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राहत बहुत कम, बहुत धीरे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान और भारत में शनिवार को आए भूकंप के बाद अब चौथे दिन प्रभावित इलाक़ों में राहत सामग्री पहुँचाने और मलबे में फँसे लोगों को निकालने का काम चल रहा है. कश्मीर में नियंत्रण रेखा के दोनों ओर हज़ारों लोगों ने ख़राब मौसम में खुले आसमान के नीचे रात गुज़ारी है, कई स्थानों पर राहत सामग्री नहीं पहुंच पाने के कारण पीड़ित लोगों में ग़ुस्सा भी दिख रहा है. पाकिस्तान के गृह मंत्री आफ़ताब शेरपाओ ने घोषणा की है कि राहत और बचाव के काम में तालमेल लाने के लिए एक समन्वय समिति गठित की जा रही है, सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल फ़ारूक़ को इसका प्रमुख नियुक्त किया गया है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और सूबा सरहद सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जहाँ कुल मिलाकर कम से कम 25 हज़ार लोग मारे गए हैं, मरने वालों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि यह बता पाना मुश्किल है कि मलबे में कितने लोग दबे हुए हैं. पाकिस्तान के भूकंप प्रभावित हिस्सों से बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि कई स्थानों पर लोगों में राहत और बचाव में गड़बड़ी को लेकर ग़ुस्सा है. जम्मू कश्मीर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा है कि राज्य में मरने वालों की संख्या अभी तक 945 है लेकिन उन्होंने इसके बढ़ने की आशंका व्यक्त की है.
भारतीय कश्मीर के तंगधार में मौजूद बीबीसी संवाददाता संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि सेना के जवान दुर्गम इलाक़ों में खाने के पैकेट और पानी पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इतने बड़े पैमाने पर तबाही हुई है कि हर मदद कम ही लग रही है. भारतीय कश्मीर के एक अन्य प्रभावित इलाक़े उड़ी से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि वहाँ बहुत अधिक बेचैनी है क्योंकि नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर से उनका संपर्क कट गया है, लोगों के रिश्तेदार पाकिस्तानी कश्मीर हैं जिनके बारे में भारतीय कश्मीर के लोग जानना चाहते हैं. इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज स्थिति का जायज़ा लेने के लिए भारतीय कश्मीर के भूकंप प्रभावित इलाक़ों का दौरा करेंगे. मुज़फ़्फ़राबाद और बालाकोट पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद से बीबीसी के संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि पूरा शहर सड़कों पर आ गया है, कोई भी इमारत सुरक्षित नहीं है.
सेना मुज़फ़्फ़राबाद में राहत अभियान चला रही है, हेलिकॉप्टरों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुँचाने और रावलपिंडी से दवाइयाँ लाने का काम चल रहा है. ज़फ़र अब्बास का कहना है कि अब कुछ हद तक सड़कें खुल गई हैं, ट्रक सोमवार की रात से राशन-पानी ला रहे हैं जिससे हालत में कुछ सुधार होने की उम्मीद बन रही है. भूकंप से पूरी तरह तबाह हो चुके बालाकोट से स्थानीय पत्रकार नदीम हुसैन ने बताया है कि दो स्कूलों की इमारतों में 1100 छात्र-छात्राएँ दबे हुए हैं. इन दोनों स्कूलों के बच्चों को बाहर निकालने का काम चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के बचावकर्मी कर रहे हैं, कल 11 बच्चों को जीवित निकाला गया था. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की नीलम नदी घाटी की हालत को लेकर चिंता प्रकट की जा रही है, पाकिस्तान के गृह मंत्री ने भी स्वीकार किया है कि वहाँ राहत नहीं पहुँच पा रही क्योंकि सड़क संपर्क टूट गया है. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े:-
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