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भारतीय कश्मीर में मृतक संख्या 1400 हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने बताया है कि राज्य में भूकंप से मरने वाले लोगों की तादाद 1400 तक जा पहुँची है. मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया है कि उड़ी ज़िले में कम से कम दस गाँव ऐसे हैं जहाँ अभी तक मदद नहीं पहुँचाई जा सकी है. उन्होंने लाचीपुरा, बारीपुरा और चरंदू और चतरौसा जैसे कुछ गाँवों के नाम भी बताए हैं. इनके अलावा, श्रीनगर से बीबीसी के संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि करना के इलाक़े में भी कई गाँव ऐसे हैं जहाँ तक मदद नहीं पहुँची है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि धीरे-धीरे तस्वीर साफ़ हो रही है कि इस भूकंप से जानमाल का कितना अधिक नुक़सान हुआ है. मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने बताया है कि भूकंप की वजह से लगभग डेढ़ लाख मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और इनमें से 42 हज़ार मकान तो पूरी तरह से ढह गए हैं. अधिकारियों ने आशंका व्यक्त की है कि मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती है. राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी बीबी व्यास ने बीबीसी को बताया है कि कम से कम पाँच सौ लोगों के लापता होने की भी ख़बर है जिनमें से अधिकतर लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं. राहत जम्मू कश्मीर में मौजूद बीबीसी संवाददाता नवदीप धारीवाल का कहना है कि ज़्यादातर प्रभावित इलाक़ों में भारतीय सेना पहुँच चुकी है और राहत का काम बहुत तेज़ी से चल रहा है.
उनका कहना है कि आम तौर पर भारतीय सेना को नापसंद करने वाले कश्मीरी लोग इस आपदा की घड़ी में मदद के लिए उनका शुक्रिया अदा कर रहे हैं. भूकंप पीड़ित इलाकों का दौरा कर रहे बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोगों में काफ़ी ग़ुस्सा है कि उन्हें भूकंप के छठे दिन भी खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है. कश्मीर में मौसम की पहली बर्फ़ पड़नी शुरू हो गई है और रात में काफ़ी ठंड होने लगी है, कम से कम डेढ़ लाख परिवार बेघर हो चुके हैं जिन्हें तंबुओं को सख़्त ज़रूरत है. राज्य के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने स्वीकार किया है कि भूकंप पीड़ित लोगों को पर्याप्त संख्या में तंबू नहीं दिए जा सके हैं, उन्होंने कहा है कि अब तक सिर्फ़ चार हज़ार तंबू ही बाँटे जा सके हैं. |
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