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भारत-इसराइल ने फ़ाल्कन सौदे पर दस्तख़त किए
भारत ने इसराइल और रूस के साथ फ़ाल्कन रडार सिस्टम के सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. शुक्रवार को नई दिल्ली में एक रक्षा प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी. अमरीका ने पिछले दिनों ये स्पष्ट कर दिया था कि उसे भारत और इसराइल के बीच फ़ाल्कन रडार सिस्टम के सौदे पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन पाकिस्तान ने इस सौदे पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे भारत और पाकिस्तान के बीच सैनिक संतुलन बिगड़ जाएगा. फ़ाल्कन राडार सिस्टम विमानों पर लगाए जाते हैं जिनसे हमले का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है. नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता अमिताभ चक्रवर्ती ने बताया, "भारत ने इसराइल और रूस दोनों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत को फ़ाल्कन रडार सिस्टम मिल जाएगा." भारत की ओर से विदेश सचिव अजय प्रसाद ने इस समझौते पर दस्तख़त किए. भारत और इसराइल के बीच फ़ाल्कन ख़रीद पर समझौता इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की भारत यात्रा के क़रीब एक महीने बाद हुआ है. समझौता
समझौते के बाद भारत रूसी इलिशिन-76 कार्गो विमान पर फ़ाल्कन रडार सिस्टम लगा सकेगा. हाल के वर्षों में इसराइल रूस के बाद भारत को रक्षा सामग्री देने वाले दूसरा बड़ा देश बन गया है. 2001 में भारत और इसराइल के बीच 60 अरब रुपए के रक्षा सौदे हुए हैं. भारत इसराइल से एक अरब डॉलर के फ़ाल्कन राडार सिस्टम ख़रीदना चाहता था. जानकारों के अनुसार शुरू में अमरीका को इस सौदे पर आपत्ति थी. लेकिन अगस्त में अमरीका ने इस सौदे को हरी झंडी दे दी थी. अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता फ़िलिप रीकर ने कहा था कि अमरीका ने भारत और इसराइल की सरकारों को ये सूचित कर दिया है कि उसे फ़ाल्कन राडार सिस्टम के सौदे पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा था कि इस सौदे से भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संतुलन बिगड़ जाएगा. पाकिस्तान का यह भी कहना है कि फ़ाल्कन राडार सिस्टम सौदे से दोनों पड़ोसी देशों के बीच परमाणु असंतुलन भी प्रभावित होने का ख़तरा है. |
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