इतनी भयावह है कि हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. हज़ारों लोग मारे गए हैं, 70 हज़ार घायल हैं और तीस हज़ार वर्ग किलोमीटर का इलाक़ा तबाह हो गया है. हम आज इसलिए मिल रहे हैं ताकि अब और लोग न मारे जाएँ."

संयुक्त राष्ट्र के राहत कार्यों के प्रमुख यान इग्लैंन ने कहा है कि अभी तक जो 14 हज़ार लोगों को मलबे से निकाला गया है उनमें से एक तिहाई विकलांग हो गए हैं.

इग्लैंन ने कहा कि इन लोगों को मदद के लिए बहुत लंबा इंतज़ार करना पड़ा और उनके ज़ख़्मों का इलाज समय पर नहीं किया जा सका.

इग्लैंन ने स्थिति की गंभीरता के बारे में कहा कि उन्होंने ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे.

यह बैठक ऐसे माहौल में हुई जब राहत कार्यों में लगे कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर और सहायता नहीं मिली तो हज़ारों लोग मौत का शिकार हो सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा है कि जितने लोग भूकंप से मारे गए, अब अगर सही वक़्त पर सहायता नहीं मिली तो उनसे ज़्यादा लोग मारे जा सकते हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि भूकंप से हुई तबाही का अनुमान लगभग पाँच अरब डॉलर तक हो सकता है.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा हैकि अभी तक 79 हज़ार लोगों की जान जा चुकी है.

'मदद में कोताही'

संयुक्त राष्ट्र ने पहले भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए तीस करोड़ डॉलर की और राशि की मांग की थी लेकिन अभी तक उसे सिर्फ़ उस राशि का एक चौथाई हिस्सा ही मिल पाया है.

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कल्याणकारी संस्था ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि कि दुनिया के कई अमीर देश दक्षिण एशिया में आए भूकंप के बाद मदद करने में कोताही कर रहे हैं.

भूकंप पीड़ित

ऑक्सफ़ैम का कहना है कि अब तक संयुक्त राष्ट्र की अपील पर सिर्फ़ तीस प्रतिशत धनराशि दिए जाने का वादा किया गया है.

संस्था का कहना है कि जापान, अमरीका, जर्मनी और इटली ने अपने सामर्थ्य से बहुत कम सहायता दी है जबकि फ्रांस, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और फिनलैंड जैसे कुछ देशों ने तो कुछ भी नहीं दिया है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने आर्थिक दिक्कतों पर चिंता प्रकट की थी और कहा था कि आठ लाख से अधिक लोगों का जीवन ख़तरे में पड़ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लगभग 20 प्रतिशत ज़रूरतमंद लोगों तक अब भी सहायता नहीं पहुँच पाई है.

पाकिस्तान सरकार का अनुमान है कि आठ अक्तूबर को आए भूकंप में 53 हज़ार लोग मारे गए हैं, जबकि भारत प्रशासित कश्मीर में कम से कम 1400 लोगों की मौत हुई है.

तबाही

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि भूकंप से हुई तबाही से हुआ कुल नुक़सान पाँच अरब डॉलर से भी ज़्यादा हो सकता है.

 भूकंप प्रभावित इलाक़ों में लोगों को सख़्त सर्दी में सिर्फ़ उसी सहायता के सहारे रहना पड़ेगा जो उन्हें मिल सकेगी
संयुक्त राष्ट्र राहत कार्य के प्रभारी

एक ब्रितानी अख़बार फ़िनेंशियल टाइम्स से बातचीत में परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि लगभग तीस लाख लोग बेघर हो गए हैं और उनमें से भी लगभग पाँच लाख अब भी ऐसे हैं जिन्हें किसी तरह की सहायता नहीं मिली है.

पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के राहत कार्यों के प्रभारी राशिद ख़लीकोव ने कहा,"भूकंप प्रभावित इलाक़ों में लोगों को सख़्त सर्दी में सिर्फ़ उसी सहायता के सहारे रहना पड़ेगा जो उन्हें मिल सकेगी."

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा है कि पाँच सप्ताह के भीतर इतनी सहायता सामग्री भेजे जाने की ज़रूरत है जो छह महीने तक चल सके.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने यह भी कहा कि कुछ कश्मीरी पृथकतावादी गुट प्रभावित इलाक़ों में लोगों की मदद कर रहे हैं लेकिन ये इस बात की पूरी कोशिश की जाएगी कि वे लोगों को चरमपंथी गतिविधियों की तरफ़ नहीं मोड़ें.

66तुरंत उपचार ज़रुरी
तत्काल उपचार की व्यवस्था नहीं की गई तो घायलों की हालत बिगड़ सकती है.
66कूटनीति अब भी जारी है
भूकंप के बावजूद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीति बिना रुके जारी है.
66कश्मीरियों की पीड़ा
वो दिन कब आएगा जब कोई सीमा रेखा से बटे कश्मीरियों की पीड़ा समझेगा.
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