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'एक बड़ा झटका अभी आना बचा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले शनिवार को आए भूकंप की तबाही की ख़बरें आने अभी बंद नहीं हुई हैं लेकिन एक चेतावनी और आ गई है कि अभी एक बड़ा भूकंप आना बचा है. और ये चेतावनी आई है कोलोराडो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर रोजर बिलहैम की ओर से जो तीन दशकों से ज़्यादा समय से भूकंप का अध्ययन कर रहे हैं. उनका कहना है कि चूंकि भूकंप की पूर्व सूचना देना संभव नहीं है इसलिए ये तो नहीं बताया जा सकता कि ये बड़ा भूकंप कब आएगा लेकिन ये बताना कठिन नहीं हैं कि परिस्थियाँ एक बड़े भूकंप के लिए तैयार हैं. वे कहते हैं, "बड़े भूकंप एक से अधिक भी आ सकते हैं." जैसा कि प्रोफ़ेसर बिलहैम का अध्ययन कहता है कि ये भूकंप हिमालय से नीचे गंगा के किनारे बसे इलाक़ों में आएगा और भूकंप के इतिहास के लिहाज से देखें तो इसकी तीव्रता 8.5 से अधिक भी हो सकती है. बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में प्रोफ़ेसर बिलहैम ने कहा, "इससे होने वाले नुक़सान का अनुमान लगाना कठिन है क्योंकि यह तो इस पर निर्भर करेगा कि भूकंप का केंद्र सतह से कितने नीचे है." इस अनुमान का कारण पूछने पर उन्होंने बताया, "आसान शब्दों में कहें तो भारत को एक द्वीप की तरह है जो लगातार दक्षिणी तिब्बत की ओर ख़िसक रहा है और जिस दिन इसकी संभावना ख़त्म हो जाएगी उस दिन एक बड़ा भूकंप आएगा." चेतावनी प्रोफ़ेसर बिलहैम का कहना है कि वे भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं कि वैज्ञानिक अब तक भूकंप की कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते. उनका कहना है कि जिन भूगर्भीय गतिविधियों के कारण भूकंप आते हैं उसके चलते यह असंभव हो जाता है कि सतह पर बैठकर इसका अनुमान लगा जा सके. उनका कहना था कि पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर भीतर तक खुदाई करना संभव नहीं है और यदि कहीं ऐसा कर भी लिया जाए तो वहाँ उपकरण नहीं लगाए जा सकते. उपकरणों की सीमा के बारे में उन्होंने बताया कि दूर लगा कोई उपकरण यह संकेत तो दे सकता है कि हिमालय की तराई में कोई भूंकप आया है और इतना वक़्त दे सकता है कि परमाणु संयंत्र आदि में आपात व्यवस्था की जा सके. लेकिन यह उपकरण यदि दिल्ली में लगा हो तो दिल्ली में ज़मीन के भीतर की जानकारी यह नहीं दे सकता. बचाव का तरीक़ा प्रोफ़ेसर बिलहैम कहते हैं कि न तो भूकंप की सूचना दी जा सकती है और न इसे रोका जा सकता है लेकिन इससे होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि वे इस ख़बर से ख़ुश हैं कि भारत सरकार ने भूकंप रोधी मकान बनाने शुरु कर दिए हैं. भूकंप वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर बिलहैम का कहना था कि लोगों को भी ये ज़िम्मेदारी लेनी होगी और मकान बनवाते समय ठेकेदार से सस्ता मकान बनवाने की जगह भूकंपरोधी मकान बनाने को कहना चाहिए. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ये कहना ठीक नहीं होगा कि सरकारों को भूकंप संभावित क्षेत्रों के आसपास बसाहट को रोका जाना चाहिए था क्योंकि दुनिया में ज़्यादातर आबादी ऐसी ही जगहों पर विकसित हुई है. प्रोफ़ेसर बिलहैम का कहना है कि अब ज़रुरत एहतियात की है, लोगों को जागरुक करने की है और ऐसा ढाँचा खड़ा करने की है जिससे भूकंप का सामना तैयारी के साथ किया जाए. इस समय अंडमान में सूनामी के समय आए भूकंप का अध्ययन कर रहे प्रोफ़ेसर बिलहैम पाकिस्तान जाने के लिए दिल्ली आए थे. लेकिन फ़िलहाल पाकिस्तान ने उन्हें वीज़ा देने से इंकार कर दिया है और वे इससे दुखी हैं. उनका कहना है कि वे इस इलाक़े के भूकंप के बारे में काफ़ी कुछ जानते हैं लेकिन उन्हें इस तरह रोका जा रहा है. वे पिछले तीन साल से अंडमान में काम कर रहे हैं. |
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