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पाकिस्तान को इसराइली मदद मंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि वह भूकंप पीड़ितों के लिए इसराइल की तरफ़ से पेश की गई राहत स्वीकार करने के लिए तैयार है. इसराइली विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता मार्क रीगेव ने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी यह तय करेंगे कि भूकंप प्रभावित क्षेत्र में किन विशेषज्ञों के दल और क्या-क्या उपकरण भेजे जाएँ. लंदन से प्रकाशित अख़बार फ़िनेंशियल टाइम्स के अनुसार इसराइली प्रवक्ता ने कहा कि इसराइल ने भूकंप आने के तुरंत बाद ही सहायता की पेशकश की लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से शुक्रवार को ही यह संदेश मिला कि वह इसराइली सहायता को मंज़ूर कर सकता है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "अगर इसराइल सहायता करना चाहता है तो हमें कोई ऐतराज़ नहीं है." हालाँकि प्रवक्ता ने इसराइल से कोई भी राहत सामग्री सीधे देश में पहुँचने पर इनकार किया और कहा कि इसराइल बहुदेशीय सहायता में ही शामिल हो सकता है. तसनीम असलम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने भूकंप पीड़ितों के लिए सहायता की अपील की है और ऐसी संभावना है कि इसराइल राहत कोष में कुछ धन देगा. प्रवक्ता ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस सोसायटी भी राहत राशि और सामग्री इकट्ठा कर रही है और अगर इसराइल चाहे तो उसमें योगदान दे सकता है." दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं और पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा. पाकिस्तान और इसराइल के विदेश मंत्रियों ने सितंबर में तुर्की में मुलाक़ात की थी जो काफ़ी चर्चा में रही थी और इस मुलाक़ात को दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक क़दम बताया गया था. उसके एक सप्ताह बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन के मौक़े पर हाथ मिलाकर एक दूसरे का अभिवादन किया था. भूकंप से हुई तबाही से उबरने में इसराइल की मदद स्वीकार करने पर पाकिस्तान की इस्लामी पार्टियाँ ऐतराज़ कर सकती हैं. |
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