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'इसराइल से संबंध पाकिस्तान के हित में' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने कहा है कि इसराइल के साथ संबंध स्थापित करने का फ़ैसला पाकिस्तान के राष्ट्रीय हित में है. उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टियों ने इसराइल के साथ हुई पाकिस्तान की पहली औपचारिक वार्ता के विरोध में शुक्रवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया. इस मुद्दे पर संसद में एक बहस में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री अज़ीज़ ने कहा कि इसराइल के साथ संबंध स्थापित करने का फ़ैसला देश के साथ-साथ संपूर्ण मुस्लिम जगत के हित में है. उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया कि पाकिस्तान की मध्य-पूर्व संबंधी नीति में कोई बदलाव आया है. अज़ीज़ ने कहा कि इसराइल से संबंध की भूमिका फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान तैयार हुई थी. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के अनुसार अब्बास ने दो महीने पहले इस्लामाबाद यात्रा के दौरान राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और अन्य नेताओं से अपनी बातचीत में आग्रह किया था कि पाकिस्तान को इसराइली-फ़लस्तीनी विवाद में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. विरोध पाकिस्तान की कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टियों ने इसराइल के साथ हुई पाकिस्तान की पहली औपचारिक वार्ता के विरोध में शुक्रवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया.
छह धार्मिक पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल ने कहा है कि उसके समर्थक विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी के स्वदेश लौटने पर उनका विरोध करेंगे. उल्लेखनीय है कि गुरुवार को तुर्की के शहर इस्तांबुल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी और इसराइल के विदेश मंत्री सिल्वन शैलोम के बीच मुलाक़ात हुई थी. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ एमएमए के प्रवक्ता अमीर उल अज़ीम ने कहा, "हम लोगों से अपील करते हैं कि वे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लें ताकि सरकार को बताया जा सके कि हम उन्हें इसराइल को मान्यता देने की अनुमति नहीं देने देंगे." समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार एमएमए के अध्यक्ष क़ाज़ी हुसैन अहमद ने कहा है कि इसराइल के साथ विचार-विमर्श करना राष्ट्रीय हित और मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ है. फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास ने भी इस बैठक की आलोचना की है. हमास के नेता हसन युसूफ़ ने कहा, "हम किसी भी इस्लामी देश और इसराइल के बीच रिश्ते की आलोचना करते हैं. हम पाकिस्तान से उम्मीद रखते हैं कि वह अपने पुराने रुख़ पर क़ायम रहे क्योंकि फ़लस्तीनी लोगों को उनके अधिकार अभी भी नहीं मिले हैं." गुरुवार को तुर्की की मध्यस्थता से हुई विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री कसूरी ने कहा कि ग़ज़ा से इसराइल की वापसी के बाद उनके देश ने इसराइल के साथ संपर्क करने का फ़ैसला किया. इसराइल के विदेश मंत्री सिल्वन शैलोम ने इस बातचीत को ऐतिहासिक कहा. इसराइली रेडियो से बातचीत में शैलोम ने कहा, "हम एक महत्वपूर्ण बैठक के बारे में बात कर रहे हैं जो पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्तों को लेकर ही नहीं है बल्कि पूरे मुस्लिम जगत के लिए है." |
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