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'कश्मीर समस्या सुलझाने का अवसर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि दक्षिण एशिया में आए भूकंप से कश्मीर समस्या को हल करने का एक नया अवसर मिला है. उन्होंने बीबीसी से विशेष बातचीत में यह बात कही. इसी के साथ ख़बर मिली है कि कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर आवाजाही आसान बनाने के राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के प्रस्ताव पर पाकिस्तान भारत को जल्द प्रस्ताव भेजेगा. महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पिछले हफ़्ते कश्मीर में नियंत्रण रेखा के आरपार आवाजाही के लिए लगे प्रतिबंधों में रियायत देने की बात कही थी. 'लिखित प्रस्ताव भेजेंगे' उनके अनुसार इसका मकसद नियंत्रण रेखा के दोनो ओर कश्मीरियों को अपने रिश्तेदारों को मिलने देना और पुनर्निर्माण में मदद करने देना था. भारत ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के सुझाव का सतर्कतापूर्ण स्वागत किया था लेकिन राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का कहना था कि दोनो देशों को एक-दूसरे पर विश्वास करना होगा नहीं तो कुछ हासिल नहीं होगा. उन्होंने दोहराया कि उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बारे में ईमानदार हैं. उधर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तस्नीम अस्लम ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान भारत को भेजे जाने वाले सुझावों पर काम कर रहा है और उन्हें जल्द ही भारत को लिखित रूप में भेजा जाएगा. 'ठोस व्यवहारिक प्रस्ताव' बीबीसी संवाददाता सीमा चिश्ती का कहना है कि इन सुझावों पर भारत के राजनीतिक हल्कों में ज़्यादा हलचल तो नहीं है.
उनके अनुसार इसका एक कारण हाल में पाकिस्तान का बयान कि 'भारतीय हेलिकॉप्टर तो राहत कार्य के लिए ले सकते हैं लेकिन चालकों को पाकिस्तान नहीं आने देंगे' को भारत में अच्छा नहीं समझा गया. सीमा चिश्ती के अनुसार दूसरा कारण ये है कि कश्मीर में हाल में हिंसा बढ़ी है और जम्मू-कश्मीर के मंत्री ग़ुलाम नबी लोन की हत्या के बाद सुरक्षा एक चिंता का विषय बन गई है. उनका मानना है कि इस पूरे मामले में बात आगे तब बढ़ेगी जब पाकिस्तान की ओर से कोई ठोस व्यवहारिक प्रस्ताव भारत की सरकार को मिलेगा. |
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